जम्मू-कश्मीर में कैसे होगा शिक्षा का विस्तार जब 16 हजार स्कूलों में न बिजली न पानी

जम्मू, सतनाम सिंह। जम्मू कश्मीर में बिना बिजली, पानी, शौचालय जैसे बुनियादी ढांचे से जूझ रहे सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए राज्यपाल प्रशासन ने कमर कसी है। पूर्व सरकारों के समय में शिक्षा में बदलाव के वायदे कितने पूरे हुए उसका पता इस बात से चलता है कि 16597 स्कूलों में तो बिजली ही उपलब्ध नहीं है। पांच हजार से अधिक स्कूलों में पीने का पानी नहीं है और तीन हजार से अधिक स्कूलों में शौचालय ही नहीं है।

सभी स्कूलों में सौ प्रतिशत बिजली, पानी और शौचालय उपलब्ध करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला विकास आयुक्तों की अध्यक्षता में जिला स्तर की कमेटियों का गठन किया गया है। शिक्षा विभाग के सचिव की तरफ से जारी आदेश के अनुसार जिला विकास आयुक्तों से विभिन्न संसाधनों से धनराशि जुटाने के लिए कहा गया है। पीने के पानी के लिए धनराशि का प्रबंध जिला विकास आयुक्त कर सकते है। जैसे की उदाहरण के तौर पर जिन स्कूलों में भारतीय चुनाव आयोग ने पोलिंग बूथ बनाए है वहां पर भारतीय चुनाव आयोग की धनराशि का उपयोग किया जा सकता है। जिन स्कूलों में पानी उपलब्ध नहीं है, वे डीपीआर बनाकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेज सकते है। संबधित डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन पीएचई विभाग को धनराशि उपलब्ध करवा सकती है ताकि पानी का कनेक्शन हासिल किया जा सके।

केंद्र प्रायोजित योजनाओं का उठाएं लाभ

स्कूलों को बिजली का बाहरी कनेक्शन जिसमें मीटर शामिल हैं, सौभाग्य योजना के तहत प्राप्त किया जा सकता है। सर्विस लाइन पीडीडी उपलब्ध करवाएगा जिस पर अाने वाला खर्च स्कूल शिक्षा विभाग देगा। विभाग ने स्कूलों की श्रेणी के तहत धनराशि व अधिकारियों को चयनित कर दिया है। विभाग ने जिला विकास आयुक्तों से कहा कि वे हर स्कूल में पानी, बिजली और शौचालय का निर्माण करने संबंधी लक्ष्य हासिल करने के लिए काम करें। इसके लिए डीसी नियमित तौर पर हर सप्ताह में बैठक करे और इनकी प्रगति की रिपोर्ट स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को दें। विभाग के सचिव अजीत कुमार साहू ने आदेश जारी करके निर्धारित लक्ष्य को शीघ्र पूरा करने के लिए कहा है।

यूडीआईएसई (यूनीफाइड डिस्ट्रिक इंफारमेशन सिस्टम फार एजूकेशन) से प्राप्त साल 2017-18 के आंकड़ें

इन स्कूलों में बिजली नहीं

इन स्कूलों में पीने का पानी नहीं

इन स्कूलों में शौचालय नहीं है

लड़कियों के लिए शौचालय नहीं

लड़कों के लिए शौचालय नहीं

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