Jammu: भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया 14 मई को मनाई होगी, ऐसे करें पूजा

परशुराम जी चिरंजीवी हैं और सशरीर पृथ्वी पर मौजूद हैं।भगवान परशुराम जी ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र हैं।

भगवान विष्णु जी के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव कल शुक्रवार को मनाया जाएगा। उनका जन्मदिन हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन अक्षय तृतीया का त्योहार भी धूमधाम से मनाया जाता है।

Vikas AbrolThu, 13 May 2021 04:41 PM (IST)

जम्मू, जागरण संवाददाता । भगवान विष्णु जी के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव कल शुक्रवार को मनाया जाएगा। उनका जन्मदिन हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन अक्षय तृतीया का त्योहार भी धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान परशुराम जी चिरंजीवी हैं और सशरीर पृथ्वी पर मौजूद हैं।भगवान परशुराम जी ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र हैं।

धर्मग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार, धरती पर राजाओं द्वारा किये जा रहे अन्याय, अधर्म और पाप कर्मों का विनाश करने के लिए विष्णु जी ने भगवान परशुराम जी का अवतार लिया था। भगवान परशुराम जी भगवान शंकर के परम भक्त हैं। भगवान शंकर जी ने ही परशुराम जी को एक अमोघ अस्त्र− परशु प्रदान किया था। इनका वास्तविक नाम राम था। किंतु हाथ में परशु धारण करने से ये परशुराम नाम से विख्यात हुए।

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि भगवान परशुराम जी पूजन के दौरान शारीरिक शुद्धता के साथ ही मन की पवित्रता का भी ध्यान रखना चाहिए। इस दिन सुबह स्नान कर पूजा के कमरे या घर में किसी शुद्ध स्थान पर एक साफ चौकी पर श्रीगणेश जी, भगवान शिव जी, माता पार्वती, श्री लक्ष्मीनारायण जी एवं भगवान श्री परशुराम जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। प्रतिमा ना हो तो सुपारी स्थापित करें। इसके बाद पूरे कमरे में एवं चौकी पर गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के कलश घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसमें उपस्तिथ देवी, देवता, नवग्रहों, तीर्थों, योगिनियों और नगर देवता की पूजा आराधना करनी चाहिए। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक मंत्रों द्वारा भगवान श्री परशुराम जी सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें। इसमें आवाह्न, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प हार, सुगंधित द्रव्य, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें। इस दिन श्रीपरशुराम चालीसा, भगवान परशुराम जी के मंत्रो का जप करें एवं घर के आस पास जरूरतमंद लोगों को दान अवश्य करें। पूजन के लिए पूरा दिन शुभ है।

इस दिन शाम को अपने-अपने घरों में कोरोना योद्धाओं की रक्षा के लिए जो लोग इस महामारी से ग्रसित हैं। उनके जल्द स्वास्थ्य होने के लिए, जो लोग इस महामारी से जंग हार चुके हैं। उनकी आत्मा की शांति के लिए और कोरोना से मुक्ति के लिए दीप जलाएं तथा महामारी की समाप्ति तक श्री हनुमान चालीसा के पाठ करें। अक्षय तृतीया के दिन से कम से कम श्री हनुमान चालीसा के 11 पाठ शुरू करें तथा आप जितने पाठ कर सकते हैं उतने प्रतिदिन करें एवं भारत के साथ पूरी दुनिया से

कोरोना महामारी का नाश करने की प्रार्थना करें 

कोरोना महामारी के चलते हमें अपने घरों में ही रहकर भगवान श्री परशुराम की पूजा करनी चाहिए। दुनिया कोरोना के संक्रमण से जूझ रही है। प्रदेश में लाकडाउन है। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम घरों में रहकर शहर को कोरोना संक्रमण से बचाने में सहयोग कर सकते हैं। 

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