Jammu: बुधवार को है जीवित्पुत्रिका व्रत, संतान की लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना के लिए ऐसे करें पूजा

जीवित्पुत्रिका व्रत के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया किइस व्रत को जितिया जिउतिया या जीमूतवाहन के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्रीगणेश जी भगवान श्रीकृष्ण जी एवं सूर्य नारायण जी की पूजा अर्चना की जाती है।

Vikas AbrolMon, 27 Sep 2021 08:50 AM (IST)
सूर्योदय व्यापिनी आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 29 सिंतबर बुधवार को होगी।

जम्मू, जागरण संवाददाता : जीवित्पुत्रिका व्रत हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन किया जाता है। यह व्रत संतान प्राप्ति उनकी लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना के लिए किया जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत वे सौभाग्यवती स्त्रियां रखती हैं, जिनको संतान होती हैं, इसके साथ ही जिनके संतान नहीं होते वह भी संतान की कामना और संतान की लंबी आयु के लिए इस व्रत को पूरे विधि-विधान से निर्जल रहकर रखती हैं।

इस वर्ष आश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 28 सिंतबर मंगलवार शाम 06 बजकर 17 मिनट पर शरू होगी और 29 सिंतबर शाम 08 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 29 सिंतबर बुधवार को होगी, इसलिए इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सितंबर, बुधवार को किया जाएगा। जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण 30 सितंबर गुरुवार सुबह सूर्य पूजन कर किया जाएगा।

इस व्रत में भगवान श्रीगणेश जी, भगवान श्रीकृष्ण जी एवं सूर्य नारायण जी की पूजा अर्चना की जाती है

जीवित्पुत्रिका व्रत के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया किइस व्रत को जितिया, जिउतिया या जीमूतवाहन के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश जी, भगवान श्रीकृष्ण जी एवं सूर्य नारायण जी की पूजा अर्चना की जाती है।इस व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है।

धर्मग्रंथों के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण जी ने अपने पुण्य कर्मों को अर्जित करके उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को जीवनदान दिया था, इसलिए यह व्रत संतान की रक्षा की कामना के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के फलस्वरुप भगवान श्रीकृष्ण जी संतान की रक्षा करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन गन्धर्वराज जीमूतवाहन की कृपा से गरुड़ ने नागों को न खाने का भी वचन दिया था। बुधवार 29 सिंतबर अष्टमी तिथि का श्राद्ध भी होगा।

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