Jammu Kashmir: जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव स्थगित, अब हालात सामान्य होने पर ही होंगे चुनाव

चुनाव तब ही करवाएं जाएंगे, जब कोरोना के हालात सामान्य हो जाएंगे।

वित्तीय आयुक्त राजस्व विभाग की अधिसूचना के बाद जम्मू कश्मीर के सभी 20 जिलों के डिप्टी कमिश्नर चुनाव की अधिसूचना जारी करेंगे। चुनाव तब ही करवाएं जाएंगे जब कोरोना के हालात सामान्य हो जाएंगे। चुनाव के लिए संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नर चुनाव की अधिसूचना जारी करते हैं।

Vikas AbrolWed, 21 Apr 2021 08:03 PM (IST)

जम्मू, राज्य ब्यूरो। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के चुनाव स्थगित हो गए है। चूंकि इस समय सरकार के लिए कोरोना से निपटना चुनौती बना हुआ है और जम्मू कश्मीर में रात का कर्फ्यू लागू करने के साथ रोटेशन पर दुकानें खोलने, बसों, मिनी बसों में पचास फीसद क्षमता किए जाने के बाद प्रशासन के लिए इस हालात में चुनाव करवाना मुमकिन नहीं लग रहा है। प्रचार भी थम गया है।

वित्तीय आयुक्त राजस्व ने मतदाता सूचियों में आपात्तियों और दावों का निपटारा करने की अंतिम तिथि को 22 अप्रैल 2021 किया है। वहीं फाइनल मतदाता सूचियां 26 अप्रैल को प्रकाशित की जाएंगी। सरकार ने तीन बार मतदाता सूचियों के लिए समय इसलिए बढ़ाया है ताकि कोई मतदाता सूचियों में नाम शामिल करवाने से चूक न जाए और मतदान के लिए समय भी मिल जाए।

वित्तीय आयुक्त राजस्व विभाग की अधिसूचना के बाद जम्मू कश्मीर के सभी 20 जिलों के डिप्टी कमिश्नर चुनाव की अधिसूचना जारी करेंगे। चुनाव तब ही करवाएं जाएंगे, जब कोरोना के हालात सामान्य हो जाएंगे। जम्मू कश्मीर में कुल बीस जिले है और चुनाव के लिए संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नर चुनाव की अधिसूचना जारी करते हैं। इसमें नामांकन पत्र भरने, नाम वापिस लेने समेत चुनाव की तिथि से लेकर परिणाम तक का सारा शेडयूल शामिल होता है। गुरुद्वारा कमेटियों का पांच साल का कार्यकाल 12 जुलाई 2020 को समाप्त हो गया था। उसके बाद सरकार ने कार्यकाल तीन महीने बढ़ाया था। बाद में सरकार ने तीन महीने में चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने के आदेश दिए थे लेकिन जिला विकास परिषद के चुनाव होने से जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के चुनाव की प्रक्रिया को टाल दिया गया। चुनाव गुरुद्वारा एक्ट 1973 के तहत करवाए जा रहे हैं।कमेटियों का काम जम्मू कश्मीर के गुरुद्वारों की देखभाल, संचालन करना होता है। गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार चुनाव करवाने का जिम्मा सरकार का होता है।

जम्मू कश्मीर गुरुद्वारा एक्ट 1973 के तहत हर जिले की अपनी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनेगी। कमेटी के लिए ग्यारह सदस्य चुने जाते हैं। हर जिले में ग्यारह सीटें निर्धारित है। ग्यारह सदस्य बनने के बाद अगली कार्रवाई पदाधिकारियों को चुनने की होती है। ग्यारह सदस्यों वाली कमेटी अपनी प्रधान चुनती है। अगर सर्वसम्मति नहीं बनती तो बहुमत के हिसाब से प्रधान का चयन होता है। छह सदस्यों का समर्थन मिलने पर प्रधान चुना जाता है। प्रधान के अलावा उप्रधान, महासचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष चुने जाते है। पदाधिकारियों की सूचना लिखित में संबंधित डिप्टी कमिश्नर को दी जाती है। बाद में जम्मू कश्मीर गुरुद्वारा प्रबंधक बोर्ड का चुनाव होता है।

आल पार्टीज सिख कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन जगमोहन सिंह रैना का कहना है कि जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है। लद्दाख अलग हो चुका है। स्थितियां बदल गईं हैं। ऐसे में पूर्व जम्मू कश्मीर में गुरुद्वारा एक्ट 1973 के तहत चुनाव करवाने का फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के समक्ष उठा चुके है। गुरुद्वारा कमेटियों के चुनाव से पहले नया गुरुद्वारा कानून लाया जाना चाहिए। यह कानून दिल्ली सिख मैनेजमेंट कमेटी की तर्ज पर लाया जाए।

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