कैसे बनेगा जम्मू स्मार्ट : स्वच्छता रैंकिंग में सुधार लेकिन अभी करने हैं और प्रयास

जम्मू शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में लगे निगम ने बाहर तो चकाचौंध बनाना शुरू कर दी है लेकिन अंदर की हालत बेहद खराब हैं। शहर के भीतर गलियां टूटी पड़ी हैं जबकि जगह जगह लगे गंदगी के ढेर लोगों का स्वागत करते हैं।

Lokesh Chandra MishraSun, 21 Nov 2021 09:04 PM (IST)
जम्मू नगर निगम के अधीन 189.43 किलोमीटर क्षेत्र है जिसमें 75 वार्ड आते हैं।

जम्मू, सुरेंद्र सिंह : स्मार्ट सिटी बनने जा रहे जम्मू शहर पर स्वच्छता ग्रहण लगा रही है।पूरे जम्मू शहर से नगर निगम डोर टू डोर कचरा उठा रहा है लेकिन बावजूद इसके वह स्वच्छता के मामलों में देश के बहुत से शहरों से पीछे हैं।स्वच्छता सर्वेक्षण के 2021 के घोषित हुए नतीजों में जम्मू शहर ने हालांकि 55 अंकों की लंबी छलांग लगाकर 169वीं रैंकिग हासिल की है लेकिन अभी भी वह देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से बहुत पीछे हैं। जम्मू शहर को इंदौर बनता देखने का इंतजार लोग कर रहे हैं लेकिन अभी यह इंतजार खत्म होता नहीं दिखता।पिछले वर्ष 2020 में जम्मू शहर स्वच्छता रैंकिग में 224 नंबर पर था।

जम्मू नगर निगम के अधीन 189.43 किलोमीटर क्षेत्र है जिसमें 75 वार्ड आते हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की इस रिपोर्ट में जम्मू 5000 अंकों में से 1635 अंक लेकर 329वां रैंक ले पाया। वहीं, वर्ष 2017 के सर्वेक्षण में जम्मू 251वें स्थान पर रहा था। वर्ष 2018 में 39 रैंक की बढ़त के साथ जम्मू 212वें स्थान पर पहुंचा।

टूटी गलियां, कचरे के ढेर करते हैं स्वागत : जम्मू शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में लगे निगम ने बाहर तो चकाचौंध बनाना शुरू कर दी है लेकिन अंदर की हालत बेहद खराब हैं। शहर के भीतर गलियां टूटी पड़ी हैं जबकि जगह जगह लगे गंदगी के ढेर लोगों का स्वागत करते हैं। कई गलियों में नालियां टूटी हुई हैं और वहां मेनहोल भी खुले हैं।वहीं शहर की सुदंरता को बढ़ाने के लिए बनाए गए पार्क भी बदहाल हो चुके हैं। कई जगहों पर पार्कों को देखकर लगता है कि वह कोई जंगली इलाका है।

जम्मू पश्चिम विधानसभा के मुकुट पर बना पार्क भी जंगल में बदल चुका है जबकि यहां से रोजाना हजारों की संख्या में कटड़ा व कश्मीर जाने वाले पर्यटक गुजरते हैं। वहीं शहर में टूटी सड़कें व सड़कों किनारे गंदगी के लगे ढेर में स्वच्छता पर ग्रहण लगा रहा हैं।

बदहाल है सुलभ शौचालय : जम्मू शहर में नगर निगम की ओर से बनाए गए सुलभ शौचालय भी बदहाल हैं। इन शौचालयों की साफ सफाई का आलम यह है कि वहां अंदर भी नहीं जाया जा सकता।शौचालयों में सफाई व्यवस्था के लिए कर्मी तैनात नहीं हैं। कई जगहों पर शौचालयों में दरवाजे भी नहीं हैं जबकि वहां शौच करना खुले में शौच करने के बराबर है।

खतरनाक कचरे के निस्तारण के नहीं हैं पुख्ता प्रबंध : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा निर्देश के बाद भी जम्मू शहर में घरों व अन्य जगहों से निकलने वाले कचरे यानि हेजर्ड्स वेस्ट निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमों के तहत इस कचरे को गंदगी के साथ दबाया अथवा नष्ट नहीं किया जा सकता। इससे कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकता है। निगम ने ऐसे कचरे को अलग से जमा करने की व्यवस्था बनाने के प्रयास तो किए हैं लेकिन जागरूकता की कमी और कर्मियों के जिम्मेदारी न निभाने के चलते व्यवस्था सिरे नहीं चढ़ पा रही है।

यह होता है खतरनाक कचरा :  खाली हुए पेंट के ड्रम, दवाइयों के कैन, सीएफएल बल्ब, ट्यूब लाइटें, समय सीमा समाप्त हो चुकी दवाइयां, टूटे मर्करी थर्मामीटर, इस्तेमाल हो चुकी बैटरियां, इस्तेमाल हो चुकी सूइयां

यहां बनने थे केंद्र : 

1 डोगरा हाल में कैटल पांड के नजदीक - वार्ड 8

2 परेड वार्ड आफिस -वार्ड 10

3 म्यूनिसिपल शॉप कृष्णा नगर - वार्ड 12

4 रेशम घर में सरकारी स्कूल के नजदीक - वार्ड 13

5 वेयर हाउस - वार्ड 19

6 एडी ब्लाक, ग्रीन बेल्ट पार्क के नजदीक - वार्ड 20

7 रिहाड़ी कालोनी, पुलिस पोस्ट के नजदीक - वार्ड 24

8 वजीर लेन, तालाब तिल्लो - वार्ड 41

9 छन्नी हिम्मत, सेक्टर 3 - वार्ड 50

10 पलौड़ा, बीएसएफ गेट के नजदीक - वार्ड 59

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शहर में दस स्थानों पर हेजर्ड्स वेस्ट के संग्रहण के प्रबंध किए जा रहे हैं। इस कचरे को अलग से जमा कर निस्तारण किया जाएगा ताकि इससे किसी प्रकार का भी खतरा न रहे। हर वार्ड में घरों व प्रतिष्ठानों से यह कचरा उठाने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को भी इस संबध में जागरूक बनाया जाएगा ताकि वे स्वयं ही ऐसे कचरे को अलग रखें और संबंधित कर्मचारियों को सौंप दें।

-अवनी लवासा, म्यूनिसिपल कमिश्नर, जम्मू

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ठेलों से उठाया जाएगा कचरा, हर वार्ड को मिलेंगे चार ठेले : नगर निगम की पब्लिक हेल्थ एंड सेनिटेशन कमेटी के चेयरमैन नरेंद्र सिंह बंटी का कहना है कि शहर की हर गली से कचरा उठाना निगम की जिम्मेदारी है। हर जगह से कचरा उठे, इसके लिए निगम ठेलों की मदद ले रहा है। इसलिए हमने ठेले खरीदने के लिए टेंडर भरा था।पहले चरण में 300 ठेले लिए जाएंगे। हरेक वार्ड में जरूरत के हिसाब से ठेले दिए जाएंगे ताकि 100 प्रतिशत कचरा उठ सके। लोगों को भी जागरुक किया जा रहा है ताकि घरों से निकलने वाले गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग कर कर्मियों को सौंपा जा सके। इससे काफी सुविधा होगी। कुछ इलाकों में ठेले जाना भी शुरू हो गए हैं।

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शहर से निकलने वाला कचरा :

कुल कचरा जमा होता है - 400 मीट्रिक टन प्रति दिन

गलियों की सफाई से - 50 मीट्रिक टन प्रति दिन

होटल/रेस्टोरेंट से - 40 मीट्रिक टन प्रतिदिन

बाजारों से - 50 मीट्रिक टन प्रतिदिन

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से - 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन

घरों से - 130 मीट्रिक टन प्रतिदिन

अन्य से - 110 मीट्रिक टन प्रतिदिन

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