Jammu Kashmir: उपराज्यपाल सिन्हा ने जनजातीय समुदायों में बांटे सामुदायिक प्रमाण पत्र, बोले- वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार जनजातीय समूहों व अन्य परंपरागत वनवासियों के कल्याण के लिए सिर्फ वनाधिकार अधिनियम लागू करने तक सीमित नहीं है प्रदेश सरकार उनकी शिक्षा स्वास्थ्य व अन्य मौलिक सुविधाओं के लिए भी सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

Vikas AbrolMon, 13 Sep 2021 08:37 PM (IST)
उपराज्यपाल ने कहा कि इस कानून का कार्यान्वयन संभव बनाने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी का आभारी हूं।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश सरकार अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों के संरक्षण और उनके विकास व कल्याण के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। वह जम्मू कश्मीर में अनुसूचित जनजातियां व अन्य परंपरागत वनवासी अधिकार (वनों के अधिकारों की मान्यता) अधिनियम को कार्यान्वित किए जाने के संदर्भ में आज यहां शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर एसकेआइसीसी में आयोजित एक समारोह मे बोल रहे थे। उन्हाेंने इस अवसर पर गुज्जर-बक्करवाल और गद्दी सिप्पी समुदाय के लोगों को वनाधिकार के निजी व सामुदायिक प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।

उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू कश्मीर में इस कानून का कार्यान्वयन संभव बनाने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी का आभारी हूं। आज का दिन जम्मू कश्मीर और इसके निवासियों विशेषकर जनजातीय समूहों के लिए एक एतिहासिक दिन है। मुझे पूरा यकीन है कि यह नया कानून केंद्र शासित प्रदेश में अब तक अपने वनाधिकारों से वंचित रही जनजातीय आबादी के सशक्तिकरण और खुशहाली का एक नया दौर लेकर आएगा। वर्ष 2019 से पूर्व जम्मू कश्मीर मे कई केंद्रीय कानून लागू नहीं थे। मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं, क्योंकि उन्हीं के कारण पहली दिसंबर 2020 को हमने वनाधिकार अधिनियम लागू किया है। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश प्रशासन विशेषकर वन विभाग और जनजातीय विभाग ने इन समुदायों की बेहतरी के लिए एक अभियान शुरु किया है। करीब 20 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, कई लोगों को हमने प्रमाणपत्र प्रदान किए हैं, सभी पात्र लोगोें को उनका अधिकार मिलेगा।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार जनजातीय समूहों व अन्य परंपरागत वनवासियों के कल्याण के लिए सिर्फ वनाधिकार अधिनियम लागू करने तक सीमित नहीं है, प्रदेश सरकार उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य मौलिक सुविधाओं के लिए भी सभी आवश्यक कदम उठा रही है। मुझे इस बात का संतोष है कि हम इस वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने मे अब तक सफल रहे हैं और आगे भी सफल रहेंगे।

उन्होंने जनजातीय समूहों के राजनीतिक व आार्थिक विकास पर जोर देते हुए कहा कि मैं आप लोगों को सरकारी रोजगार व राजनीतिक आरक्षण का भी यकीन दिलाता हूं। आप लोगों ने एक लंबे समय तक अपने अधिकारों की बहाली के लिए इंतजार किया है, कई लोगों ने अपने वोट बैंक के लिए आपकी भावनाओं का इस्तेमाल करते हुए उनसे खिलवाड़ किया है, लेेकिन किसी ने अापका ध्यान नहीं रखा। आपका कल्याण और आपके अधिकार, मेरे लिए कोई सियासी मुद्दा नहीं है, लेकिन जब मैं दिल्ली से यहां आया था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे दो- तीन अहम चीजें बताई। उनमें से एक वनाधिकार अधिनियम का कार्यान्वयन था। मैं आज कह सकता हूं कि अब इसकी शुरुआत हो चुकी है।

उपराज्यपाल ने कहा कि जिन भी इलाकों में गुज्जर-बक्कर समुदाय प्रदान किए जा रहे हैं, वहां 10 करोड़ रूपये की राशि मौलिक सुविधाओं के विकास के लिए तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वनाधिकार अधिनियम को लाभ पूरी तरह सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग और वन सदियों से एक साथ ही हैं। जनजातीय वर्ग को वनाधिकार अधिनियम के जरिए सशक्त बनाना अवश्य ही उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाएगा। वनीय संपदा के प्रयोग के अधिकार से गुज्जर-बक्करवाल समुदाय आत्मनिर्भर अौर आर्थिक रुप से मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मैं संबधित अधिकारियों को निर्देश देता हूं कि वह इस बात को सुनिश्चित बनाएं कि कोई भी अपात्र इस योजना का लाभ न ले सके।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुज्जर-बक्करवाल समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि वह वन्य जीव और वनों के संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी को ठीक उसी तरह निभाएं जिस तरह वह अपने स्वजनों के प्रति निभाते हैं। वनों की जैव विविधिता का संरक्षण किया जाना जरुरी है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर प्रदेश सरकार ने जनजातीय समूहों के सपनों को साकार बनाने का जिम्मा संभाल रखा है। इन सपनाेें को पूरा करने के लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरे विचार में किसी मंदिर-मस्जिद में जाकर दुआ करने से कहीं ज्यादा पुण्य का काम जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए व्यावहारिक प्रयास करते हुए उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाना है।

उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक जिले में गुज्जर-बक्करवाल समुदाय समेत प्रत्येक जनजातीय वर्ग के लिए लड़कियों और लड़कों के हॉस्टल के निर्माण और उनकी कला संस्कृति को प्रचारित व संरक्षित करने का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 28 करोड़ की लागत से आठ जगहों पर जनजातीय समूहों के लिए ट्रांजिट आवासीय सुविधा के निर्माण का भी फैसला किया है। इस तरह की सुविधा आगे चलकर अन्य जगहों पर भी तैयार की जाएगी। प्रत्येक ट्रांजिट आवासीय सुविधा मेें 150-200 लोग एक साथ ठहर सकते हैं। उनके मवेशियों के ठहरने का भी प्रबंध किया गया है। 

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