Kashmir : नौकरी के दौरान भी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे पूर्व सलाहकार बसीर अहमद खान

मार्च 2009 में राज्य सतर्कता संगठन जिसे अब एंटी क्रप्शन ब्यूरो में बदल दिया गया है ने 20 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। जिसमें बसीर अहमद खान कश्मीर के तत्कालीन डिवीजनल कमिश्नर महबूब इकबाल बारामुला के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर फारूक शाह सहित अन्य शामिल थे।

Rahul SharmaTue, 12 Oct 2021 03:28 PM (IST)
खान को सतर्कता संगठन ने सितंबर 2013 में गिरफ्तार भी किया था।

श्रीनगर, राहुल शर्मा: जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए बसीर अहमद खान पर नौकरी के दौरान भी कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2000 में आइएएस कैडर मिलने के बाद खान ने सबसे पहले बारामुला के डिप्टी कमिश्नर का पद्भार संभाला। उसी दौरान केंद्र प्रायोजित योजना के तहत कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के इरादे से गुलमर्ग में करोड़ों रूपये की लागत से प्रोजेक्ट की शुरूआत हुई।

उस समय वहां पर राज्य का सबसे बड़ा गुलमर्ग लैंड स्कैम सामने आया। इस लैंड स्कैम में खान पर सीधे आरोप हैं कि डिप्टी कमिश्नर बारामुला रहते हुए उन्होंने करोड़ों रूपये की जमीन गुलमर्ग में रसूकदारों व होटल मालिकों को स्थानांतिरत कर दी थी। मार्च 2009 में राज्य सतर्कता संगठन जिसे अब एंटी क्रप्शन ब्यूरो में बदल दिया गया है, ने 20 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। जिसमें बसीर अहमद खान, कश्मीर के तत्कालीन डिवीजनल कमिश्नर महबूब इकबाल, बारामुला के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर फारूक शाह सहित अन्य शामिल थे। खान को सतर्कता संगठन ने सितंबर 2013 में गिरफ्तार भी किया था। उन पर यह आरोप भी था कि उन्होंने जानबूझकर इस मामले में सूचनाएं छिपा रखी थी। बाद में उन्हें एंटी क्रप्शन कोर्ट श्रीनगर ने जमानत पर रिहा कर दिया था।

खान के राजनीतिक रसूख का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उनकी गिरफ्तारी भी हुई, उस समय भी वह डिप्टी कमिश्नर किश्तवाड़ के पद पर थे। हालांकि यह मामला अभी भी न्यायालय में है। इसके बाद भी बसीर अहमद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे लेकिन बावजूद इसके वह राजनीतिक रसूख के चलते वह हमेशा ही महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त होते रहे।

खाना बारामुला के अलावा डिप्टी कमिश्नर श्रीनगर के पद भी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2019 में ही जब खान डिवीजनल कमिश्नर श्रीनगर के पद से वह सेवानिवृत्त होने ही वाले थे, सरकार ने उनका कार्यकाल एक साल और बढ़ा दिया था। यही नहीं सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद 15 मार्च 2020 को उन्हें जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल के चौथे सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। उस समय प्रदेश में जीसी मुर्मू उपराज्यपाल थे। मुर्मू केे जाने के बाद मनोज सिन्हा ने उपराज्यपाल का पद संभाला और उन्होंने भी बसीर अहमद खान की सेवाएं जारी रखीं।

सलाहकार रहते हुए उन्हें पीडीडी, ग्रामीण विकास और पंचायती राज, संस्कृति एवं पर्यटन और फूलवानी विभाग सौंपे गए थे। खान पर सीबीआइ की ताजा छापेमारी श्रीनगर से जारी हुए फर्जी गन लाइसेंस मामले में की गई है। खान दिसंबर 2011 से मार्च 2013 तक डिप्टी कमिश्नर श्रीनगर रहे हैं। सीबीआइ उनके कार्यकाल में जारी हुए फर्जी गन लाइसेंस की जानकारी जुटाने के लिए ये छापेमारी कर रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार फर्जी गन लाइसेंस की सीबीआइ जांच में बसीर अहमर खान का नाम सामने आया तो, इस बारे में गृह मंत्रालय को सूचित किया गया। बताया जाता है कि सबूतों के आधार पर गृह मंत्रालय ने खान को उपराज्यपाल के सलाहकार के पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया।  

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