Jammu Kashmir: उपराज्ययपाल प्रशासन ने कैसे सरकारी विभागों में फिजूलखर्ची पर लगाई लगाम, इन उपायों को अपनाया

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लु की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि खर्च की संतुलित गति होनी चाहिए। पर्यटन कला संस्कृत या निवेश को बढ़ावा देने के मामलों के अलावा प्रदर्शनी मेले कार्यशालाएं जम्मू कश्मीर के बाहर करवाने से बचा जाए।

Vikas AbrolTue, 07 Dec 2021 11:23 AM (IST)
देश के भीतर ही अधिकारी इकोनमी क्लास के जरिए ही यात्रा कर सकते हैं।

जम्मू, राज्य ब्यूरो : सरकारी विभागों में फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए उपराज्यपाल प्रशासन ने सोमवार को बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों और स्वायत्त इकाइयों के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी कांफ्रेंस, सेमिनार, कार्यशाला करने में कम से कम खर्च किया जाए। वही सेमिनार करवाएं जाएं, जो बहुत जरूरी हों। निजी होटलों में बैठकें, कांफ्रेंस करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। सरकारी इमारतों, परिसरों को कांफ्रेंस और बैठकों के लिए इस्तेमाल किया जाए। वित्त विभाग के निदेशक और सलाहकार को अपने-अपने विभागों की निगरानी करने की सलाह भी दी गई है। साथ ही इसकी पूरी रिपोर्ट वित्त विभाग को देने को कहा गया है।

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लु की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि खर्च की संतुलित गति होनी चाहिए। पर्यटन, कला संस्कृत या निवेश को बढ़ावा देने के मामलों के अलावा प्रदर्शनी, मेले, कार्यशालाएं जम्मू कश्मीर के बाहर करवाने से बचा जाए। वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा बेहतर है और इसका उपयोग करना चाहिए। बैठकों के लिए यात्रा करने से बचना चाहिए। सभी मामलों में एयर ट्रैवल कम खर्च वाली टिकट लेनी चाहिए। वित्त विभाग की विशेष मंजूरी के बिना विदेशी यात्रा की अनुमति नहीं होगी। देश के भीतर ही अधिकारी इकोनमी क्लास के जरिए ही यात्रा कर सकते हैं।

जरूरत के अनुसार ही नए वाहन खरीदे जा सकते हैं और पुराने वाहनों को बदल कर ऐसा किया जा सकता है। उपलब्ध धनराशि से कोई भी फर्नीचर खरीदने की अनुमति नहीं है, सिवाय नए स्थापित कार्यालयों में और उसके लिए भी वित्त विभाग से मंजूरी लेनी होगी। पुराने फर्नीचर की नीलामी की जाए।

यही नहीं, आधिकारिक रात्रि भोज और लंच की मेजबानी पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। केवल मुख्य सचिव और उपराज्यपाल की तरफ से मेजबानी करने या उपराज्यपाल की विशेष मंजूरी मिलने पर ही इसका आयोजन हो सकता है।

नियमों के अनुसार हो एडवांस भुगतान :

आदेश में कहा गया है कि वित्त वर्ष के अंतिम तिमाही में खर्च कुल बजट अनुमान का 30 फीसद तक होना चाहिए और मार्च के महीने में खर्च बजट अनुमान का 15 फीसद तक होना चाहिए। वित्त वर्ष के आखिरी महीने में सामान और सर्विस का भुगतान किया जाना चाहिए और कोई भी राशि एडवांस में जारी नहीं करनी चाहिए। कांट्रेक्टर को एडवांस भुगतान नियमों के अनुसार होना चाहिए, ताकि सरकार को कानूनी या कांट्रेक्ट की देनदारियों से निपटना ना पड़े।

आखिरी महीने में खरीद के खर्च से दूर रहें :

सरकारी अधिकारियों को कोई भी ऋण, एडवांस राहत, पुनर्वास के लिए मानवीय आधार पर दिया जा सकता है। कोई विशेष मामला वित्त विभाग की मंजूरी से हो सकता है। सभी को आखिरी महीने में खरीद के खर्च से दूर रहना चाहिए और कोई भी बिना फिजूलखर्च नहीं करना चाहिए।

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