Jammu Kashmir: फौजी बन पाकिस्तान के दिए हर जख्म का हिसाब चाहते हैं सीमांत युवा, गोलाबारी से बने युद्ध जैसे हालात में तपकर हुए हैं तैयार

गांवों के युवा भर्ती मैदान में भी सबसे आगे होते हैं।

सेना के पीआरओ डिफेंस लेफ्टिनेंट कर्नल देवेन्द्र आनंद भी मानते हैं कि सीमांत क्षेत्रों के युवा सेना में भर्ती होकर अच्छे सिपाही बनते हैं। उनका कहना है कि ये युवा सीमा के चुनाैतीपूर्ण हालात में पल बढ़कर मजबूत बनते हैं।

Rahul SharmaThu, 25 Feb 2021 10:40 AM (IST)

जम्मू, विवेक सिंह : पाकिस्तान द्वारा सीमांत क्षेत्रों में पैदा किए गए युद्ध जैसे माहौल में तपकर तैयार हुए सीमांत युवा, सैनिक बनकर पाकिस्तान द्वारा दिए गए हर एक जख्म का हिसाब लेना चाहते हैं। बिना वर्दी के अपने इलाकों की सुरक्षा को लेकर सर्तक रहने वाले इन युवाओं के हाथ में बंदूक आने पर उनका दुश्मन पर कहर बरपाना तय है।

जम्मू के सुजंवा सैन्य क्षेत्र के जोरावर स्टेडियम में बुधवार को सेना की भर्ती में दम दिखाने पहुंचे दो हजार के करीब युवाओं में से साठ प्रतिशत के करीब ऐसे युवा थे जिनके गांव पाकिस्तान की गोलाबारी की जद में आते हैं। भर्ती रैली में हिम्मत व जोश दिखाने वाले ये युवा सांबा जिले के राजपुरा, बडी ब्राहमणा, रामगढ़ व घगवाल क्षेत्र के गांवों के थे।

सीमांत युवाओं के भर्ती मैदान में दम दिखाने का सिलसिला 20 फरवरी को पुंछ के जिले के युवाओं की भर्ती के साथ शुरू हुआ था। अब पांच मार्च तक सीमांत जिलों के युवाओं की ही भर्ती चलेगी। इन जिलाें के लिए भर्ती के चौदह दिनों में करीब 28 हजार युवा भाग्य आजमाएंगे।

सांबा के राजपुरा इलाके के युवा केवल कुमार का कहना है कि उनका गांव सीमा से साढ़े चार किलोमीटर की दूरी पर है। क्षेत्र के युवा सेना, सुरक्षाबलों में भर्ती होने के लिए मौका नही छोड़ते है। इलाके के खासे युवा सेना में भर्ती हैं। उन्हाेंने बताया कि जब पाकिस्तान की ओर से तेज गोलाबारी हाेती तो ऐसे लगता है जैसे लड़ाई शुरू हो गई हो। ऐसे में गांवों के बच्चों तक को मालूम है कि गोलाबारी शुरू होने पर कैसे बचना है।

उनका कहना है कि हमारे लिए गोलाबारी आम बात है, कई बार जान माल कर नुकसान भी हो जाता है, ऐसे में दुश्मन से बदला लेने के लिए सैनिक बनना हमारी पहली प्राथमिकता है। केवल का कहना है कि वह व उनके दोस्त मिलकर हर भर्ती के लिए तैयारी करते हैं।

फौजी बनने के लिए 40 हजार युवा आजमा रहे भाग्य: जारी सेना की भर्ती में चालीस हजार के करीब युवा भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें से आधे से ज्यादा सीमांत जिलाें के हैं। जम्मू संभाग के दस जिलों में से कठुआ, सांबा, जम्मू, राजौरी व पुंछ जिले पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा व नियंत्रण रेखा से सटे हुए हैं। जम्मू संभाग में 192 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे कठुआ, सांबा, जम्मू जिले की खासी आबादी आईबी से सटे गांवों में रहती है। सरकार ने हाल ही आईबी से सटे 506 गांवों के लोगों को सरकारी नौकरियों, व्यवसासिक कालेजों में 3 प्रतिशत आरक्षण देकर उनका हौंसला बढ़ाया है।

सेना के पीआरओ डिफेंस लेफ्टिनेंट कर्नल देवेन्द्र आनंद भी मानते हैं कि सीमांत क्षेत्रों के युवा सेना में भर्ती होकर अच्छे सिपाही बनते हैं। उनका कहना है कि ये युवा सीमा के चुनाैतीपूर्ण हालात में पल बढ़कर मजबूत बनते हैं। वे कुदरती तौर पर चुनाैतियों का सामना करने के लिए तैयार होते हैं। उन्होंने माना कि गांवों के युवा भर्ती मैदान में भी सबसे आगे होते हैं।

 

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