Kot Bhalwal Jammu Land Scam: सरकार ने ACB को सौंपी कोट भलवाल में सैकड़ों कनाल भूमि घोटाले की जांच

दैनिक जागरण ने कोट भलवाल इलाके में सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जों पर सिलसिलेवार सीरीज चलाई थी जिसमें जंगलात राजस्व और पुलिस विभाग की मिलीभगत होने के तथ्यों को पेश किया था। इसके बाद उपराज्यपाल प्रशासन ने करोड़ों रुपये के इस घोटाले की जांच एसीबी को सौंप दी है।

Vikas AbrolSat, 27 Nov 2021 10:17 AM (IST)
1500 कनाल भूमि पर कालोनी बनाए जाने के मामले की जांच सरकार ने एसीबी को सौंप दी है।

जम्मू, अवधेश चौहान। जम्मू शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोट भलवाल से गुजरने वाली ङ्क्षरग रोड के आसपास के जंगलों को काटकर भूमि पर कब्जा रहने और राजस्व विभाग की 1500 कनाल भूमि पर कालोनी बनाए जाने के मामले की जांच सरकार ने एंटी क्रप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंप दी है। एसीबी की टीम ने कुछ दिन से कोट भलवाल इलाके का दौरा कर जमीन के दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। एसीबी अधिकारियों ने अब तक मामले की छानबीन में पाया कि गैरमुमकिन जमीन और पहाड़ों की भी फर्द काटकर सैकड़ों कनाल भूमि को भूमाफिया ने खुर्दबुर्द कर दिया है। जंगलात, राजस्व और गैरमुमकिन खड्डों की फर्द कैसे पटवारी ने काट दी, इसकी एससीबी जांच करने में लगी है।

गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने कोट भलवाल इलाके में सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जों पर सिलसिलेवार सीरीज चलाई थी, जिसमें जंगलात, राजस्व और पुलिस विभाग की मिलीभगत होने के तथ्यों को पेश किया था। इसके बाद उपराज्यपाल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए करोड़ों रुपये के इस घोटाले की जांच एसीबी को सौंप दी है। एसीबी अधिकारियों ने खनन विभाग के अलावा राजस्व और जंगलात के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की जांच के लिए संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि कोट भलवाल भूमि घोटाला करोड़ों रुपये का है। इसकी तह तक पहुंचने में वक्त लगेगा। इस घोटाले में राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की संलिप्तता से फिलहाल इंकार नहीं किया गया है। भूमि घोटाले में पुलिस, फारेस्ट, खनन और राजस्व विभाग की भूमिका भी संदिग्ध वर्ष 2020 के मार्च माह में कोरोना महामारी के कारण लगे लाकडाउन की आड़ में जम्मू शहर से सटे कोट भलवाल क्षेत्र में भूमाफिया ने हजारों एकड़ में फैले जंगल को साफ कर वहां कालोनी विकसित करना शुरू कर दिया था। इसके लिए दिन-रात जंगलों की कटाई की गई। इसके लिए भारी भरकम जेसीबी मशीनें लगाकर करीब 1500 कनाल जमीन से जंगल साफ करवाकर पहाड़ी का नामोनिशान मिटा दिया गया। अब तक भूमाफिया कुछ प्लाट बेच भी चुका है। भूमाफिया इतना शातिर है कि पुलिस, राजस्व और फारेस्ट विभाग के अधिकारियों के लिए पहले से ही एक-एक प्लाट सहेज कर रखा है, ताकि उसके काम में कोई रुकावट नहीं आए। जागरण ने इस मामले को लेकन चीफ कंजरवेटर आफ फारेस्ट मोहित गेरा और जम्मू संभाग के एडीजीपी मुकेश से बात की थी, तो भूमाफिया ने कुछ दिन तक अवैध कब्जा करना बंद कर दिया था, अब वह चोरी-छुपे रात में फिर से अपने काम में लग गया है।

पटवारी जावेद पर चल रहा है 200 कनाल भूमि हथियाने का मुकदमा :

भूमाफिया से जुड़े लोगों में राजस्व विभाग का एक पटवारी भी शामिल है, जो इन दिनों जम्मू के डिप्टी कमिशनर कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोपों की चल रही जांच के कारण अटैच है। एसीबी के पास उसके खिलाफ पिछले वर्ष जनवरी माह में 200 कनाल राजस्व विभाग की भूमि हड़पने का मुकदमा दर्ज है। पटवारी जावेद अहमद पर पहले से ही सामुदायिक जमीन को कब्जाने का आरोप भी है।

एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार, जावेद अहमद ने कंगर इलाके में 200 कनाल से अधिक सरकारी जमीन पर कब्जा कर इसे अपने माता-पिता और पत्नी के नाम कर ली है। जावेद के घर पर जनवरी माह में छापे के दौरान ब्यूरो ने परिवार के नाम बैंक पास बुक और करोड़ों की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए थे। भूमाफिया अशोक ङ्क्षसह उर्फ शौकी के खिलाफ भी पुलिस ने पीएसए लगाया था, लेकिन बाद में वह रिहा हो गया। इस मामले में जम्मू के डिप्टी कमिश्नर अंशुल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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