Jammu Kashmir: खून से सड़कें होती रही लाल, मुंह चिढ़ाता रहा ट्रामा सेंटर; अभी तक नियुक्त नहीं हुआ स्टाफ, जम्मू भेजे जाते हैं मरीज

रामबन ट्रामा सेंटर की शुरू से ही अनदेखी की गई। यहां पर स्टाफ नियुक्त करने के बारे में कोई प्रयास नहीं किया। सालों तक तो इस सेंटर के लिए पद ही सृजित नहीं हुए। करीब एक करोड़ 88 लाख रुपयों की लागत से बना यह सेंटर शोपीस बनकर रह गया।

Rahul SharmaWed, 21 Jul 2021 10:27 AM (IST)
प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी है लेकिन कोई भी इस बारे में कुछ नहीं कर रहा है।

जम्मू, रोहित जंडियाल: करीब एक दशक पहले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन में बना ट्रामा अस्पताल वषों से सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों का मुंह चिढ़ा रहा है। अस्पताल बनने के बाद इस मार्ग पर सैकड़ों लोगों की मौत हो गई लेकिन यहां पर किसी का इलाज नहीं हो पाया। आज भी यह ट्रामा सेंटर दो मेडिकल आफिसर्स के सहारे चल रहा है। इस सेंटर की हालत के बारे में सब आला अधिकारी जानते हें लेकिन किसी ने भी इसे पूरी तरह से शुरू करने के लिए कुछ नहीं किया।

जम्मू से श्रीनगर जाते समय ऊधमपुर के बाद बनिहाल तक के लंबे 95 किलोमीटर राजमार्ग पर रामबन में ही इकलौता ट्रामा सेंटर बनाया गया था। इसका मकसद था कि राजमार्ग पर अगर कोई सड़क दुर्घटना होती है तो घायलों को तुरंत इस सेंटर में ले जाकर वहां पर उनका इलाज किया जाए ताकि समय पर इलाज हो और घायलों की जिंदगी को बचाया जा सके। लेकिन इस ट्रामा सेंटर की शुरू से ही अनदेखी की गई। किसी ने भी यहां पर स्टाफ नियुक्त करने के बारे में कोई प्रयास नहीं किया। कई सालों तक तो इस सेंटर के लिए पद ही सृजित नहीं हुए। करीब एक करोड़ 88 लाख रुपयों की लागत से बना यह सेंटर शोपीस बनकर रह गया।

दो वर्ष पहले तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने इस सेंटर को शुरू करने में गंभीरता दिखाई। प्रशासनिक परिषद की बैठक में इस ट्रामा सेंटर के लिए 34 पद सृजित किए गए। इनमें एक पद सर्जन, एक फिजिशयन, एक गायनाकालोजिस्ट, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, एक आर्थोपैडक्स विशेषज्ञ और एक रेडियालोजिस्ट का पद शामिल है।

वहीं तीन पद मेडिकल आफिसर्स के भी सृजित किए गए। इसके अलावा लैब टेक्निशयन के दो पद, जूनियर नर्स के सात पद, एक्स-रे असिस्टेंट के दो पद, लैब असिस्टेंट के दो पद, थियेटर असिस्टेंट के दो पद, वार्ड ब्वाय के दो और नर्सिंग अर्दली के चार पद भी सृजित किए गए। लेकिन इनमें से किसी भी पद पर नियुक्ति नहीं हुई। अब दो मेडिकल आफिसर्स के पदों पर जरूर नियुक्ति हुई है। लेकिन विशेषज्ञ डाक्टर न होने के कारण अभी यह ट्रामा सेंटर न के बराबर ही काम कर रहा है। अगर इस क्षेत्र में कोई सड़क दुर्घटना होती है तो घायलों को ट्रामा सेंटर लाने के स्थान पर जिला अस्पताल रामबन में लाया जाता है। वहां से गंभीर रूप से हुए घायलों को राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू में भेज दिया जाता है।

रामबन के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. फरीद भी मानते हैं कि जिस उद्देश्य से यह ट्रामा सेंटर बनाया गया था, उसे पूरा नहीं किया जा सका है। उनका कहना है कि सेंटर में विशेषज्ञ डाक्टर न होने के कारण ही इसे सही तरीके से शुरू नहीं किया जा सका है। उनका कहना है कि कई बैठकों में इसका जिक्र हुआ है। प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी है लेकिन कोई भी इस बारे में कुछ नहीं कर रहा है।

वोहरा से लेकर उच्च न्यायालय ने किया हस्तक्षेप: इस ट्रामा सेंटर कोे शुरू करने के लिए पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा ने साल 2015 में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि एक तय समयसीमा में इसे शुरू किया जाए लेकिन कुछ नहीं हुआ। बाद में भाजपा-पीडीपी सरकार के दौरान विधानसभा में भी इस सेंटर को शुरू न करने पर हंगामा हुआ लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। गत वर्ष उच्च न्यायालय ने भी सरकार से इस सेंटर को शुरू करने पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद दो डाक्टरों की तो नियुक्ति हो गई लेकिन यह सेंटर अभी भी विशेषज्ञ डाक्टरों की राह ताक रहा है।

सैकड़ों मौतें पर नींद में सरकार: रामबन पुलिस के आंकड़ों के अनुसार रामबन जिले के बनिहाल से लेकर चंद्रकोट के बीच एक दशक में 858 मौंतें हुई हैं। इन्हीं इलाकों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे भी होते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह प्राकृतिक है। मौसम में थोड़ा बदहाव आने पर इन इलाकों में भूस्खलन होने लगता है। पहाड़ी से मलबा खिसकने के कारण राजमार्ग खतरनाक हो जाता है। राजमार्ग पर फिसलन बढ़ जाती है। ऐसे हालात में ड्राइवर से थोड़ी-सी चूक होते ही दुर्घटना हो जाती है। लेकिन अगर ट्रामा सेंटर कामकर रहा हो तो इनमें घायल होने चाले लोगों का समय पर इलाज कर उनकी जान बचाई जा सकती है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.