Jammu : धूमधाम से श्रद्धपूर्वक मनाई गई भैरव अष्टमी, भैरव मंदिर में लगी 52 बिरादियों की मेल

भैरव मंदिर अपर बाजार चौक चबूतरा में विभिन्न जातियों की 52 बिरादरियों की मेल आयोजित की गई। सुबह से लेकर शाम तक पूजा-अर्चना चलती रही। पूरा बाजार पिछले कुछ दिनों से सजाया गया है। प्रतिदिन शाम को आरती तो रोज ही होती है।

Lokesh Chandra MishraSat, 27 Nov 2021 06:54 PM (IST)
सुबह भैरव पूजा के उपरांत कन्या पूजन किया गया। फिर जंगम पूजन, बटुक पूजन हुआ।

जम्मू, जागरण संवाददाता : भैरव अष्टमी शनिवार को पूरी धार्मिक आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाई गई। शहर के सभी भैरव मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई। भैरव मंदिर अपर बाजार चौक चबूतरा में विभिन्न जातियों की 52 बिरादरियों की मेल आयोजित की गई। सुबह से लेकर शाम तक पूजा-अर्चना चलती रही। पूरा बाजार पिछले कुछ दिनों से सजाया गया है। प्रतिदिन शाम को आरती तो रोज ही होती है। वहीं पिछले कुछ दिनों से काला भैरव अष्टमी को देखते हुए भव्य पूजा अर्चना चल रही है।

सुबह भैरव पूजा के उपरांत कन्या पूजन किया गया। फिर जंगम पूजन, बटुक पूजन हुआ। जंगम बाबाओं ने शिव विवाह पढ़ा। भैरव जी की विशेष कर घंटों श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूजा अर्चना के दौरान पूरा क्षेत्र बाबा भैरव की भक्ति के रंग में रंगा दिखा। दत्ता, आनंद, सूदन और सासन समुदाय के लोगों ने बाबा भैरव मंदिर में नतमस्तक होकर परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। महंत रुमिल शर्मा ने बताया कि भैरव साधना स्तंभन, वशीकरण, उच्चाटन और सम्मोहन जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए कि जाती है। इनकी साधना करने से सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। इन्हीं से भय का नाश होता है और इन्हीं में त्रिशक्ति समाहित हैं।

हिंदू देवताओं में भैरव जी का बहुत ही महत्व है। यह दिशाओं के रक्षक और काशी के संरक्षक कहे जाते हैं। कहते हैं कि भगवान शिव से ही भैरव जी की उत्पत्ति हुई। यह कई रूपों में विराजमान हैं बटुक भैरव और काल भैरव यही हैं। इन्हें रुद्र भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव, असितांग भैरव, चंड भैरव, रुद्र भैरव संहार भैरव और भैरवनाथ भी कहा जाता है। नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व रहा है। भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है।व्यक्ति में साहस का संचार होता है। इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है।

रविवार और मंगलवार के दिन इनकी पूजा बहुत फलदायी है। शिवलिंग के सामने आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से जाप करें। महंत रुमिल शर्मा ने बताया कि 29 नवंबर को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जिसमें कोई श्रद्धालु भाग ले सकता है। भंडारा खाने के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं से कोविड़ सावधानियों का पालन करने के लिए कहा गया है।

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