डॉ फारूक ने फिर दिया भारत-पाक वार्ता पर जोर, कहा संबंधों के प्रति दोनों को होना होगा गंभीर

दोनों पड़ोसी देशों को जितनी जल्दी जमीनी हकीकत का अहसास हो उतना अच्छा है।उन्होंने कहा दोनों देश असहमति के सभी लंबित क्षेत्रों को सुलझाने में जितने अधिक गंभीर उतना ही जल्दी जम्मू-कश्मीर और पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की जल्द वापसी के लिए बेहतर होगा।

Rahul SharmaMon, 26 Jul 2021 07:50 AM (IST)
लोगों का हवाला देते हुए कहा कि अब आतंकवाद से यहां के लोग तंग आ चुके हैं।

जम्मू, राज्य ब्यूरो: नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का सुर छेड़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को यह महसूस करना चाहिए कि वे एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध नहीं जीत सकते। उन्होंने कहा कि उनकी नेशनल कांफ्रेंस भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता की हमेशा ही पक्षधर रहेगी।

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के लामद और देवसर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में फारूक ने कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को लेकर गंभीर होने की जरूरत है। दोनों देशों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लोग दुखों से मुक्त होकर जीवन जीयें। उन्होंने कहा कि बातचीत का कोई विकल्प नहीं है। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध नहीं जीत सकते। दोनों पड़ोसी देशों को जितनी जल्दी जमीनी हकीकत का अहसास हो, उतना अच्छा है।

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक ने कहा कि दोनों देश असहमति के सभी लंबित क्षेत्रों को सुलझाने में जितने अधिक गंभीर होंगे, उतना ही जल्दी जम्मू कश्मीर और पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की जल्द वापसी के लिए बेहतर होगा। दोनों देशों के बीच मधुर संबंध होने से दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को कंधे से कंधा मिलाकर रहना है।

यह उन पर निर्भर है कि वे दुश्मन बनकर रहना चाहते हैं या सहायक मित्र बनकर विकास में भागीदार के रूप में रहना चाहते हैं। दोनों देश हाथ मिलाकर काफी कुछ हासिल कर सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक ने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारना है तो उन्हें एक साथ काम करने के लिए अपने मतभेदों को कम करना होगा।

पीएम की सर्वदलीय बैठक का जमीन पर कोई नतीजा नहीं: जम्मू कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के एक महीने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि बैठक का जमीन पर कोई नतीजा नजर नहीं आ रहा है। 24 जून की सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री का जम्मू कश्मीर के लोगों का दिल जीतने के लिए दिल की दूरी व दिल्ली की दूरी का बयान स्वागत था, लेकिन दिल जीतने के लिए जमीनी सतह पर कुछ नहीं किया गया। फारूक ने कहा कि हमें पता है कि इस सरकार के रहते हुए पांच अगस्त, 2019 से पहले की स्थिति बहाल नहीं होगी, लेकिन हम कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहेंगे।

 

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