भौर कैंप के नाले में यमुना जैसी उठने लगी झाग, नालों में छोड़ा जा रहा औद्योगिक इलाकों का प्रदूषित पानी

जम्मू शहर के सभी इलाकों में अब तक सीवरेज लाइन नहीं बिछाई गई है। ऐसे में इन इलाकों में लोगों के शौचालय से निकलने वाली गंदगी सीधे तवी नदी या नालों में चली जाती है। अभी तक शहर में एक ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लग पाया है।

Lokesh Chandra MishraTue, 30 Nov 2021 09:11 AM (IST)
नाले में दूषित पानी बहने से गुज्जरों को सता रही है मवेशियों के जान की चिंता

जम्मू, जागरण संवाददाता : जिले के कई नालों का पानी भी अब इतना प्रदूषित हो गया है कि इसमें भी दिल्ली में यमुना की तरह झाग उठने लगी है। इसके बावजूद सरकार नालों में गिराई जा रही शहर की गंदगी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। जम्मू में सतवारी से आगे भौर कैंप इलाके में बने खूबसूरत पार्क के बगल से गुजरने वाले नाले में इन दिनों इसी तरह झाग देखी जा रही है।

जम्मू शहर के सभी इलाकों में अब तक सीवरेज लाइन नहीं बिछाई गई है। ऐसे में इन इलाकों में लोगों के शौचालय से निकलने वाली गंदगी सीधे तवी नदी या नालों में चली जाती है। अभी तक शहर में एक ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लग पाया है। ऐसे में गंदे पानी को साफ करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं, शहर के बाहरी इलाकों में लोगों ने नालों को डस्टबिन बना दिया है। जम्मू से सटे सांबा जिले से भी कुछ नाले सतवारी की तरफ निकलते हैं।

दोनों जिलों के औद्योगिक इलाकों का प्रदूषित पानी भी इन नालों में सीधे छोड़ दिया जाता है। ज्यादातर कारखानों में इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) भी नहीं लगे हैं। ऐसे में कारखानों का प्रदूषित पानी बिना साफ किए सीधे नालों में छोड़ दिया जाता है। हार्टीकल्चर विभाग की तरफ से बनाए गए खूबसूरत बाग-ए-भौर पार्क के पास से गुजरने वाले नाले में भी प्रदूषण काफी बढ़ गया है। इसका पानी बिल्कुल काला हो गया है। स्थानीय लोगों की मानें तो इसमें भी गंग्याल औद्योगिक इलाके से प्रदूषित पानी आता है। इसकी वजह से इसमें अब झाग निकलने लगा है।

पशुपालकों को सता रही चिंता : भौर कैंप इलाके में पार्क के पास से गुजरने वाले नाले में जम्मू और सांबा की तरफ से कई छोटे नालों का पानी आता है। स्थानीय लोग आशंका जताते हैं कि इसमें बड़ी ब्राह्मणा और गंग्याल औद्योगिक इलाके में स्थित कारखानों का प्रदूषित पानी आ रहा है। इससे यह प्रदूषित हो गया है। इस नाले के किनारे गुज्जर बक्करवाल समुदाय ने अपने कुल्ले बनाए हैं। उनके डर लगा रहता है कि कहीं उनके मवेशी नाले का प्रदूषित पानी नहीं पील लें।

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