जम्मू का ऐतिहासिक वैभव देखने के लिए हो जाएं तैयार, बाग-ए-बाहु में पानी की तरंगों पर झलकेगा

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जम्मू के ऐतिहासिक बाहु किले की पार्क की ओर दिखने वाली दीवारों को भी रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा चुका है।किले की दीवारों पर लेजर की मदद से ऐतिहासिक मंदिरों व धरोहरों की तस्वीरें उकेर कर अद्भुत नजारा पेश किया गया था।

Vikas AbrolSun, 05 Dec 2021 01:36 PM (IST)
तय कार्यक्रम के अनुसार 15 दिसंबर को इस लाइट एंड साउंड शो का उद्घघाटन हो सकता है।

जम्मू, ललित कुमार। जम्मू शहर के प्रसिद्ध बाग-ए-बाहू पार्क में अब पानी की तरंगों पर जम्मू की ऐतिहासिक धरोहरें झलकेगी। यहां आने वाले पर्यटक मधुर संगीत की धुनों पर पानी की तरंगों पर जम्मू के सभी प्राचीन स्थलों, ऐतिहासिक मंदिरों, धरोहरों व शहर की खूबसूरती को निहार पाएंगे। पर्यटकों के लिए बाग-ए-बाहु में इसी महीने लाइट एंड साउंड शो शुरू किया जा रहा है जिसमें पार्क में स्थित म्यूजिकल फाउनटेन में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें पानी की स्क्रीन तैयार होगी और उस पर लेजर की मदद से जम्मू शहर की खूबसूरती, इसकी संस्कृति, यहां के प्राचीन मंदिरों एवं धरोहरों को उकेरा जाएगा। पूरे उत्तर भारत में अपनी तरह का यह पहला लाउट एंड साउंड शो होगा जिसमें पानी पर तस्वीरें उकेर कर पर्यटकों को शहर के बारे में बताया जाएगा।

बाग-ए-बाहु में बाहु किले के पास और फिश इक्वेरियम के निकट जो म्यूजिकल फाउनटेन है, उसे इस लाइट एंड साउंड शो के लिए चुना गया है। कुछ साल पूर्व यहां म्यूजिकल फाउनटेन शुरू किया गया था जिसमें फव्वारे का पानी संगीत की धुनों पर रंग बदलते हुए पर्यटकों का मनोरंजन करता था। अब इस तकनीक में और सुधार करते हुए नया आकर्षण पेश किया जा रहा है। पर्यटन विभाग इसे इसी महीने शुरू करने जा रहा है। तय कार्यक्रम के अनुसार 15 दिसंबर को इस लाइट एंड साउंड शो का उद्घघाटन हो सकता है। विभाग ने हर दिन शाम को यहां दो शो करने का फैसला लिया है। 15 से 20 मिनट के इस लाइट एंड साउंड शो में पर्यटकों को पूरे जम्मू शहर को जानने का मौका मिलेगा।

10 करोड़ की आई लागत

बाग-ए-बाहु में लाइट एंड साउंड शो के प्रोजेक्ट पर करीब दस करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके लिए पार्क में स्थित फाउनटेल में आवश्यक बदलाव किए गए है। अब फाउनटेन चलने पर पानी की एक दीवार खड़ी होगी जिस पर लेजर की मदद से रंग-बिरंगी तस्वीरें उकेरी जाएगी। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए चीन के विशेषज्ञों की मदद ली गई है। चीन से इंजीनियर्स का एक दल इस सप्ताह जम्मू पहुंच कर इसका फाइनल ट्रायल भी करने वाला है। म्यूजिकल फाउनटेन के आसपास पर्यटक इस शो का लुत्फ उठा सके, इसके लिए पार्क में कुछ आवश्यक बदलाव किए गए है।

बाहु किले की दीवारें भी जगमगाएगी

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जम्मू के ऐतिहासिक बाहु किले की पार्क की ओर दिखने वाली दीवारों को भी रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा चुका है। गत दिनों आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम के दौरान किले की दीवारों पर लेजर की मदद से ऐतिहासिक मंदिरों व धरोहरों की तस्वीरें उकेर कर अद्भुत नजारा पेश किया गया था। लाइट एंड साउंड शो को भी इस प्रोजेक्ट के साथ जोड़ा गया है। एक तरफ किले की दीवारें रंग-बिरंगी लाइटों से रोशन होंगी तो दूसरी तरफ पानी की तरंगों पर जम्मू शहर झलकेगा जिससे एक अद्भुत नजारा पेश होगा।

जम्मू का मुगल गार्डन है बाग-ए-बाहु

कश्मीर में अगर मुगल गार्डन है तो जम्मू में पर्यटकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बाग-ए-बाहु है। यहां सालाना 5-6 लाख पर्यटक आते हैं। जम्मू शहर में प्रवेश करते ही जैसे आप तवी पुल पर पहुंचते हैं तो अपनी दाई तरफ आपको तवी किनारे एक ऊंची पहाड़ी दिखेगी जिस पर यह खबसूरत पार्क बना है। कश्मीर के मुगल गार्डन की तर्ज पर बना जम्मू का यह खूबसूरत पार्क पहाड़ी से नीचे तवी की ओर आता दिखाई देता है। इस पार्क में विशाल लॉन, भव्य और बड़े-बड़े फव्वारे, एक सुंदर झील, पत्थर से बनी खूबसूरत मूर्तियां हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। सर्दियों के दिनों में यहां गुनगुनी धूप इस पार्क में आने वाले पर्यटकों को आराम देती है तो वहीं गर्मियों में तवी से नदी से आती ठंडी हवा के झोंके मदमस्त कर देते हैं। इस पार्क में शाम का नजारा भी खास है क्योंकि पार्क में लाइटिंग व रोशनी के साथ चलने वाले फव्वारे खूबसूरत छटा बिखेर देते हैं। इस पार्क से पूरे जम्मू शहर के अद्भभुत दर्शन होते हैं। पार्क की बनावट कुछ ऐसी है कि सामने जम्मू शहर दिखाई देता है तो उसकी दाईं तरफ नजर जाते ही इठलाती हुई तवी नदी किसी नागिन की तरह गुजरती दिखती है।

ऐसे पहुंचे बाग-ए-बाहु :

जम्मू शहर के बीचों बना बाए-ए-बाहु पार्क जम्मू एयरपोर्ट से 7.4 किलोमीटर की दूरी पर है तो जम्मू के मुख्य बस अड्डे से इस पार्क की दूरी 3.7 किलोमीटर जबकि रेलवे स्टेशन से यह पार्क 3.2 किलोमीटर दूरी पर है। बाग-ए-बाहू पार्क के ठीक ऊपर बाहू फोर्ट है जिसका निर्माण तीन हजार वर्ष पहले राजा बाहूलोचन ने करवाया था। माना जाता है इस मंदिर का निर्माण भी राजा बाहू लोचन ने ही अपने किले में करवाया था जिसे बाद में डोगरा शासक महाराज गुलाब ने 1822 में राज तिलक के बाद मौजूदा स्वरूप दिया। महाकाली के इस मंदिर को लोग बाबे वाली माता के नाम से जानते हैं और माता वैष्णों देवी के बाद इस मंदिर को सबसे ज्यादा पूजनीय माना जाता है। रविवार और मंगलवार को इस मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रहती है।

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