कोरोना में बच्चों की सहायता के लिए आगे आई मंजरी सिंह, आर्थिक सहायता-मानसिक रूप से तनाव मुक्त रखने में कर रही मदद

अगर कोई बच्चा अपने परिजनों से बिछूड़ जाता है तो उसे भी परिजनों के साथ मिलाती हैं।

Corona Epidemic Jammu Kashmir कोरोना के समय में कई बच्चों ने यौन शोषण की शिकायतें भी की। यह कश्मीर में अधिक देखने को मिली लेकिन मंजरी सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर ऐसे बच्चों को न्याय दिलाने के लिए भी काम किया।

Rahul SharmaTue, 20 Apr 2021 08:18 AM (IST)

जम्मू, रोहित जंडियाल: कोविड 19 में हर किसी को परेशानी का सामना करना पड़ा है। किसी की पढ़ाई प्रभावित हुई तो किसी का रोजगार छीन गया। कइयों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाईं। लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी थे जो कि इस दौर में सहायता के लिए आगे आए। इन्हीं तमें एक चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन की जम्मू-कश्मीर की प्रभारी मंजरी सिंह भी हैं। उन्होंने 13 जिलों में अपनी टीमों के साथ बच्चों से लेकर अन्य सभी की सहायता की। अभी भी वह बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य के अलावा जरूरी सामान तक उपलब्ध करवा रही हैं।

जम्मू संभाग में इस समय जम्मू, ऊधमपुर, डोडा, कठुआ, रियासी, पुंछ जिलों में चाइल्डलाइन प्रोजेक्ट चल रहा है। वहीं कश्मीर में भी श्रीनगर सहित कुछ जिलों में यह प्रोजेक्ट चल रहा है। यह सभी प्रोजेक्ट मंजरी सिंह के दिशा निर्देशों और निगरानी में ही चलते हैं। पिछले वर्ष जब कोरोना के मामले बढ़े तो मंजरी सिंह अपनी सभी टीमों के साथ बच्चों की सहायता के लिए आगे आईं।

यह वे बच्चे थे जो कि उपेक्षित थे और जरूरतमंद थे। मंजरी और उनकी टीम के सभी सदस्य रोज अपने-अपने जिलों में निकलते थे और इन बच्चों को राश्न की किट, मास्क, इम्यूनिटी बढ़ाने की किट, हैंडवाश, सैनिटाइजर, साबून तक देते थे। यही नहीं बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए आनलाइन कक्षाएं तक लगाई जाती थीं। अगर कोई बच्चा बीमार होता था तो उनकी टीम के सदस्य उठकर उसे अस्पताल ले जेाकर इलाज करवाते थे।

अब एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं तो यह टीमें फिर से सक्रिय हो गई हैं। इन जिलों में चाइल्ड हेल्प डेस्क जम्मू और ऊधमपुर की टीमें रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की मदद करती हैं। अगर कोई बच्चा अपने परिजनों से बिछूड़ जाता है तो उसे भी परिजनों के साथ मिलाती हैं।

तनाव से बचाने के लिए किए कार्यक्रम: पिछले साल लाकडाउन के दौरान बच्चों को मानसिक तनाव से होकर गुजरना पड़ा। कई बच्चे तनाव से होकर गुजर रहे थे। बन बच्चों की मदद के लिए भी मंजरी सिंह आगे आई। उन्होंने यूनीसेफ के साथ मिलकर साइको सोशल स्पोर्ट कार्यक्रम किया और इसमें बच्चों के साथ कई गतिविधियां आयोजित कर उन्हें तनावमुक्त करने का प्रयास किया। यह गतिविधियां उन्होंने जम्मू-कश्मीर के दस से अधिक जिलों में आयोजित की। इसमें उनकी टीम के सदस्य जाते थे और बच्चों के साथ मिलकर गीत-संगीत और खेल गतिविधियां तक आयोजित करते हैं। मंजरी सिंह का कहना है कि बच्चों को इस समय में मानसिक सहायता की जरूरत है और इस कार्यक्रम से बच्चों को तनावमुक्त होने में काफी मदद मिली।

बच्चों को यौन शोषण से बचाया: कोरोना के समय में कई बच्चों ने यौन शोषण की शिकायतें भी की। यह कश्मीर में अधिक देखने को मिली लेकिन मंजरी सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर ऐसे बच्चों को न्याय दिलाने के लिए भी काम किया। उन्होंने ऐसे बच्चों की शिकायतें पुलिस थानों में दर्ज करवाई और बच्चों को भावानात्मक रूप से भी समर्थन दिया। मंजरी सिंह का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में बहुत से बच्चे हैं जिन्हें इस दौर में सहायता की जरूरत होती है। चाइल्ड लाइन की सभी टीमें बच्चों की सहायता कर रही है। इस एक साल में एक या दे नहीं बल्कि पांच हजार से अधिक बच्चों की सहायता की।

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