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बागों में बहार पर निहारने वालों का इंतजार; अनलॉक के साथ बाग खुले तो जरूर, लोगों की आमद नाममात्र

जम्मू, अंचल सिंह। अनलॉक के साथ जिंदगी पटरी पर लौटने तो लगी लेकिन बागों में लोगों की बहार अभी बाकी है। बारिश की बूंदों के साथ निखरती इन बागों की खूबसूरती निहारने वालों के इंतजार में है। कोरोना के ग्रहण का प्रकोप मंदिरों के शहर के ये बाग भी झेल रहे हैं। प्रसिद्ध बाग-ए-बाहू हो या फिर हरि सिंह पार्क। दोनों ही सैलानियों की राह ताक रहे हैं। उधर महाराजा हरि सिंह व राजेंद्र सिंह पार्क भी बच्चों की अठखेलियों की आस में अपना सा मुंह बनाए हुए है। सरकार द्वारा बागों को लोगों के लिए खोल देने के बावजूद इनमें रौनक नहीं लौटी। मार्च 18 को कोरोना महामारी के मद्देनजर बाग-ए-बाहू, भाैर कैंप समेत अन्य बार्गो को लोगों के लिए बंद कर दिया गया था।

गांधीनगर की रहने वाली रोहिणी गुप्ता का कहना है कि वे सपरिवार हर रविवार को बाग-ए-बाहू में जाया करती थी। लॉकडाउन शुरू होने से लेकर अब तक वे यहां नहीं जा पाए। अब पार्क को तो खोल दिया गया लेकिन हालात ऐसे नहीं हैं कि वहां निश्चिंत होकर जाया जा सके।

वहीं पार्क में फोटोग्राफर कर गुजर-बसर करने वाले बब्बी का कहना है कि कोरोना की मार बाग-ए-बाहू पर भी पड़ी है। आज बाग में बहार तो है लेकिन उसका मजा लेने वाले नहीं। लोग यहां आने से परहेज कर रहे हैं। प्रसिद्ध बावे माता मंदिर भी बंद है। बाहर से लोग भी जम्मू नहीं आ रहे। ऐसे में स्थानीय लोगों की आमद भी बाग में मामूली रह गई है। वहीं विभाग का कहना है कि अनलॉक-2 के साथ पार्क खोल दिए गए हैं। धीरे-धीरे लाेग आ रहे हैं। यहां आने वालों की थर्मल जांच भी की जा रही है।

 

बाग-ए-बाहू: सूर्यपुत्री तवी किनारे बने बाग-ए-बाहू पार्क की संरचना और प्राकृतिक सुंदरता अनोखी है। इसे देखकर मन मोर की भांति दृत्य करने लगता है। इसमें लगे तरह-तरह के फव्वारे, सीढ़ीनुमा संरचना इसकी खूबसूरती को चार-चांद लगाती है। प्राकृतिक सुंदरता से ओत-प्रोत यहां का माहौल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में सैलानी भी इस पार्क में घूमने आते हैं। इसका जादुई वातावरण हजारों लोगों को आकर्षित करता है। इसलिए यह एक पिकनिक स्पाट भी बन गया है। जम्मू में घूमने आने वाला कोई भी व्यक्ति बाग-ए-बाहू को देखे बिना लौटना पसंद नहीं करता।

भोर कैंप बाग जम्मू खुला: वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की सोच थी कि कश्मीर की भांति जम्मू में भी ऐसा फ्लावर गार्डन बने जो कि पर्यटकों को अपनी ओर खींचे। इसके लिए एयरपोर्ट के समीप भोर कैंप में भूमि का चयन हुआ ताकि जब फूल खिल जाएं तो हवाई जहाज से जम्मू आने वाले पर्यटकों को लैंडिंग करते समय ही गार्डन की रंगत का नजारा दिख जाए। कश्मीर के ट्यूलिप गार्डन की तर्ज पर इसे विकसित किया गया। वर्ष 2014 की बाढ़ में यह बर्बाद हो गया था। उसके बाद फिर सरकार ने इसे विकसित किया। क्राइसेंथमम, रेड फ्लाक्स, नाइट्रेशन, कैंडी टाप, रेडस्वीट विलियम, व्हाइट पेपर फ्लावर, येलो पेपर फ्लावर आदि किस्म के फूलों से लुभाने वाला यह पार्क हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह पार्क जम्मू एयरपोर्ट के नजदीक है।

महाराजा हरि सिंह पार्क जम्मू: मार्च 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सूर्यपुत्री तवी नदी किनारे महाराजा हरि सिंह पार्क का उदघाटन किया था। 43 कनाल जमीन पर बने इस पार्क को बनाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए। तरह-तरह के फूलों, बच्चों के खेलने के झूलों, महाराजा की प्रतिमा वाला यह पार्क शहर के बीचों-बीच स्थित है। ज्यूल चौक, गुज्जर नगर के बीच तवी किनारे बना यह पार्क भी लोगों को खूब आकर्षित करता है। पार्क में लाइब्रेरी के अलावा रेस्टोरेंट भी बनाया गया है।

 

राजेंद्र पार्क जम्मू: रणवीर केनाल के दोनों किनारों के मध्य बनाया गया राजेंद्र पार्क गर्मियों में लोगों के लिए समय बिताने का बेहतरीन स्थान है। रणवीर नहर के ठंडे पानी के कारण आसपास ठंडी हवाएं गर्मी में काफी राहत दिलाती हैं। इतना ही नहीं इसके साथ बच्चों के लिए बनाया गया झूला पार्क भी आकर्षक है। लोग बच्चों को लेकर पार्क में घूमने आते हैं। पार्क की देखरेख जेके बैंक करता है। 

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