Jammu Kashmir : जम्मू-कश्मीर में 300 औषधीय जड़ी बूटियों का होगा शोध, बारामुला में शोध केंद्र होगा स्थापित

Research Laboratory in JK शोध केंद्र में सभी औषधीय पौधों पर शोध होगा और उनके विभिन्न बीमारियों के इलाज में लाभ देखे जाएंगे। एक बार शोध होने के बाद इन औषधीय पौधाें का विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जाएगा।

Rahul SharmaSat, 18 Sep 2021 09:16 AM (IST)
हाई आल्टीटयूड मेडिसिनल प्लांट संस्थान भी भद्रवाह में बन रहा है।

जम्मू, राज्य ब्यूरो: जम्मू-कश्मीर में इस समय तीन सौ से अधिक औषधीय जड़ी बूटियां हैं और अब इन पर आयूष मंत्रालय जल्द ही शोध करने जा रहा है। इसके लिए एक दिन पहले ही आयूष मंत्री सर्वांनंद सोनोवाल ने बारामुला में शोध केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इनकी शोध की जरूरत है।

सरकार पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में आयुष को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। अब शोध केंद्र स्थापित होना भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इस शोध केंद्र में सभी औषधीय पौधों पर शोध होगा और उनके विभिन्न बीमारियों के इलाज में लाभ देखे जाएंगे। एक बार शोध होने के बाद इन औषधीय पौधाें का विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जाएगा।

वहीं जम्मू-कश्मीर में आयुष को बढ़ावा देने के लिए यहां पर आयुर्वेद कालेज के अलावा युनानी कालेज भी स्थापित किया गया है। इसके अलावा कुपवाड़ा, कुलगाम, किश्तवाड़, कठुआ और सांबा में भी पचास-पचास बिस्तरों की क्षमता वाले आयुष अस्पताल मंजूर किए गए हैं। 35 आयुष डिस्पेंसरियों को अपग्रेड करने को ळाह मंजूरी दी गई है। इनमें भी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। 571 हेल्थ और वेलनेस सेंटरों को भी मंजूरी दी गई है। इनमें से बहुत से खुल भी गए हैं। इसके अलावा हाई आल्टीटयूड मेडिसिनल प्लांट संस्थान भी भद्रवाह में बन रहा है।

आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल का कहना है कि सरकार युनानी, आयुर्वेद, और अायुष की अन्य पद्वतियों की देशभर में पहचान कर रही है ताकि इसका लोगों को लाभ मिल सके।

साल 1962 में खुला था पहला युनानी कालेज : उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहला युनानी कालेज 1962 में शुरू हुआ था लेकिन इसे 1967 में बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह पहला सरकारी युनानी मेडिकल कालेज हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक पद्वतियों को किस प्रकार से कोरोना महामारी सहित अन्य सुविधाओं को लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य सुविधाओं में देश में अग्रणी राज्यों में है। नवजात मृत्युदर साल 2015-16 में 23.1 थी लेकिन 2019-20 में घटकर 9.8 हो गई।

शिशु मृत्यु दर 32.4 से घटकर 16.3 रह गई। वही पांच साल से कम आयु वर्ग में मृत्यु दर 37.6 से कम होकर 18.5 रह गई। उन्होंने कहा कि 2016-17 में पहली बार जम्मू-कश्मीर में दो नए एम्स और सात मेडिकल कालेज मिले। साल 2015 से 2019 के बीच दो स्टेट केंसर इंस्टीयूट दिए गए।उपराज्यपाल ने कहा कि साल 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर में 129 हेल्थ और वेलनेस सेंटर थे लेकिन अब 1275 नए सेंटर बनाए गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य इंश्योरेंस योजना का भी उल्लेख किया। इस मौके पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुचय सचिव विवेक भरद्वाज, आयुष निदेशक डा. मोहन सिंह, प्रिंसिपल डा. सामिया राशीद, आयुष के विशेष सचिव प्रमोद कुमार पाठक, डिप्टी कमिश्नर कृतिका ज्योत्सना भी मौजूद थीं।

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