कश्मीर में अब हाईवे पर भी उतरेंगे युद्धक विमान, LoC-LAC तक पहुंचने में लगेंगे चंद मिनट

बिजबिहाड़ा में निर्मित रोड रनवे का इस्तेमाल मुख्यत चीन और पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। इस रनवे से युद्धक विमानों को दुश्मन के खिलाफ आसमान में उड़ान भरने में करीब एक से डेढ़ मिनट लगेगा। अगलेे पल वह उसके शत्रु विमानों का मुकाबला कर रहें होंगे

Vikas AbrolSun, 12 Sep 2021 08:13 AM (IST)
करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी (रोड रनवे) लगभग तैयार हो चुकी है। इसका काम अंतिम चरण में है।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : चीन और पाक के साथ युद्ध की स्थिति में या फिर कोई अन्य आपात स्थिति में भारतीय वायुसेना के युद्धक विमान किसी भी समय दक्षिण कश्मीर में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर सकते हैं। इसके लिए करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी (रोड रनवे) लगभग तैयार हो चुकी है। इसका काम अंतिम चरण में है। विमानों की ट्रायल लैैंडिग ही शेष है।

श्रीनगर-जम्मू हाईवे-44 के साथ बनाई गई हवाई पट्टी बिजबिहाड़ा में है। यहां युद्धक विमान आसानी से उतर और उड़ान भर सकते हैं। यहां से नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पहुंचने में बेहद कम समय लगेगा। युद्ध की स्थिति में यह पट्टी सेना, वायुसेना व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए कारगर साबित होगी। गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राजस्थान में पाकिस्तान की सरहद से सटे बाड़मेर में गत वीरवार को एक रोड रनवे राष्ट्र को समर्पित किया था।

रोड रनवे की मोटाई अधिक होती है : दक्षिण कश्मीर में रोड रनवे के बारे में संबंधित अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने वायुसेना के विशेषज्ञों की मदद से इसे तैयार किया है। हाईवे के जिस हिस्से पर हवाई पट्टी तैयार की है, वहां निर्माण सामग्री का प्रयोग अलग होता है। रोड रनवे की मोटाई सड़क के अन्य हिस्से से थोड़ी ज्यादा रहती है ताकि विमानों के उतरने या वहां से उड़ान भरने में दिक्कत न हो। बिजबिहाड़ा से चिनारबाग तक हाईवे पर इस पट्टी को तैयार करन में 120 करोड़ की लागत आई है।

सिर्फ 12 जगहों पर हवाई पट्टी की अनुमति : वर्ष 2016 में हाईवे पर हवाई पट्टियां तैयार करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय और वायुसेना की संयुक्त समिति का गठन किया था। समिति ने 2017 में पहली रिपोर्ट दी थी। शुरू में देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिन्हित किए 29 स्थानों पर हवाई पट्टी तैयार करने का फैसला लिया था, लेकिन वायुसेना ने सिर्फ 12 जगहों पर सहमति दी थी। ये हवाई पट्टियां जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। तीन हवाई पट्टियां ओडिया, झारखड और छत्तीसगढ़ में और दो दक्षिण भारत के तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के लिए थी। श्रीनगर स्थित सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाईवे पर विमानों के लिए रनवे की सुविधा कोई असामान्य नहीं है। आगरा एक्सप्रेस-वे पर सुखोई और एन-32 ग्लोबमास्टर जैसे जहाज उतर सकते हैं, उड़ान भर सकते हैं।

वायुसेना को मिलेगा बल : बिजबिहाड़ा में निर्मित रोड रनवे का इस्तेमाल मुख्यत: चीन और पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। इस रनवे से युद्धक विमानों को दुश्मन के खिलाफ आसमान में उड़ान भरने में करीब एक से डेढ़ मिनट लगेगा। अगलेे पल वह उसके शत्रु विमानों का मुकाबला कर रहें होंगे और या फिर अगले तीन मिनट में एलओसी और चार से पांंच मिनट में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार होंगे।  

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