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Coronavirus in Jammu Kashmir: हमारे सात करोड़ पड़े है जनाब, कोरोना मरीजों के उपचार में कर ले इस्तेमाल

सिंह ने ई-नीलामी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग भी की ताकि सच्चाई लोगाें के सामने आ सके।

जम्मू वाइन ट्रेडर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चरणजीत सिंह ने कहा है कि 100 के करीब बाहरी राज्यों के लोगों ने स्थानीय लोगों के नाम पर ई-नीलामी में हिस्सा लिया है और कई ऐसी कंपनियां है जिन्होंने ऐसा करके 30-30 लाइसेंस हासिल किए है।

Rahul SharmaFri, 07 May 2021 11:52 AM (IST)

जम्मू, जागरण संवाददाता: दरियादिली किसका नाम है, यह जम्मू वाइन ट्रेडर्स एसोसिएशन ने बता दिया। जम्मू-कश्मीर की नई आबकारी नीति आने से खुद बेरोजगार हो गए है लेकिन दिलों में अभी भी दूसरों की मदद करने का जज्बा बरकरार है।

एसोसिएशन के सदस्य अपने सामाजिक दायित्व के तहत हर महीने आबकारी विभाग के पास पैसे जमा करवाते थे। आज विभाग के पास इस फंड में करीब सात करोड़ रुपये पड़े है। कोरोना महामारी के बीच जिस तरह से लोग उपचार के लिए दरबदर हो रहे हैं, उसे देखते हुए एसोसिएशन ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की है कि विभाग के पास पड़े उनके सात करोड़ रुपये कोरोना मरीजों के लिए उपचार के लिए जरूरी सामान खरीदने के लिए खर्च कर लिए जाए।

एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चरणजीत सिंह ने उपराज्यपाल से अपील की है कि शराब विक्रेताओं का जो सात करोड़ रुपया आबकारी विभाग के पास पड़ा है, उससे ऑक्सीजन कंसनट्रेटर्स, सिलेंडर, वैंटीलेटर व अन्य उपकरण खरीदे जाए ताकि जम्मू-कश्मीर में बिना उपचार किसी की जान न जाए। सिंह ने कहा है कि बेशक सरकार ने नई आबकारी नीति लागू करके उनका रोजगार छीन लिया है लेकिन वो आज भी जम्मू-कश्मीर के आम लोगों व सरकार के साथ खड़े हैं और इस मुश्किल घड़ी में सरकार का साथ देने को तैयार है। सिंह ने कहा है कि मौजूदा हालात में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है, लिहाजा सरकार उनके पैसे का इसमें इस्तेमाल करें।

विफल साबित हुई है नई आबकारी नीति: जम्मू वाइन ट्रेडर्स एसोसिएशन ने सरकार की नई आबकारी नीति को पूरी तरह से विफल करार देते हुए कहा है कि सरकार ने दावा किया था कि शराब की दुकानों के लाइसेंसों की ई-नीलामी करके उन्हें 140 करोड़ रुपये का राजस्व आया है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चरणजीत सिंह ने यहां जारी बयान में कहा है कि यह पैसा सात दिन के भीतर जमा करवाया जाना था लेकिन आज तक यह पैसा जमा नहीं हुआ और यह पैसा सिर्फ आंकड़ों में ही है।

सिंह ने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि इस नीति से पारदर्शिता आएगी और सरकार ने शराब माफिया खत्म करने के लिए यह नीति लाई है लेकिन इस नीति से शराब का कारोबार चंद लोगों के हाथ में चला गया। सिंह ने कहा है कि 100 के करीब बाहरी राज्यों के लोगों ने स्थानीय लोगों के नाम पर ई-नीलामी में हिस्सा लिया है और कई ऐसी कंपनियां है जिन्होंने ऐसा करके 30-30 लाइसेंस हासिल किए है। उन्होंने कहा कि पहले तो यह कारोबार 250 के करीब लोग चला रहे थे लेकिन अब चंद लोग चलाएंगे और अब वास्तव में जम्मू-कश्मीर में शराब माफिया खड़ा होगा। सिंह ने ई-नीलामी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग भी की ताकि सच्चाई लोगाें के सामने आ सके। 

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