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Jammu Kashmir: हताश चीन अब कश्मीर में आतंक को हवा देने में लगा, आतंकियों से बरामद हुआ चीनी साजो सामान

श्रीनगर, नवीन नवाज। पूर्वी लद्दाख में मुंह की खाने के बाद चीन ने पाकिस्तान की तरह कश्मीर में आतंकियों की मदद शुरू कर दी है। इसके लिए वह पाकिस्तान को हथियार, ट्रेनिग और पैसा दे रहा है। इसकी पुष्टि शनिवार नौगाम सेक्टर में मारे गए दो आतंकियों से मिले साजो- सामान से हुई। चीन में निर्मित एसाल्ट राइफल की गोलियों का एक सीलबंद डिब्बा मिला है।

सैन्य सूत्रों ने बताया कि आतंकी पहले भी चीन निर्मित हथियार इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन वह सामान अक्सर वही होता था जो पाक सेना आतंकी संगठनों को उपलब्ध कराती थी या फिर आतंकी संगठनों ने अपने स्तर पर खरीदा होता था। शनिवार को जो सामान बरामद हुआ जांच में पता चला कि उसकी सीधी सप्लाई आतंकी संगठन को हुई होगी। मतलब चीन ने आतंकी संगठन को हथियार दिए हैं। बरामद संचार उपकरण और आइईडी स्विच वही हैं, जो पाकिस्तानी सेना को चीन उपलब्ध कराता है।

यह आतंकी जिला कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार उस पाक चौकी के इलाके से जम्मू- कश्मीर में घुसपैठ कर रहे थे जहां मई के दूसरे पखवाड़े के दौरान चीनी सेना के अधिकारियों का दल पाक सेना की निगरानी में चलने वाले आतंकी शिविर में गया था। मई में चीनी सैन्याधिकारियों ने गुलाम कश्मीर में नीलम घाटी और साथ सटे इलाकों में कई आतंकी ट्रेनिग कैंपों का दौरा कर जिहादी संगठनों के कमांडरों के साथ बैठकें की थी। मुठभेड़ के दौरान जिस तरह से फायरिंग करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया है उसे देख मौके पर मौजूद सैन्याधिकारी कह रहे हैं इनकी ट्रेनिग में बदलाव हुआ है।

आतंकवाद को हथियार बनाया चीन ने :

दैनिक जागरण ने दो जून को जानकारी दी थी कि लद्दाख में भारत से मिल रहे मुहंतोड़ जवाब से हताश चीन ने अब पाकिस्तान की तरह भारत के खिलाफ आतंकवाद को हथियार बनाने का फैसला किया है। चीनी सैन्याधिकारियों ने पाक सेना और उसकी खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा लश्कर, हिजबुल और जैश के प्रमुख कमांडरों से मई के दूसरे पखवाड़े में बैठक की।

चुनिंदा आतंकी कमांडर ही बुलाए थे। चीनी अधिकारियों ने आतंकियों की ट्रेनिग का जायजा लेते हुए जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में हिंसा मे तेजी लाने की उनकी क्षमता, उनके संगठनात्मक और वित्तीय ढांचे व हथियारों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की है। आतंकियों के लिए रसायनिक और जैव हथियारों के इस्तेमाल पर भी बातचीत हुई है। बाद में चीनी अधिकारियों ने आइएसआइ के अधिकारियों के साथ गुलाम कश्मीर के अग्रिम छोर पर आतंकियों के तीन से चार  लांचिंग पैड और ट्रेनिग कैंपों का दौरा किया है।

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