New Kashmir: कभी तनाव झेल चुका कश्मीर का डाउन-टाउन अब मुस्कुरा रहा

मैंने डाउन-टाउन को बड़ी करीब से देखा और समझा है। यह शहर-ए-खास है लेकिन यहां जीवन की मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कुछ साल पहले हमने शहर से बाहर बेमिना में अपना मकान बनाया। वहां जाकर मैंने डाउन टाउन को बहुत याद किया।

Rahul SharmaFri, 30 Jul 2021 08:40 AM (IST)
फेसबुक पर भी 2.03 लाख लोगों ने यह वीडियो देखा और सराहाने के साथ अपनी प्रतिक्रिया भी दी है।

श्रीनगर, नवीन नवाज : डाउन-टाउन, शहर-ए-खास। कभी पत्थरबाजी और राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों के चलते सुर्खियों में रहने वाला यह इलाका एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह कुछ और है। अब डाउन-टाउन के लोग हंस रहे हैं और खुलकर ठहाके लगा रहे हैं।

दरअसल, डाउन-टाउन में ही पले-बड़े 28 वर्षीय मुसैब सोफी का वीडियो पर आधारित रैप 'वन मिनट अप एंड वन मिनट डाउन, बेबी दिस इज डाउन-टाउन' खूब धूम मचा रहा है। इसकी पहली दो लाइन अंग्रेजी में हैं, बाकी कश्मीरी भाषा में है। डाउन-टउान की तंग गलियों में शूट इस वीडियो में मुसैब ने इलाके की दुश्वारियों को चुटेले अंदाज में उकेरा है। इसमें बताया गया है कि डाउन-टाउन में अस्पताल तो है पर एंबुलेंस नहीं। गाड़ियां तो खूब हैं पर पेट्रोल पंप नहीं। गलियां तंग हैं और घर साथ-साथ सटे, लेकिन फायर स्टेशन नहीं। रास्ते हैं पर सड़कें टूटीं। पर्यटक स्थल हैं पर सैलानी नहीं।

मुसैब सोफी ने यह वीडियो अपनेे दो चचेरे भाइयों शुजान और शरजील के साथ मिलकर तैयार किया है। शरजील गे्रजुएशन कर रहा है और शुजान 12वीं का छात्र है। वीडियो में अशाल भी है, जो पेशे से आटो रिक्शा चालक है। इसी वीडियो की वजह से वह श्रीनगर में एक सेलिब्रिटी बना हुआ है। अशाल की कदकाठी, लंबे बाल और उसका बातचीत करने का अंदाज सभी को भा रहा है।

मुसैब का पूरा वीडियो अभी चार अगस्त को म्यूजिक एप स्पोटिफाई पर रिलीज होना है, लेकिन इस वीडियो को चार दिन में ही यू-ट्यूब पर 2.6 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। फेसबुक पर भी 2.03 लाख लोगों ने यह वीडियो देखा और सराहाने के साथ अपनी प्रतिक्रिया भी दी है।

कैंसर रोगी ने मुझे फोन कर मेरे वीडियो का सराहा : मुसैब ने गीत गुनगुनाया ...वन मिनट अप एंड वन मिनट डाउन, अम काक, गुल काक, सुल काक, हब्बाकदल, कानीकदल, सफाकदल, नवाकदल बेबी दिस इस डाउन-टाउन। मुसैब ने कहा कि इस गाने ने मुझे नयी पहचान दी है। इससे पहले यहां लोग मुझे कामेडियन ही समझते थे, क्योंकि मैं लोगों को हंसाने, गुदगुदाने वाले वीडियो तैयार कर उन्हेंं यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम पर अपलोड करता था। मुझे अपने इन वीडियो के लिए कई लोगों की सराहना मिली है। अस्पताल में उपचाराधीन एक कैंसर रोगी ने भी मुझे फोन कर मेरे वीडियो का सराहा।

घरवाले चाहते थे मैं वकील बनूं : मुसैब ने कहा कि मेरा पुश्तैनी मकान नवाकदल में ही है। मैं डाउन टाउन में ही पला-बड़ा हूं। गांधी कालेज से मैंने ग्रेजुएशन की। फिर इग्नो से एमकाम किया। मेरे पिता व्यापारी हैं और बहन वकील। घर वाले चाहते थे कि मैं भी वकील बनूं, वह मेरे शोक से नाराज थे। शुरू में उन्होंने मेरा काफी विरोध किया। मैने इसे जारी रखा और पिता के साथ काम में हाथ भी बंटाया। एक दिन मैंने पापा से कहा कि आप यहां की जिंदगी को अच्छी तरह समझते हैं, यहांं अगर किसी के चेहरे पर मेरे कारण हंसी आएगी तो आपको अच्छा ही लगेगा। भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए उसने कहा कि मैं चाहता हूं कि मैं लोगों को दिल खोलकर हंसाऊं, इसलिए कुछ और कश्मीरी गीत व सीरियल तैयार करूंगा।

इसलिए मैंने वीडियो बनाने की ठानी : मैंने डाउन-टाउन को बड़ी करीब से देखा और समझा है। यह शहर-ए-खास है, लेकिन यहां जीवन की मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कुछ साल पहले हमने शहर से बाहर बेमिना में अपना मकान बनाया। वहां जाकर मैंने डाउन टाउन को बहुत याद किया। वहां की मुश्किलों के बारे में सोचा और फिर वीडियो बनाने की ठानी। मुझे पूरे गाने और वीडियो का कंसेप्ट तैयार करने में लगभग दो महीने का समय लगा। गाना भी लिखा गया और उन जगहों को चुना गया, जहां शूटिंग बिना किसी रुकावट हो। गाने में कुछ साथी भी चाहिए थे। कोई तैयार नहीं हुआ तो मैंने अपने दो चचेरे भाइयों शरजील और शुजान को तैयार कर लिया। शरजील ने कहा कि घर में हमारा विरोध तो हुआ, लेकिन मुसैब भाई पहले से ही वीडियो बना रहे थे, दूसरा हमने सभी को यकीन दिलाया था कि हमारे वीडियो और गाने में ऐसा कुछ नहीं होगा जो किसी की भावनाओं को नुकसान पहुंचाए। डाउन-टाउन के पुराने घर, पुरानी वास्तुकला सब वीडियो में है और यही गाने को हिट बना रहे हैं।  

'कश्मीर में जो हालात रहे हैं, उसने हम लोगों के पास मुस्कराने, हंसने की वजहों को छीन लिया है। सभी किसी न किसी तनाव और अवसाद का शिकार रहे हैं। इसलिए मैंने यह वीडियो रैप तैयार किया।'  -मुसैब सोफी

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