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Masik Shivratri 2021 : रविवार को है वैशाख मासिक शिवरात्रि व्रत, घर में रहकर करें शिव पूजा

शिवरात्रि का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है ।

Masik Shivratri 2021 शिव की अराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है। इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि भोलेनाथ पर चढ़ाया गया प्रसाद न खाएं। अगर शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम हो तो प्रसाद खाने में कोई दोष नहीं होता।

Rahul SharmaFri, 07 May 2021 11:16 AM (IST)

जम्मू, जागरण संवाददाता: शिव की आराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है और अन्तःकरण में अदम्य साहस व दृढ़ता का संचार करती है। ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ अर्थात स्वयं शिव ही हैं। हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। वैशाख मासिक शिवरात्रि 09 मई रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में शिव भक्त जुटने लगते हैं। कोरोना काल में घर में ही पूजा अर्चना करना बेहतर होगा। ऐसे में घर में ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन कर सकते हैं।

पर्व के विषय में महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस बार मासिक शिवरात्रि के दिन प्रीति व आयुष्मान योग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में किए गया कोई भी कार्य सफल होता है। रविवार 09 मई रात्रि 08 बजकर 43 मिनट तक प्रीति योग रहेगा उसके बाद आयुष्मान योग आरंभ हो जाएगा। इस योग में भगवान शिव जी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

विधिपूर्वक व्रत रखने पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है। 

मास शिवरात्रि के दिन शिवपूजन शिवपुराण, रुद्राभिषेक, शिव कथा, शिव स्तोत्रों व ॐ नम: शिवाय का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। शिवरात्रि का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है । शिव पूजा सभी पापों का क्षय करने वाली है।

महिलाओं के लिए शिवरात्रि का विशेष महत्व है।अविवाहित महिलाएं भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें उनके जैसा ही पति मिले। वहीं विवाहित महिलाएं अपने पति और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं।

मासिक शिवरात्री के व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन भगवान शिव शंकर का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। शिव की अराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है।अन्तःकरण में अदम्य साहस व दृढ़ता का संचार करती है। इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि भोलेनाथ पर चढ़ाया गया प्रसाद न खाएं। अगर शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम हो तो प्रसाद खाने में कोई दोष नहीं होता। 

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