Kashmir : पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा नया कश्मीर, आतंकी गतिविधियां बढ़ाने को घुसपैठ के प्रयास तेज किए

Militancy in Kashmir बौखलाहट में आतंकी मुख्यधारा से जुड़े राजनीतिक नेताओं के अलावा निहत्थे पुलिसकर्मियोें पर हमले कर रहे हैं। इन हमलों में आतंकियों के मददगारों की मदद ली जाती है। यह सुरक्षाबलों की सूची में शामिल नहीं होते।

Rahul SharmaFri, 24 Sep 2021 08:05 AM (IST)
पिछले एक साल में 13 निहत्थे पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया है।

श्रीनगर, नवीन नवाज : सुरक्षा बलों की मजबूत घेराबंदी और आतंक की कमर तोड़ने के लिए गए ठोस निर्णयों का असर है कि वादी में अमन लौट रहा है। ज्यों-ज्यों माहौल सामान्य हो रहा है और माहौल बिगाड़ने की तमाम साजिशें विफल हो रही हैं, पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि पाकिस्तान सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ कश्मीर को दहलाने के लिए अधिक से अधिक प्रशिक्षित आतंकियों को नियंत्रण रेखा के इस पार धकेल रही है। राजौरी के सुंदरबनी से उत्तरी कश्मीर के उड़ी तक घुसपैठ की कोशिशें तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में आतंकी निहत्थे व छुट्टी पर आए पुलिसकर्मियों और आम लोगों को निशाना बना अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में जुटे हैं।

पाकिस्तान की यह बौखलाहट यूं ही नहीं है। कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद न कोई हंगामा हुआ और न किसी ने हड़ताल की। स्थानीय आतंकियों की तादाद भी घटी है और अधिकांश आतंकी संगठनों का कश्मीर में शीर्ष नेतृत्व समाप्त हो चुका है। उस पर बिना ताम-झाम के केंद्रीय मंत्रियों के कश्मीर दौरों ने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है। वादी की आबोहवा में यह बदलाव पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा है। यही वजह है कि गुलाम कश्मीर में बैठे आतंकी सरगनाओं पर आइएसआइ लगातार दबाव बना रही है कि वह अपने बचे खुचे कैडर के जरिए हिंसा का नाच तेज करे।

राजौरी-पुंछ में घुसपैठ की सात कोशिशें: उड़ी सेक्टर में पांच दिन में दो बार घुसपैठ का प्रयास हुआ है और तीन आतंकी मारे गए हैं। इससे पूर्व जून में गुरेज सेक्टर में घुसपैठ के प्रयास में तीन आतंकी मारे गए थे। जुलाई से 20 सितंबर तक राजौरी और पुंछ में कथित तौर पर सात बार घुसपैठ का प्रयास हुआ और लगभग 10 आतंकी मारे गए। वहीं, राजौरी के थन्ना मंडी तहसील के ददासन बाला क्षेत्र में संदिग्ध देखे जाने पर सेना व पुलिस के जवानों ने तलाशी अभियान को शुरू कर दिया है।

निहत्थे पुलिसकर्मियों को बना रहे निशाना: बौखलाहट में आतंकी मुख्यधारा से जुड़े राजनीतिक नेताओं के अलावा निहत्थे पुलिसकर्मियोें पर हमले कर रहे हैं। इन हमलों में आतंकियों के मददगारों की मदद ली जाती है। यह सुरक्षाबलों की सूची में शामिल नहीं होते। पिछले एक साल में 13 निहत्थे पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया है।

संयम से जवाब दे रहा कश्मीर : लेफ्टिनेंट जनरल पांडेय

कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने कहा कि कश्मीरी नौजवान अब हिंसक प्रदर्शनों में भाग नहीं लेता। गिलानी की मौत पर पाकिस्तान और उसके एजेंटों ने इंटरनेट मीडिया व अन्य माध्यमों से हालात बिगाड़ने का पूरा प्रयास किया था, लेकिन कश्मीरियों ने संयम और समझदारी से उसके मंसूबों को नाकाम बना दिया। करीब 35 केंद्रीय मंत्री बीते कुछ दिनों के दौरान कश्मीर में अलग अलग शहरोें व कस्बों मे बिना किसी ज्यादा सुरक्षा तामझाम के दौरा कर चुके हैं। इससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी पूरी तरह बौखलाई हुई है। उड़ी में घुसपैठ की कोशिशों को अफगानिस्तान के हालात से जोड़े जाने पर कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने कहा कि सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। हमें आशंका थी कि पाकिस्तान कोई नई चाल चलने वाला है। यह सही साबित हो रही है। सर्दियां शुरू होने वाली हैं, इसलिए घुसपैठ की कोशिशें बढ़ेंगी। मैं इन घटनाओं को अफगानिस्तान के हालात से जोड़कर नहीं देखता।

वादी में आतंकियों के लिए हथियारों की सप्लाई लाइन काटी : आइजी

कश्मीर के आइजीपी विजय कुमार के अनुसार आतंकी हताश हैं, पाकिस्तान भी बौखला चुका है। यही कारण है कि घाटी में टारगेट र्किंलग की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि सेना व अन्य सुरक्षा एजेंसियोें की मदद से वादी में आतंकियों की हथियार सप्लाई लाइन को लगभग समाप्त कर दिया गया है। असाल्ट राइफल या कोई अन्य बड़ा हथियार अब शायद ही कश्मीर पहुंच रहा है। यही वजह है कि आतंकी संगठन अब पिस्तौल ही ज्यादा भेज रहे हैं। एक साल के दौरान हमने 91 पिस्तौल बरामद किए हैं।

पिस्तौल और ग्रेनेड का ज्यादा हो रहा इस्तेमाल: कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने कहा कि आतंकी पिस्तौल और ग्रेनेड का ही ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हेंं छिपाना और रखना आसान होता है। आतंकी सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड फेंक आसानी से भीड़ में गुम हो जाते हैं। अगर वह बाद में पकड़ा जाता है तो उसके पास कोई विस्फोटक या हथियार नहीं मिलता। पिस्तौल चलाने के लिए ज्यादा ट्रेनिंग भी नहीं चाहिए। बीते एक साल में आतंकी घटनाओं में से 85 फीसद में ग्रेनेड और पिस्तौल का इस्तेमाल हुआ है।

सरेंडर की रणनीति का है असर: आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि आतंकियों को जिंदा पकड़ने और मुठभेड़ के समय भी उन्हेंं सरेंडर का मौका दिए जाने की नीति का फायदा हो रहा है। कई स्थानीय आतंकियों ने हथियार डाले हैं। कई आतंकियों ने गुपचुप पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क किया और मुख्यधारा की राह पकड़ी है। स्थानीय आतंकियों की भर्ती में कमी का एक कारण यह नीति भी है। 

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