Kashmir Tulip Garden: हर साल 5 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने वाला कश्मीर का विश्व प्रसिद्ध ट्यूलिप गार्डन हुआ विरान

बाग में आगुंतकों के प्रवेश शुल्क से होने वाली कमाई को विभिन्न बागों के रख-रखाव पर ही खर्च करता है।

Kashmir Tulip Garden पाबंदियों और कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों का असर अब स्थानीय गतिविधियों पर साफ नजर आने लगा है। पर्यटकों की संख्या लगातार घटती जा रही है। मुगलकालीन बागों में ही नहीं डल और ट्यूलिप गार्डन में आगुंतकों की कमी हालात का अंदाजा करा देती है।

Rahul SharmaThu, 22 Apr 2021 08:46 AM (IST)

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कोरोेना संक्रमितों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण ट्यूलिप गार्डन भी अब विरान होने लगा है। बाग खुलने के पहले 20 दिनों के दौरान औसतन 10 हजार लोग ट्यूलिप देखने आ रहे थे जबकि बीते चार दिनों में यह संख्या घटकर दो हजार के आस-पास ही रह गई। इस बीच, जम्मू-कश्मीर फलोरीकल्चर विभाग के राजस्व पर भी हालात की मार साफ नजर आने लगी है।

बीते दो सालों में विभाग को लगभग पांच करोड़ की आय हुई है जबकि वित्त वर्ष 2014-2019 तक विभाग ने हर साल औसत पांच करोड़ कमाए हैं। घाटी में शालीमार, निशात, ट्यूलिप समेत सभी प्रमुख बाग-बगीचे फलोरीकल्चर विभाग के अधीन हैं। इन बाग-बगीचों में प्रवेश के लिए प्रत्येक को शुल्क चुकाना होता है। बाग में आगुंतकों के प्रवेश शुल्क से होने वाली कमाई को विभाग विभिन्न बागों के रख-रखाव पर ही खर्च करता है।

आपको बता दें कि कश्मीर घाटी में भी बीते कुछ दिनों से काेरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालात पर काबू पाने के लिए प्रदेश प्रशासन ने भी अन्य राज्यों की तरह कई पाबंदियां लागू कर दी हैं। पाबंदियों और कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों का असर अब स्थानीय गतिविधियों पर साफ नजर आने लगा है। पर्यटकों की संख्या लगातार घटती जा रही है। मुगलकालीन बागों में ही नहीं डल और ट्यूलिप गार्डन में आगुंतकों की कमी हालात का अंदाजा करा देती है। 

 ट्यूलिप गार्डन में जहां 15 लाख के करीब रंग बिरंगे ट्यूलिप खिले हुए हैं, अब विरान नजर आ रहा है। शुक्रवार के बाद से ट्यूलिप गार्डन में आने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। इससे पहले गार्डन में रोजाना अौसतन 10 हजार के करीब लाेग आ रहे थे। अब बीते चार दिनोें में यह संख्या अब चार हजार के आस-पास पहुंच गई है। बाग में काम करने वाले अरशद नामक एक कर्मी ने बताया कि पिछले हफ्ते तक तो यहां बाग में जहां तहां लोग सेल्फी लेते नजर आते थे। चारों तरफ लोग नजर आते थे, अब बाग पूरी तरह सूना हो गया है। पिछले महीने जब हमने बाग को खोला था तो उस समय यहां जो भीड़ थी, वह देखने लायक थी।

ट्यूलिप गार्डन के बाहर वाहन पार्किंग के ठेकेदार ने कहा कि अब मुश्किल से पूर दिन 40-45 छोटे बड़े वाहनों में लोग आ रहे हैं। इनमें सैलानियाें की चार से छह टैक्सियां होती हैं। आज दोपहर तक सिर्फ एक टूरिस्ट टैक्सी आयी है और उसमें चार लोग थे। लोग आएंगे कैसे कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है। कश्मीर से बाहर कई शहरों में लाकडाउन लग चुका है। हमारे यहां लाकडाउन नहीं है, लेकिन पाबंदियां तो हैं।

इस बीच, फलोरीकल्चर विभाग के एक अधिकारी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि कश्मीर के सुरक्षा परिदूश्य और काेरोना संक्रमण का असर अब विभाग पर भी नजर आने लगा है। विभाग का राजस्व भी बीते दाे सालों में लगातार घटा है। अगर हम बीतेे दो वित्तीय वर्षाें की तुलना उनसे पिछले पांच सालों से करें तो राजस्व वसूली में करीब 54 फीसद कमी आयी है। वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2018-19 तक फलोरीकल्चर विभाग ने 26.89 करोड़ रुपये कमाए हैं। फलोरीक्लचर विभाग के रिकार्ड के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 4.34 करोड़, वर्ष 2015-16 के दौरान 3.97 कराेड़, वर्ष 2016-17 के दौरान 5.56 करोड़, वर्ष 2017-18 के दौरान 4.89 करोड़ और वर्ष 2018-19 के दौरान 8.12 करोड़ रूपये का राजस्व जमा हुआ है। इसके बाद इसमें कमी आयी है। वर्ष 2019-20 के दौरान 2.88 करोेड़ अौर वर्ष 2020-21 के दौरान 2.07 करोड़ रूपये का राजस्व जुटाया गया है।

वादी में बीते दो सालों के दौरान जाे हालात रहे हैं, उनके कारण ही फलोरीकल्चर विभाग की आय प्रभावित हुई है। पहले पांच अगस्त 2019 के बाद यहां कई तरह की पाबंदियां थी, जब वह दूर हुई तो कोरोना का संक्रमण शुरु हो गया। उन्होंने कहा बेशक फलोरीकल्चर विभाग को सैलानियों व स्थानीय आगुंतकाें से होने वाली आय का विभाग के खर्चां पर ज्यादा असर नहीं हाेता, लेकिन यह कमाई कई अन्य छोटे खर्च और बागों के रखरखाव में बड़ी सहायता करती है।

ट्यूलिप में सैलानियों की घटती संख्या का जिक्र करते हुए उक्त अधिकारी ने बताया कि 25 मार्च से 15 अप्रैल तक 2.16 लाख स्थानीय आगुंतक और सैलानी ट्यूलिप गार्डन की सैर कर चुके थे। बीते पांच दिनों में औसत दो हजार के करीब ही लोग बाग में आ रहे है।

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