Happy Nurse Day 2021: दो बार संक्रमित, पर फिर भी कोरोना ड्यूटी से परहेज नहीं, पर लोगों के व्यवहार से नाराज

इस समय अपनी डयूटी इमानदारी से देने से और बेहतर देश सेवा क्या है।

जो लोग एक बार संक्रमित हुए हैं वह डरते हैं। वह दो बार कोरोना को मात देकर फिर से कोरोना वार्ड में ड्यूटी दे रही हें। इस बार एसएमजीएस अस्पताल में दो वार्ड कोविड वार्ड बनाए गए हैं और उनमें 54 मरीज भर्ती हैं।

Rahul SharmaWed, 12 May 2021 01:57 PM (IST)

जम्मू, रोहित जंडियाल: नर्स को सिस्टर ज्यों ही नहीं कहा जाता। उन्हें कभी मां तो कभी बहन की तरह मरीज की सेवा करनी पड़ती है। वह भी अब जब अपने परिजन भी कोरोना होने पर दूर भाग रहे हैं, अस्पतालों में सबसे बड़ी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ पर ही है। उन्हें अपने परिजनों के साथ-साथ मरीजों की भी पूरी देखभाल करनी पड़ रही है। कुछ तो ऐसी नर्स हें जो कि संक्रमित होने के बाद ठीक होकर फिर से उनकी सेवा में जुटी हुई हैं। इन्हीं में एक है श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल में कोविड वार्ड की प्रभारी पवनजीत कौर।

पिछले साल जब जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण के मामले आए थे तो उस समय मेडिकल कालेज के अलावा एसएमजीएस अस्पताल में ही कोरोना के मरीजों को भर्ती किया गया था। बच्च और गर्भवती महिलाएं इसी अस्पताल में भर्ती होती थीं। उसका जिम्मेदारी सिस्टर पवनजीत कौर को सौंपी गई थी। उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। घर से दूर रहकर वह दिन रात अस्पताल में मरीजों की सेवा करती थी। डयूटी का कोई समय नहीं होता था। उन्होंने बताया कि बैसे तो उनकी डयूटी सुबह दस से चार बजे तक थी लेकिन प्रभारी होने के कारण जल्दी आकर देरी से जाना पड़ता था। इसके बाद घर नहीं जा पाती थी। होटल में ही सरकार ने कमरा दिया था।

वहीं से कुछ देर बेटे से व अन्य परिजनों से फोन पर बात हो जाती थी। इस दौरान पवनजीत खुद भी संक्रमित हो गई। लेकिन ठीक होने के बाद वह फिर से डयूटी पर वापस लौंटी। कुछ सप्ताह बाद फिर संक्रमित हो गई। फिर कोरोना को मात दे वापस ड्यूटी पर लौटी। पवनजीत का कहना है कि कोरोना नई बीमारी है। इसका इतना भय था कि हर कोई ड्यूटी से डरता था। लेकिन स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी से इंकार नहीं कर सकते। बावजूद इसके कइयों का व्यवहार स्टाफ के साथ अच्छा नहीं रहा। उन्हें यह समझना चाहिए कि किस मानसिक तनाव में स्टाफ ड्यूटी दे रहा है। सब कुछ आसान नहीं होता। मरीजों का पूरा ख्याल रखा जाता है।

जो लोग एक बार संक्रमित हुए हैं, वह डरते हैं। वह दो बार कोरोना को मात देकर फिर से कोरोना वार्ड में ड्यूटी दे रही हें। इस बार एसएमजीएस अस्पताल में दो वार्ड कोविड वार्ड बनाए गए हैं और उनमें 54 मरीज भर्ती हैं। सभी को समय पर दवाई तक मुहैया करवाने की जिम्मेदारी सिस्टर पवनजीत की है। उनका कहना है कि यह समय ही देश के लिए कुछ करने का है और इस समय अपनी ड्यूटी इमानदारी से देने से और बेहतर देश सेवा क्या है।

कई बार शव को उठाना पड़ता है: सिस्टर पवनजीत का कहना है कि एक दिन पहले ही उनके अस्पताल में एक कोरोना मरीज की मौत हो गई। उसके शव को भी उन्होंने ही अन्य कर्मियों के साथ कपड़ा देकर उसे अच्छी तरह से पैक करवाया ताकि संक्रमण न फैले। इसके बाद शव उठाने में भी मदद की। बहुत कुछ करना पड़ता है। बस हमारी भावनाओं का भी सम्मान होना चाहिए। जब डयूटी के बाद घर में अब जा रहे हें तो यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि कहीं हम संक्रमण लेकर तो नहीं जा रहे। खुद तो संक्रमित होने का डर है ही, परिजनों के संक्रमित होने का भी डर बना रहता है।

कई बार मिल चुका है सम्मान: सिस्टर पवनजीत कौर को बेहतर काम के लिए अस्पताल प्रशासन कई बार सम्मानित कर चुका है। श्री महाजा गुलाब सिंह अस्पताल के स्थापना दिवस पर हर वर्ष उन्हें बेहतर कार्य करने के लिए सम्मान मिला। हर बार सम्मान हासिल करने वाली सिस्टर पवनजीत अकेली नर्स हैं। उन्हें इस बात का दुख जरूर है कि राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए जम्मू के नर्सिंग स्टाफ की अनदेखी की जाती है।

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