Jammu Kashmir: नहीं होने जा रहा जम्मू-कश्मीर का विभाजन, कुछ शरारती तत्व डर पैदा करने का कर रहे प्रयास

उपराज्यपाल ने जम्मू और कश्मीर संभाग के चहुंमुखी व एक समान विकास के प्रति अपनी संकल्पबद्धता को दोहराया। बीते 11 माह के दौरान लिए गए फैसलों में से आप कोई एक ऐसा फैसला गिनाएं जो किसी भी तरह से किसी क्षेत्र विशेष के खिलाफ हो या भेदभावपूर्ण हो।

Rahul SharmaSat, 12 Jun 2021 09:21 AM (IST)
जम्मू कश्मीर में आम लोगों को इन अफवाहों से कोई सरोकार नहीं है। वह इन्हेंं नकार चुके हैं।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो टूक कहा कि न तो जम्मू-कश्मीर का विभाजन होने जा रहा है और न ही ऐसा कुछ बड़ा होने जा रहा है, जिसके लिए यहां अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की जरूरत है। यह सिर्फ शरारती तत्वों द्वारा अपने नीहित स्वार्थ के लिए लोगों में डर व असमंजस पैदा करने के लिए फैलाई जा रही अफवाह से ज्यादा कुछ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यहां परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होते ही विधानसभा चुनाव होंगे। उन्होंने श्री अमरनाथ की वाॢषक तीर्थयात्रा को लेकर फैले असंमजस को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि हालात का जायजा लेने के बाद ही इसका फैसला होगा। हमारे लिए लोगों की जिंदगी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक निजी न्यूज चैनल के साथ साक्षात्कार में जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालात पर चर्चा करते हुए कहा कि यहां कई लोगों के पास कुछ अच्छा करने को नहीं है। यह लोग आम कश्मीरियों की भावनाओं का लाभ उठाते हुए, अफवाहों का सहारा लेते हुए अपने नीहित स्वार्थ के लिए लोगों में डर व असंमजस पैदा करते हैं। जम्मू कश्मीर के विभाजन और यहां सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर जो माहौल पैदा किया जा रहा है, अफवाहें फैलाई जा रही हैं, यह सिर्फ चंद राष्ट्रविरोधी तत्वों के दिमाग की उपज हैं। इन अफवाहों को देश के बाहर सक्रिय शरारती तत्वों ने भी हवा दी है। उन्होंने कहा कि मैं इन सभी अफवाहों का पूरी जिम्मेदारी के साथ खंडन करता हूं। यहां जम्मू कश्मीर में आम लोगों को इन अफवाहों से कोई सरोकार नहीं है। वह इन्हेंं नकार चुके हैं।

सामान्य है सुरक्षाबलों की तैनाती : प्रदेश में विशेषकर घाटी में बीते कुछ दिनों के दौरान अद्र्धसैनिकबल की बढ़ी तैनाती को पूरी तरह सामान्य बताते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह सुरक्षाबल देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव के लिए गए थे। अब लौट रहे हैं और अपने-अपने मूल ड्यूटी स्थल पर जा रहे हैं। इसके अलावा श्री अमरनाथ यात्रा से पूर्व जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों की तैनाती को बढ़ाया जाना एक सामान्य प्रक्रिया है। यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा है, जिसके लिए सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकडिय़ों को देश के विभिन्न हिस्सों से मंगवाकर तैनात करना पड़े।

स्थिति के अनुसार होगा अमरनाथ यात्रा का निर्णय : उपराज्यपाल ने अमरनाथ यात्रा को लेकर कहा कि हमने श्रद्धालुओं का पंजीकरण शुरू किया था। कोविड के कारण पैदा हालात में इसे बंद किया गया। तीर्थयात्रा को लेकर अंतिम फैसला हालात की समग्र समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। हमारे लिए आम लोगों के जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

कोई क्षेत्रीय भेदभाव नहीं : उपराज्यपाल ने जम्मू और कश्मीर संभाग के चहुंमुखी व एक समान विकास के प्रति अपनी संकल्पबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि बीते 11 माह के दौरान लिए गए फैसलों में से आप कोई एक ऐसा फैसला गिनाएं, जो किसी भी तरह से किसी क्षेत्र विशेष के खिलाफ हो या भेदभावपूर्ण हो। जम्मू और कश्मीर दोनों के एक समान विकास के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यहां किसी जाति, धर्म या क्षेत्र पर पक्षपात अब बीते समय की बात हो चुकी है।

विधानसभा चुनाव परीसीमन के बाद : उपराज्यपाल ने कहा कि परिसमन की प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद ही जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से और केंद्रीय गृह मंत्री न संसद में इसका यकीन दिलाते हुए कह चुके हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव कराए जाएंगे।

नेकां अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाए : उपराज्यपाल ने डा. फारूक अब्दुल्ला द्वारा परिसीमन आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के दिए गए संकेत को सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि अगर नेकां इस प्रक्रिया का हिस्सा बनती है तो वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वाह करेगी।

वादी में हर जगह लहरा रहा तिरंगा : उपराज्यपाल ने कहा कि आज हर एक सरकारी कार्यालय पर तिरंगा लहरा रहा है। जो लोग एनसीसी का विरोध कर रहे थे, अब चुप हैं। हाल ही में मैं अनंतनाग के एक एनसीसी कैडेट से मिला। वह बड़ी शान और गर्व के साथ भारत माता का झंडा उठाए हुए था। कश्मीर का युवा इस सुखद बदलाव को अपना चुका है।

हालात सुधरे हैं : मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा परिदृश्य में सुधार हुआ है। पर्यटक बड़ी संख्या में आ रहे हैं। पर्यटक भी मानते हैं कि अब कश्मीर में सुरक्षा का कोई मुद्दा नहीं है। आतंकी हिंसा में कमी आई है।

हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी : उपराज्यपाल ने भाजपा नेता राकेश पंडिता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि वादी में कुछ एक आतंकी घटनाएं हुई हैं। यह सिर्फ यहां शांति और विकास के माहौल को भंग करने के लिए हैं। हमने इन घटनाओं का कड़ा नोटिस लिया है और इनमें लिप्त तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

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