Jammu Kashmir: न पाक का गुणगान और न ही अलगाववादियों की वकालत, कश्मीरी नेताओं की बोली शांति और विकास के लिए गूंजी

पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन जम्मू-कश्मीर के लोगों की पीड़ा बयान करने के एजेंडे के साथ बैठक में पहुंचे थे। कश्मीर को जानने वाले दावा कर रहे थे कि मोदी ने एजेंडा सिर्फ बैठक को सफल बनाने के लिए घोषित नहीं किया हैउनका कश्मीर मिशन सभी को पता है।

Rahul SharmaFri, 25 Jun 2021 10:54 AM (IST)
बंदूक छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुए युवकों के पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए।

नवीन नवाज, श्रीनगर: प्रधानमंत्री के साथ सर्वदलीय बैठक अपना लक्ष्य साधने में सफल मानी जा रही है। अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन से नाराज कश्मीरी नेताओं की बोली बैठक में कश्मीर की शांति और विकास के लिए ही गूंजी। गुपकार एलायंस के घटक नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिकि पार्टी और माकपा कहीं भी एजेंडे से भटकते नजर नहीं आए। किसी ने पाकिस्तान या अलगाववादियों की वकालत नहीं की। कोई नहीं बोला कि कश्मीर में पाक की भी भूमिका है।

हां, इस दौरान महबूबा मुफ्ती ने जरूर पाकिस्तान का नाम लिया, लेकिन वह भी एलओसी के दोनों तरफ बंटे परिवारों के दर्द की आड़ में। तीन घंटे तक जारी रही बैठक में शामिल रहे सभी हालात सामान्य बनाने और अस्थिरता, असमंजस व भय के माहौल को दूर करने, परिसीमन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मिलकर आगे बढ़ने को राजी होकर बैठक से बाहर निकले हैं।

दिल्ली में हुई बैठक जम्मू कश्मीर के लिए बहुत ही अहम थी, क्योंकि इसने पांच अगस्त 2019 को संसद में पारित जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की राह में बनी रुकावट दूर की है। बैठक में बुलाए गए गैर भाजपा नेता पांच अगस्त 2019 के बाद कई दिनों तक एहतियातन हिरासत में रहे हैं। डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और सज्जाद गनी लोन पर जन सुरक्षा अधिनियम भी लगाया था।

यह सभी अनुच्छेद 370 को हटाने खिलाफ मुखर हैं और उसकी पुनर्बहाली की मांग कर रह हैं। प्रधानमंत्री के साथ इन लोगों की पांच अगस्त के बाद पहली बैठक थी। बैठक से पूर्व कई लोग हंगामे के साथ विफलता का कयास लगा रहे थे, क्योंकि पीपुल्स एलायंस फार गुपकार डिक्लेरेशन जिसे पीएजीडी और गुपकार एलांयस कहते हैं, के घटकोंं में शामिल नेकां, पीडीपी व माकपा अनुच्छेद 370 की बहाली को अपना कोर एजेंडा बता चुके थे। कांग्रेस पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग कर रही है। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन जम्मू कश्मीर के लोगों की पीड़ा बयान करने के एजेंडे के साथ बैठक में पहुंचे थे। कश्मीर को जानने वाले दावा कर रहे थे कि मोदी ने एजेंडा सिर्फ बैठक को सफल बनाने के लिए घोषित नहीं किया है,उनका कश्मीर मिशन सभी को पता है।

हरेक ने अपने दिल की बात कही : तारीगामी

माकपा नेता और पीएजीडी के संयोजक मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक में जो भी बोला खुलकर बोला। हरेक ने अपने दिल की बात कही। मोदी भी खुलकर बोले। मैं जम्मू कश्मीर की दिल्ली से दूरी और दिल से दूरी को कम करना चाहता हूं। हमने शिकायत करते हुए कहा कि आपने यह जो बैठक बुलाई, काश चार अगस्त 2019 को बुलाई होती तो हम सभी पुनर्गठन के मुद्दे पर अपनी राय देते। हम अपने प्रधानमंत्री से मिलने गए थे, हम अपने संविधान की बात कर रहे थे, हम वहां पाक की वकालत करने नहीं गए थे।

बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है : कविंद्र

पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कविंद्र गुप्ता ने कहा कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है। जब उनसे यह पूछा कि क्या पाकिस्तान का जिक्र हुआ, अलगाववादियों का किसी ने नाम लिया तो उन्होंने कहा कि पाक से बातचीत की कोई बात नहीं हुई है। अलबत्ता, महबूबा कश्मीर मुद्दे पर बातचीत करते हुए भावुक हो गई थी। पाक से कश्मीरियों के भावनात्मक संबंध हैं, कश्मीर में कई पाकिस्तानी लड़कियां बहुएं बनकर आई हैं, उनकी नागरिकता का मुद्दा है। बंदूक छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुए युवकों के पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए। अनुच्छेेद 370 बहाली पर बात की है।

कश्मीर भारत का आंतरिक मसला : कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ आसिफ कुरैशी ने कहा कि इस बैठक ने साबित कर दिया है कि जो दल पुनर्गठन अधिनियम के खिलाफ हैं, वह अपनी लड़ाई अदालत में ही लड़ेंगे ,मतलब यह कि वह सड़क पर नहीं उतरेंगे। पाकिस्तान के साथ वार्ता पर जोर न देना बताता है कि वह मान चुके हैं कि अब पाक की कोई भूमिका नहीं रही है,जो लेना-देना है वह भारतीय संविधान के दायरे के भीतर रहते हुए केंद्र से लेना-देना है। एक तरह से वह मान चुके हैं कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का आंतरिक मसला है। एक तरह से बैठक ने पुनर्गठन अधिनियम मिशन पर सहमति की मुहर लगाई है। यह महज संयोग नहीं है कि यह बैठक एक विधान-एक निशान का नारा देने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के एक दिन बाद हुई है।  

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