हमें पोलियाे टीकाकरण मॉडल से सबक लेकर कोराेना अभियान आगे बढ़ना चाहिए: डॉ निसार

किसी कंटेनमेंट जोन में या किसी क्षेत्र विशेष में जाकर लोगों का टीकाकरण कर रही हैं।

जम्मू-कश्मीर की सवा करोड़ की आबादी जिसमें से करीब 90 लाख लोगों की आयु 18 से पार है को टीका लगाने में मात्र डेढ़ माह का समय लगेगा। बशर्तेे आपके पास वैक्सीन हो। इस दौरान आपकी आधी से ज्यादा आबादी को दूसरी डोज भी लग जाएगी।

Rahul SharmaSun, 09 May 2021 02:39 PM (IST)

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कोरोना संक्रमण को अगर हराना है तो हमें टीकाकरण का तरीका बदलना होगा। जम्मू-कश्मीर में हरेक ऑनलाइन अपना पंजीकरण नहीं करा सकता, क्योंकि यहां कई इलाकों में इंटरनेट सही तरीके से नहीं चलता। हरेक के पास स्मार्ट फोन हो, यह भी जरुरी नहीं है। इसलिए हमें काेविड-19 की एसओपी को लेकर हो रहे निरंतर बदलाव को ध्यान में रखते हुए टीकाकरण के परंपरागत तरीके में कुछ बदलाव करना होगा। यही सही रहेगा। हमें पोलियाे टीकाकरण के मॉडल से सबक लेना चाहिए। यह राय कश्मीर के जाने माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डाॅ निसार-उल-हसन ने दी।

दैनिक जागरण के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ये अभियान मोहल्ला और गांव के स्तर पर चलाए जाने की जरुरत है। यह कतई मुश्किल नहीं हैं। अगर आपको नाबालिगों को टीका नहीं लगाना है तो मत लगाइए, लेकिन सभी बालिगों काे आसानी से टीका लगाया जा सकता है। इससे कहीं भी न वैक्सीन का संकट पैदा होेगा, न किसी जगह वैक्सीन व्यर्थ जाएगी। इस समय भी कश्मीर में प्रशासन ने एक बहुत ही अच्छा कदम उठाया है, कई जगह मोबाइल टीमों को तैनात किया है, जो किसी कंटेनमेंट जोन में या किसी क्षेत्र विशेष में जाकर लोगों का टीकाकरण कर रही हैं। यह घर-घर जाकर टीका लगाने के समान ही है।

इस तरह की मोबाइल टीमों को प्रत्येक मोहल्ले और गांव के लिए तैनात किया जा सकता है। मेरा मानना है कि अगर ऐसा किया जाता है तो जम्मू-कश्मीर की सवा करोड़ की आबादी जिसमें से करीब 90 लाख लोगों की आयु 18 से पार है, को टीका लगाने में मात्र डेढ़ माह का समय लगेगा। बशर्तेे आपके पास वैक्सीन हो। इस दौरान आपकी आधी से ज्यादा आबादी को दूसरी डोज भी लग जाएगी।

डाॅ निसार ने कहा कि वैक्सीन को एक निश्चित तापमान में संरक्षित किए जाने की बात होती है तो उसका उपाय भी आसान है। आज आपके पास बैटरी से चलने वाले पाेर्टेबल फ्रिज हैं, जिन्हें आप अपनी कार में रख सकते हैं। इसके अलावा थर्माेकाल से बने डिब्बे भी होते हैं, जिनमें आप काफी देर तक वैक्सीन को एक निश्चित तापमान पर सुरक्षित रख सकते हैं। अापके स्वास्थ्यकर्मियों का दल किसी मोहल्ले में जाएगा, वहां सभी पात्र लोगों को टीका लगाएगा। सभी लगवाने आएंगे। इसमें अराजकता पैदा न हो, इसके लिए आप स्थानीय एनजीओ, मोहल्ला कमेटियों की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप राशन कार्ड के आधार पर भी परिवारों को चिन्हित कर सकते हैं। राशन कार्ड पर तो सभी की उम्र लिखी होती है और परिवार के मुखिया का बायोमैट्रक्स भी आपके पास रहता है।

सरकार को चाहिए कि वह निजी अस्पतालों में विदेशों से आयात की जाने वाले महंगी वैक्सीन लगाने की अनुमति दें ताकि जो साधन संपन्न हैं, वे वहां लगवाएं। इससे सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा। कारपोरेट सेक्टर की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने कर्मियों के लिए यह मॉडल अपना सकती है। अगर क्षेत्रवार या घर-घर जाकर टीकाकरण संभव नहीं होता तो यहां श्रीनगर में मोबाइल टीमें तैनात नहीं की जाती। यहां तो प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर-घर जाकर टीका लगाने का अभियान शुरु करने जा रही है। हम इसे थोड़ा और विस्तार देने और व्यवस्थित बनाने की बात कर रहे हैं। इस तरह से आपके संसाधन भी बचेंगे, अफरा-तफरी भी नहीं होगी और ज्यादा से ज्यादा लोग टीकाकरण में शामिल होंगे।

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