Coronavirus In Jammu Kashmir: पिछले साल की चुनौतियों ने सिखा दिया कोरोना को हराने का हुनर

राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू में करीब ढाई हजार आक्सीजन सिलिंडर भी हैं।

Coronavirus in Jammu Kashmir जीएमसी प्रशासन का कहना है कि मरीजों की संख्या को देखकर ही वार्ड खोले जाएंगे। फिलहाल अन्य बीमारियों के मरीज इन वार्डों में भर्ती हैं। अगर मरीजों की संख्या बढ़ी तो उसी के अनुसार वार्ड भी खोले जाएंगे।

Rahul SharmaFri, 09 Apr 2021 07:58 AM (IST)

जम्मू, रोहित जंडियाल: दूसरी लहर के साथ कोरोना संक्रमण भले ही तेजी से फैला रहा है, लेकिन इस बार पहले की अपेक्षा तैयारियां अधिक मजबूत हैं। पिछले साल से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से इंतजाम किया है।

अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है। आक्सीजन की फिलहाल कमी नहीं है। मंजूरी के बाद भी आक्सीजन जेनरेशन प्लांट तो नहीं बन पाए, लेकिन प्रदेश के दोनों राजकीय मेडिकल कालेज अस्पतालों में आक्सीजन के टैंक जरूर खड़े कर दिए गए। प्रत्येक लिक्युड आक्सीजन टैंक की क्षमता बीस हजार किलोलीटर की है। राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू में करीब ढाई हजार आक्सीजन सिलिंडर भी हैं।

यहां एक समय में तीन सौ मरीजों को आक्सीजन उपलब्ध करवाई जा सकती है। श्रीनगर में भी लिक्युड आक्सीजन प्लांट के अलावा सिलिंडरों से भी आक्सीजन उपलब्ध करवाई जा रही है। श्रीनगर में मरीज अधिक होने के बावजूद वहां पर गत वर्ष भी कोई खास परेशानी नहीं आई थी।

अब दूसरी कंपनी बना रही आक्सीजन प्लांट: पिछले साल कोरोना के मामले बढऩे के बाद जम्मू के राजकीय मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी हो गई थी। इससे कुछ मरीजों की मौत भी हो गई थी। इसके बाद 212 करोड़ रुपयों की लागत से अस्पतालों में आक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी गई। यह प्रक्रिया गत वर्ष सितंबर में शुरू हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिस कंपनी के नाम टेंडर निकले थे, उसने काम ही नहीं किया। अब दूसरी कंपनी को काम दिया गया है। इसने काम शुरू कर दिया है।

जम्मू में बिस्तरों की स्थिति: गांधीनगर के जच्चा-बच्च्चा अस्पताल में आक्सीजन की व्यवस्था वाले 200 बिस्तर हैं। इस अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. अरुण शर्मा का कहना है कि अस्पताल में आक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। आक्सीजन प्लांट भी लगाया जा रहा है। वहीं, चेस्ट डिजीज अस्पताल में भी 200 से अधिक बिस्तर हैं।

मरीजों की स्थिति पर निर्भर करेंगे बिस्तर: इस बार अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से कोरोना मरीजों के लिए व्यवस्था की गई है। जीएमसी जम्मू में आइसोलेशन वार्ड के अलावा हाई डिपेंडेंसी वार्ड और सीसीयू भी कोरोना मरीजों के लिए हैं। वार्ड नंबर तीन, सात और 15 भी कोरोना मरीजों के लिए हैं। फिलहाल, आइसोलेशन वार्ड गांधीनगर अस्पताल में ही कोरोना मरीज भर्ती हैं। जीएमसी प्रशासन का कहना है कि मरीजों की संख्या को देखकर ही वार्ड खोले जाएंगे। फिलहाल, अन्य बीमारियों के मरीज इन वार्डों में भर्ती हैं। अगर मरीजों की संख्या बढ़ी तो उसी के अनुसार वार्ड भी खोले जाएंगे।

जम्मू इतने भर्ती हैं मरीज: मेडिकल कालेज में 10 दिन पहले तक सिर्फ आठ से दस मरीज ही भर्ती थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 66 हो गई है। यह सभी आइसोलेशन वार्डों में हैं। हर दिन पांच से 10 नए मरीज भर्ती हो रहे हैं। गांधीनगर अस्पताल में पिछले 10 दिनों में 62 मरीजों को भर्ती किया गया है। यह सभी मरीज अन्य प्रदेशों से जम्मू कश्मीर में आए थे। चेस्ट डिजीज अस्पताल में कोई मरीज भर्ती नहीं है।

मंडलायुक्त को लिखा पत्र: अभी अस्पतालों में खुद के आक्सीजन जेनरेशन प्लांट नहीं है। आक्सीजन की कमी न हो, इसलिए जीएमसी प्रशासन ने जम्मू के मंडलायुक्त को पत्र लिखा है। इसमें आक्सीजन का उत्पादन करने वालों से हर स्थिति में आक्सीजन की आपूर्ति बरकरार रखने की मांग की गई है। जिस दर मरीजों की संख्या बढ़ी है, उससे विभाग चिंता में है कि कहीं अचानक से बड़ी संख्या में भर्ती होने वाले मरीज न आ जाएं। हालांकि, इस बार बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों को घरों में ही रखा जा रहा है। इससे अस्पतालों में भीड़ नहीं है।

जीएमसी जम्मू

कुल बिस्तर 203 आइसोलेशन बिस्तर 120 आइसीयू बिस्तर 83

जम्मू संभाग में बिस्तरों की स्थिति

सामान्य वार्ड

कुल बिस्तर: 1109 भर्ती मरीज: 139

आइसोलेशन वार्ड

कुल बिस्तर: 1062 बिना आक्सीजन पर मरीज: 86 आक्सीजन पर मरीज: 17

आइसीय वार्ड

कुल बिस्तर: 137 भर्ती मरीज: 38

कश्मीर संभाग में बिस्तरों की स्थिति

सामान्य वार्ड

कुल बिस्तर: 1630 भर्ती मरीज: 224

आइसोलेशन वार्ड

कुल बिस्तर: 1276 बिना आक्सीजन पर मरीज: 86 आक्सीजन पर मरीज: 13

आइसीयू वार्ड

कुल बिस्तर: 223 भर्ती मरीज: 54 

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.