MakeSmallStrong: मेहनत और निष्ठा से चढ़ी सफलता की सीढियां, 30 साल की उम्र में बनकर उभरे सफल बिजनेसमैन

हर्षवर्धन का कहना है कि कोरोना काल सभी के लिए शिक्षाप्रद साबित हुआ है।
Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 11:02 AM (IST) Author: Rahul Sharma

जम्मू, अंचल सिंह: जीवन की राह में संषर्घ से घबराए बिना हर चुनौती को पार करते हुए उसने बुलंदियों को छू लिया। मेहनत और लग्न ने उसे नाम और शोहरत बख्शी। मां-बाप ही नहीं हर कोई उस पर नाज करने लगा। उन्होंने सीमेंट के बिजनेस में नाम रोशन किया।

हम बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर में अल्ट्राटेक सीमेंट के सीएंडएफ हर्षवर्धन चंन की। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अल्ट्राटेक सीमेंट की आपूर्ति करवाने वाले हर्षवर्धन सौ के करीब डीलरों के माध्यम से अपने बिजनेस को चला रहे हैं। वर्ष 2011 में हिमाचल प्रदेश के सोलन में जेपी यूनिवर्सिटी से ग्रेजऐशन करने के बाद बिजनेस में आए। उसके बाद उन्होंने जेपी सीमेंट की ट्रांसपोर्टेशन का काम अपने हाथ में लिया। वर्ष 2014 के करीब जब कंपनी बंद हुई तो उन्होंने अल्ट्राटेक में काम शुरू किया। वर्ष 2015 में उन्होंने अल्ट्राटेक सीमेंट सीएंडएफ ली। उन्होंने हलाइकल एनर्जी नाम से फर्म पंजीकृत करवाई। अब इसी नाम से उनकी फर्म चल रही है।

जम्मू-कश्मीर में प्रति माह करीब 20 हजार मीट्रिक टन इस सीमेंट की खपत होती है। सौ से ज्यादा डीलर जम्मू, श्रीनगर और लेह में काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह होटल लाइन में भी आ चुके हैं। जम्मू रेलवे स्टेशन के नजदीक शिवालिक हिल नाम से उनका एक होटल भी है। जल्द ही कुद में भी एक बेहतरीन होटल बनाने का संकल्प उन्होंने लिया है। इतना नहीं वह बड़ी ब्राह्मणा में अपनी फैक्टरी लगाने के लिए भी सक्रिय हैं। सरकारी औपचारिकताओं को पूरा करने के साथ ही वह अपने बिजनेस को और आगे बढ़ाने जा रहे हैं। हर्षर्वधन की उम्र 30 वर्ष है। पिता के स्वर्गवास के बाद से सभी जिम्मेवारियों का निर्वाह तहदिल से कर रहे हैं।

 

नौकरी को त्याग, बिजनेस को अपनाया: हर्षर्वधन ने आईटी करने के बाद अपना बिजनेस करने का लक्ष्य निर्धारित किया। वह बताते हैं कि उन्हें उस समय महेंद्रा-सत्यम कंपनी में नौकरी मिली लेकिन उनका दिल नहीं माना। मन में था कि अपना काम करना है। किसी के नीचे काम कर पाने का कोई इरादा नहीं था। लिहाजा उन्होंने जेपी सीमेंट की ट्रांसपोर्टेशन का काम शुरू किया। इतना ही नहीं वह कंट्रेक्ट सेल्स भी देखते थे। हर्ष बताते हैं कि न तो सरकारी नौकरी का मन था और न ही किसी के अधीन रहकर जीवनयापन की सोच। लिहाजा अपना काम करने की निष्ठा कर ली। फिर मेहनत और लग्न के साथ सीढ़ियां चढ़ते चले गए।

कोरोना काल दी शिक्षा: हर्षवर्धन का कहना है कि कोरोना काल सभी के लिए शिक्षाप्रद साबित हुआ है। लॉकडाउन रहने तक कामकाज प्रभावित रहा। मुश्किल की यह घड़ियां हर किसी के लिए मुसीबत भरी थीं। उन्होंने अपने कर्मचारियों की इस दौरान की मुश्किलों को भी समझा। वह कहते हैं कि किसी भी कर्मचारी का न तो पैसा काटा गया और नही किसी तनख्वाह रोकी गई। जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों की मदद भी की। कोरोना महामारी ने हम लोगों को सिखाया कि किस तरह विकट परिस्थितियों में भी हमें हौसला न हारते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए।

मां बनी प्ररेणा स्रोत: उनकी मां नम्रता चंन वर्षाें से सीमेंट का बिजनेस देख रही हैं। तब हर्षवधन पढ़ा करते थे। मां से ही उन्हें इस बिजनेस में आने की प्ररेणा मिली। उनके पिता का वर्ष 2015 में स्वर्गवास हो जाने के बाद जिम्मेवारियों बढ़ी। हर्षवर्धन का कहना है कि मां ने कभी उन्हें कमजोर नहीं पड़ने दिया। हर दम प्रेरित व जागरुक करती रहीं। इसी कारण आज वह इस मुकाम पर हैं। उनके पिता रणविजय चंन सरकारी नौकर थे। चुनौतियों से हार नहीं मानने तथा आगे बढ़ने का जज्बा हमेशा उनमें देखने को मिला। इसके अलावा उन्हें छोटे भाई लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर हैं।

ठेकेदारी में भी अजमा रहे भाग्य: हर्षवर्धन सीएंडएफ होने के साथ ठेकेदारी में भी सक्रिय है। उन्होंने बिजली विभाग के ठेके लिए हैं। 11 केवीए की लाइन लगाने का काम वह कर रहे हैं। जोश से तीस वर्षीय हर्षवर्धन का कहना है कि बिजनेस बढ़ाने के लिए जी-जान से मेहनत करनी पड़ती है। इमानदारी और निष्ठा की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। उनका कहना है कि बिजनेस में हेराफेरी नहीं चलती। सभी की दिक्कतों को भी समझना पड़ता है। डीलरों के माध्यम से लोगों की दिक्कतें उनके तक पहुंचती हैं जिन्हें कंपनी की टेक्निकल विंग तक पहुंचा कर उनका समाधान करवाया जाता है। लोगों को विश्वास बिजनेस की नींव होता है।  

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