Ladakh LG Mathur ने संस्कृति मंत्रालय से कहा- लद्दाख के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फार बुद्धिस्ट स्टडीज को मान्यता दें

सेंट्रल इंस्टीट्यूट फार बुद्धिस्ट स्टडीज को केंद्रीय बोर्ड की मान्यता दिलाने का मुद्​दा पिछले काफी समय से उठ रहा है।

उपराज्यपाल ने जोर दिया कि वर्ष 2016 के प्रभाव से इस महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान को बोर्ड की मान्यता दिलाई जाए ताकि इससे पढ़ाई कर चुके अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल पाए। इसके साथ संस्थान के सभी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को भी बेहतर बनाया जाए।

Rahul SharmaWed, 21 Apr 2021 09:30 AM (IST)

जम्मू, राज्य ब्यूरो: लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट फार बुद्धिस्ट स्टडीज (सीआईबीएस) को मान्यता दिलाने का मुद्दा मंगलवार को दिल्ली में उठाया। उपराज्यपाल ने दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों से बैठक कर जोर दिया कि सीआईबीएस को किसी उचित बोर्ड की मान्यता दिलाकर इस शिक्षण संस्थान को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने बौद्ध शिक्षा को समर्पित संस्थान को वित्तीय सहयोग देने पर भी जोर दिया। यह बैठक दिल्ली स्थित लद्दाख भवन में हुई।

उपराज्यपाल ने जोर दिया कि वर्ष 2016 के प्रभाव से इस महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान को बोर्ड की मान्यता दिलाई जाए ताकि इससे पढ़ाई कर चुके अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल पाए। इसके साथ संस्थान के सभी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को भी बेहतर बनाया जाए। बैठक में स्कूली पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने संबंधी मुद्दों पर भी विचार विमर्श हुआ।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट फार बुद्धिस्ट स्टडीज को केंद्रीय बोर्ड की मान्यता दिला इसे बढ़ावा देने का मुद्दा लद्दाख में पिछले काफी समय से उठ रहा है। मान्यता न होने से संस्थान को केंद्र की ओर से उचित वित्तीय सहायता नही मिल पा रही है। ऐसे में कुछ दिन पहले इस संस्थान को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की मान्यता दिलाने की मांग को लेकर लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नाम्गयाल, लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के प्रधान थुप्स्तान छिवांग ने लेह में उपराज्यपाल से बैठक की थी। इसके साथ उन्होंने जोर दिया था कि लद्दाख के स्कूली पाठ्यक्रम में क्षेत्र की भाषा, संस्कृति आदि को प्रोत्साहित किया जाए।

इसके अलावा उपराज्यपाल माथुर ने लद्​दाख में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और बेहतर बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि लद्​दाख में अभी काफी काम होना बाकी है। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि यहां के लोग जिन परेशानियों को पिछले कई सालों से झेल रहे थे, चरणबद्ध तरीके से उन्हें समाप्त किया जाए ताकि वे राहत की सांस ले सकें।

 

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