महबूबा को अब कश्मीर में महिला सीआरपीएफ कर्मियों की तैनाती पर भी एतराज, कहा- अब बच्चे-महिलाएं भी संदिग्ध

महबूबा कश्मीर के हालात बेहतर जानती है और वह यह भी जानती है कि कश्मीर में महिला सीआरपीएफ कर्मियों की तैनाती क्यों करनी पड़ी लेकिन बजाए कश्मीर में शांति प्रयास कर रही सरकार का समर्थन करने के वह अब वहां उनकी तैनाती का विरोध करने लगी हैं।

Rahul SharmaThu, 21 Oct 2021 02:23 PM (IST)
कश्मीर में पिछले कुछ समय से ऐसे हालात बन गए हैं कि वहां कोई गैर कश्मीरी रहना नहीं चाहता।

जम्मू, जागरण संवाददाता : पीपुल्स डेमोक्रिटक पार्टी की प्रधान एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को अब कश्मीर में महिला सीआरपीएफ कर्मियों की तैनाती पर भी एतराज होने लगा है। महबूबा में अपने ट्विटर हैंडल पर महिला सीआरपीएफ कर्मियों की एक बच्ची के सामान की जांच करते हुए तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है कश्मीर घाटी में वर्तमान स्थिति यह है कि अब वहां बच्चे व महिलाएं भी संदिग्ध हैं। भाजपा जम्मू कश्मीर में यह लेकर आई है। उनकी नीतियां हमें दशकों पीछे ले आई हैं।

महबूबा मुफ्ती ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ती जब उसने सरकार की आलोचना नहीं की हो। कश्मीर में गैर कश्मीरियों व अल्पसंख्यकों की हत्याओं के बाद महबूबा ने आतंकियों की निंदा तो कभी नहीं की लेकिन नाका तोड़कर भाग रहे युवक की गोली लगने से मौत को महबूबा ने जरूर मुद्दा बनाने का प्रयास किया था।

अनंतनाग में रहने वाले उस युवक के घर शोक मनाने के बहाने जाने का प्रयास कर रही महबूबा को उसके घर में ही नजरबंद करना पड़ा था। महबूबा कश्मीर के हालात बेहतर जानती है और वह यह भी जानती है कि कश्मीर में महिला सीआरपीएफ कर्मियों की तैनाती क्यों करनी पड़ी लेकिन बजाए कश्मीर में शांति प्रयास कर रही सरकार का समर्थन करने के, वह अब वहां उनकी तैनाती का विरोध करने लगी हैं।

कश्मीर में पिछले कुछ समय से ऐसे हालात बन गए हैं कि वहां कोई गैर कश्मीरी रहना नहीं चाहता। वहीं जम्मू कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि महबूबा का यह ट्विट ऐसा साबित कर रहा है कि जैसे यह पहला मौका है जब देश के किसी कोने में महिला सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर वहां महिला व बच्चों की तलाशी ली जा रही हो। लेकिन ऐसा नहीं है कई जगहों पर जैसे रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या अन्य संवेदनशील इलाकों में ऐसा होते आया है।

शाॅपिंग माल तक बच्चों व महिलाओं की जांच की जाती है। इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। राजनीनि के चलते सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बनाना अच्छा नहीं है। 

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