Hail Storm in Jammu : जम्मू में भारी ओलावृष्टि से धान की फसल को नुकसान, दालें भी हुई खराब

शनिवार सुबह पूरे जम्मू में मूसलाधार बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। इस समय जम्मू के मैदानी इलाकों में धान और सब्जियां लगी हुई है आदि शामिल हैं खेतों में लगी हुई हैं

Rahul SharmaSat, 23 Oct 2021 11:54 AM (IST)
ओलावृष्टि का लोग आनंद ले रहे थे तो वहींखेतों में खड़ी फसल को देख किसान चिंतित हो रहे थे।

जम्मू, जागरण संवाददाता : शनिवार सुबह पूरे जम्मू में मूसलाधार बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। पूरे जम्मू संभाग में ही शनिवार तड़के से भारी बारिश हो रही है जबकि सुबह आठ नौ के करीब कुछ इलाकों में ओलावृष्टि शुरू हो गई। इस ओलावृष्टि का यहां लोग आनंद ले रहे थे तो वहीं वे खेतों में खड़ी फसल को देख किसान चिंतित हो रहे थे। देखते ही देखते ओलावृष्टि इतनी तेज हो गई कि खेतों में खड़ी फसल उसका सामना नहीं कर पाई। जम्मू, आरएसपुरा, सांबा, अरनिया, बिश्नाह व दूसरे क्षेत्रों में इतने मोटे ओले बरसे कि गांव गलियों, खेत खलिहानों में बर्फ की चादर बिछ गई। इस ओलावृष्टि ने पक रही बासमती फसल को छिन्न भिन्न कर दिया।

वहीं तैयार हो चुकी सामान्य धान की भी बर्बादी की दी है। बारिशव ओलावृष्टि से फसल को बड़ा नुकसान हो गया है। ओले गिरने से बासमती व सामान्य धान के दाने झड़ गए और फसल खेतों में बिछ गई। बचे खुचे दाने के अब काला फिरने का डर बन गया है। किसानों का कहना है कि 2014 के बाद यह फसल की बड़ी बर्बादी है। जिन किसानों ने धान की फसल कीट ली थी, मगर फसल खेतों में थी, वो भी बर्बाद हो गई है। वहीं सीजन में लग रही साग सब्जियों की फसल भी इस बारिश व ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई है।

बारिश से खेत खलिहानों में पानी भर गया। जबकि ओलावृष्टि कहर बनकर किसानों पर आई। नंदपुर के किसान विजय सैनी, बिश्नाह के किसान रघुनंदन खजूरिया व अरनिया के किसान महेश सिंह का कहना है कि ओलावृष्टि की ऐसी बौशार कई बरसों के बाद दिखी है।

गनीमत है कि कंडी क्षेत्र में किसानों ने मक्की की फसल तकरीबन समेट ली है और दाने घर के अंदर कर लिए हैं। इसलिए मक्की की फसल सुरक्षित रही। लेकिन यहां पर आमला की फसल को ओलावृष्टि से भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों को डर है कि अबकी आमला दागी हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर एग्री इंटरप्रेन्योरशिप डेवेलपमेंट एसोसिएशन के प्रधान कुलभूषण खजूरिया ने कहा कि अब मुआवजा ही किसानों को बचा सकता है। जिन किसानों ने फसल का बीमा नही भी कराया था, को किसी न किसी रूप में मुआवजा दिया जाए। वहीं सरोर क्षेत्र के रहने वाले किसान नेता कुलभूषण शर्मा का कहना है कि प्रशासन का काम बनता है कि जल्दी से जल्दी टीमें सर्वेक्षण के लिए भेजी जाएं।

आरएसपुरा निवासी किसान दिनेश चौधरी ने बताया कि इस बार उनकी फसल अच्छी हुई थी। वे खुश थे। अगर सिर्फ बारिश ही होती तो उसका लाभ फसल को दिया। उधर अखनूर के सीमावर्ती परगवाल इलाके में भी धान की फसल अच्छी हुई थी लेकिन वहां भी ओलावृष्टि ने किसानों की चिंताए बढ़ा दी।

परगवाल के राजपुरा इलाके में रहने वालेल पाकिस्तान की सीमा के साथ लगते हैं। अपनी जान का दाव लगाकर वे लोग वहां खेती करने जाते हैं क्योंकि कई बार पाकिस्तानी रेंजर्स उन पर गोलियां तक चला देते हैं। वे पाकिस्तानर उन पर पड़ गई है। अब वे प्रार्थना कर रहे हैं कि बारिश या ओलावृष्टि से उनकी फसल को ज्यादा नुकसान न हो। ताकि तो कुछ बचा है, उसे समेट सकें।

वहीं अखनूर के अंबारा में रहने वाले देव राज का कहना है कि उन्होंने माश की खेती की थी। इस समय दाने पूरी तरह से तैयार थे लेकिन ऐन वक्त पर ओलावृष्टि ने उसे खराब कर दिया। फसल पकने को तैयार थी। कुछ दिन बाद उसे झाड़कर दाल निकालनी थी लेकिन अब सब बर्बाद हो गया है।

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