राजौरी के डीसी और एडीसी को करना पड़ा पुलिसिया धौंस का सामना, डेढ़ घंटे तक थाने में घुसने नहीं दिया

एक घंटा तक अधिकारियों के इस काफिले को सर्द शाम में सड़क पर इंतजार करना पड़ा। यह घटना शहर में तुरंत चर्चा का विषय बन गया कि जिला प्रशासन के सबसे बड़े अधिकारी को थाने पर परेड करवा दिया गया।

Lokesh Chandra MishraSat, 27 Nov 2021 10:17 PM (IST)
बताया यह जा रहा है जब उपायुक्त का काफिला वहां पहुंचा था तो थाना प्रभारी थाने पर मौजूद नहीं थे।

जम्मू, जेएनएन : राजौरी से पुलिसिया धौंस का आश्चर्यजनक मामला सामने आया। राजौरी के उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त और राजस्व विभाग के सहायक आयुक्त का काफिला शनिवार देर शाम को किसी काम से राजौरी थाने पर पहुंचा, लेकिन थाने का गेट नहीं खोला गया। करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारियों के इस काफिले को सर्द शाम में सड़क पर इंतजार करना पड़ा। अधिकारी इधर-उधर फोन करते रहे। आखिकार डेढ़ घंटे बाद अतिरिक्त एसपी विवेक शेखर मौके पहुंचे और अधिकारियों के काफिले को थाने के अंदर किया, लेकिन डीसी अपने वाहन को थाने के परिसर से मोड़ कर चलते बने।

जम्मू कश्मीर की अपने आप में यह पहली घटना है या कहे देश मेें शायद ही कहीं ऐसा हुआ हो कि जिलाधीश का काफिला किसी थाने पर पहुंचा हो और थाने का गेट नहीं खोला गया हो। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि राजौरी के उपायुक्त राजेश कुमार शवन, अतिरिक्त उपायुक्त सचिनदेव सिंह और सहायक आयुक्त राजस्व के साथ थाने पहुंचे थे। लेकिन अज्ञात कारणों से करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारियों को राजौरी थाने के बाहर ही सड़क पर इंतजार करना पड़ा। यह अधिकारियों के दल को असहज कर रहा था।

बताया यह जा रहा है जब उपायुक्त का काफिला वहां पहुंचा था तो थाना प्रभारी थाने पर मौजूद नहीं थे। पुलिस अधीक्षक भी छुट्टी पर थे। इस समय राजौरी-पुंछ रेंज के डीआइजी विवेक गुप्ता के हाथों ही जिला पुलिस की कामन भी है। करीब डेढ़ घंटे के बाद वहां एएसपी विवेक शेखर पहुंचे तो थाने का गेट खोला गया, लेकिन खिसियाए डीसी ने थाना परिसर में अपना पैर भी नहीं रखा। गाड़ी को थाना से मोड़ कर अपने कार्यालय की ओर निकल लिए। इस डेढ़ घंटे के दौरान शहर में बात पूरी तरह फैल चुकी थी। वहां काफी भीड़ लग गई। उपायुक्त राजेश के शवन ने इस पर यह कहते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया कि वह किसी जरूरी काम में लगे हैं।

बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असली वजह क्या है, अभी इस पर न तो पुलिस के अधिकारी स्पष्ट बोल रहे हैं और न प्रशासन के अधिकारी। चर्चा यह है कि यह पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के बीच वर्चस्व का मामला लगा रहा है। इस पर उपराज्यपाल प्रशासन की ओर से कुछ कार्रवाई भी हो सकती है।

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