Jammu : स्थायी सचिव न होने से जम्मू मेें मृतप्राय हो रहा भाषा अकादमी

जम्मू के अकादमी कार्यालय से भी सचिव को बिजली बकाए की जानकारी दी गई थी। उन्हें यह भी बताया गया था कि बिजली किराया देरी से देने के कारण बहुत ज्यादा बजाज देना पड़ता है लेकिन सचिव के पास इतना समय ही नहीं किपत्राचार का जवाब दे सकें।

Lokesh Chandra MishraFri, 24 Sep 2021 07:23 PM (IST)
भाषा अकादमी का कोई स्थायी सचिव नहीं होने के कारण अकादमी का कोई भी कार्य समय पर नहीं हो रहा।

जम्मू, जागरण संवाददाता : पिछले तीन वर्षों से जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी का कोई स्थायी सचिव नहीं होने के कारण अकादमी का कोई भी कार्य समय पर नहीं हो रहा। सांस्कृतिक गतिविधियां कोविड-19 की आड़ में बंद हैं तो दूसरे सरकारी कार्य भी राम भरोसे ही चल रहे हैं। इसी का परिणाम है कि शुक्रवार को बिजली विभाग ने समय पर बिजली किराए का भुगतान न होने के कारण अकादमी की बिजली काट दी, जिससे पूरा कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया।

हालत यह है कि बिजली का किराया देने के लिए सचिव को लिखा जाता रहा, लेकिन इस ओर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब कि बिजली के किराए की करीब छह लाख की देनदारी हो गई तो बिजली विभाग को मजबूरन बिजली काटनी पड़ी। बिजली काटने पहुंचे कर्मचारियों को जब कहा गया कि वह बिजली न काटें तो उनका कहना था कि उन्होंने कई बार अकादमी को भुगतान के लिए लिखा है, लेकिन वहां से कोई जवाब ही नहीं मिलता।

वहीं जानकारी के अनुसार जम्मू के अकादमी कार्यालय से भी सचिव को बिजली बकाए की जानकारी दी गई थी। उन्हें यह भी बताया गया था कि बिजली किराया देरी से देने के कारण बहुत ज्यादा बजाज देना पड़ता है लेकिन सचिव के पास इतना समय ही नहीं है कि वह अकादमी के पत्राचार का जवाब दे सकें।

ज्ञातव्य है कि मार्च 2019 को डा. अजीज हाजिनी का सचिव का कार्यकाल पूरा होने के बाद से लेकर आज तक अकादमी को स्थायी सचिव नहीं मिल सका है। हाजिनी का कार्यकाल पूरा होने के उपरांत मुनीर-उल-इस्लाम, उसके बाद कृतिका ज्योत्सना और अब राहुल पांडे को अकादमी का इंचार्ज सचिव बनाया गया है, लेकिन उनके पास सूचना विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग के अलावा पुरातत्व एवं अभिलेखागार विभाग आदि की जिम्मेदारी भी है।

कलाकारों और अकादमी कर्मचारियों का कहना है कि जब तक अकादमी को स्थायी सचिव नहीं मिल जाता इस तरह की परेशानियां बनी रहेंगी। कलाकारों का कहना है कि अगर स्थायी सचिव होता तो कलाकारों से कोरोना काल में भी कई तरह के कार्यक्रम करवाना संभव था। आज जब कि कई साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठन अपने तौर पर कार्यक्रम कर सकते हैं, तो अकादमी कोई भी कार्यक्रम क्यों नहीं करवा पा रही।कोई भी स्थायी सचिव न होने का ही परिणाम है कि पिछले तीन वर्षो से अकादमी की सभी गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं।

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