Jammu : नालों का निर्माण तो किया लेकिन अतिक्रमण नहीं हटा पाया नगर निगम

निगम को अब समझ नहीं आ रहा है कि वे नालों के किनारों पर हजारों की संख्या में बन चुके मकानों को तोड़ कर किस प्रकार इन्हें चौड़ा करें। लोगों की मुश्किल में साथ खड़ा होने के लिए अब निगम ऐसे प्वाइंट चिह्नित करने में जुट गया है

Lokesh Chandra MishraSun, 18 Jul 2021 05:53 PM (IST)
नानक नगर के सेक्टर 7 की गली नंबर 16 में नाले पर लोगों ने घर बना रखा है।

जम्मू, जागरण संवाददाता : करोड़ों खर्चने के बाद भी शहर में जलभराव रोक पाने में विफल साबित हुए जम्मू नगर निगम के लिए शहर के नाले गले की फांस बन गए हैं। वर्षों पहले नालों पर हुए अतिक्रमण के कारण साल-दर-साल जलभराव की समस्या बढ़ती जा रही है। निगम को अब समझ नहीं आ रहा है कि वे नालों के किनारों पर हजारों की संख्या में बन चुके मकानों को तोड़ कर किस प्रकार इन्हें चौड़ा करें। लोगों की मुश्किल में साथ खड़ा होने के लिए अब निगम ऐसे प्वाइंट चिह्नित करने में जुट गया है, जहां नालों पर साफ अतिक्रमण दिखता है।

वर्ष 2015 से अभी तक सरकार की तरफ से नालों और गहरी नालियों के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। इसके विपरीत झमाझम बारिश होते ही शहर जलमग्न होने लगा है। जम्मू के पाश गांधीनगर में भी कई फुट पानी लोगों के घरों में आ घुसा। शहर में हालत यह है कि नालों की चौड़ाई 10 से 20 फुट रह गई है, जबकि यह कभी 40 फुट से ज्यादा चौड़ा हुआ करते थे। अब शहर में निर्माण व आबादी बढ़ने के साथ जल निकासी की समस्या विकराल होने लगी है, जिससे जम्मू नगर निगम की नींद उड़ना भी स्वाभाविक है।

शहर के त्रिकुटा नगर के सेक्टर-5, सेक्टर-2ए, अांबेडकर नगर, नानक नगर के सेक्टर 7 की गली नंबर 16, सेक्टर 6 की गली नंबर 15, नानक नगर के सेक्टर 12, डिग्याना के रूपनगर व ऊधम सिंह नगर, गंग्याल के अलावा तालाब तिल्लो व आसपास के इलाकों में अतिक्रमण के चलते नाले सिकुड़ चुके हैं। कुछ स्थानों पर तो नालों पर लैंटर डाल कर पक्के ढांचे भी बनाए गए हैं। नई बस्ती क्षेत्र में विगत दिवस निगम ने जिस दुकान को तोड़ा वो भी नाले के ऊपर बनाई गई थी।

ऐसे ही नानक नगर व गांधीनगर के साथ पड़ने वाले नाले पर स्लैड व अतिक्रमण के चलते जलभराव की समस्या बनी हुई है। नानक नगर में पूर्व केंद्रीय मंत्री के निवास के नजदीक नाले पर स्लैब डाल कर गाड़ियों की पार्किंग की जगह बना दी गई थी। जहां नाला साफ नहीं होने के कारण अब स्लैब तोड़ने का फैसला लिया गया है।

अमरूट योजना के तहत बने अधिकतर नाले : भारत सरकार ने 25 जून, 2015 को अटल मिशन फॉर रिज्यूविनेशन एंड अरबन ट्रांसफार्मेशन यानी अमरूट योजना को लांच किया था। इसी योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में भी बहुत से विकास कार्याें को गति प्रदान की गई। अामरूट योजना के तहत ही शहर के त्रिकुटा नगर, गांधीनगर, नानक नगर, सुभाष नगर, सुभाष नगर में नालों व गहरी नालियों का निर्माण करवया गया। इसके तहत जम्मू में ड्रेनेज के लिए 254 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए। इसके अलावा जम्मू में सीवरेज व सैप्टिक प्रबंधन के लिए 885.75 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया।

त्रिकुटा नगर में निदेश अपार्टमेंट के नजदीक चट्ठा चौआदी नाला और हेरिटेज स्कूल सैनिक कालोनी के नजदीक नालों के निर्माण पर 20.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। ऐसे ही राजीव नगर नाले तीन हजार मीटर नाला बनवाने पर छह करोड़ खर्च किए गए। सीएम रेजीडेंस से डीपीएस स्कूल तक गहरी नाले के निर्माण पर 1.65 करोड़ खर्च किए गए। डेली एक्सलेशियर वन भूमि से राम विहार शांत नगर जानीपुर तक 4.50 करोड़ रुपये की लागत से गहरी नाली का निर्माण किया गया। कुल मिलाकर वर्ष 2015 से अभी तक करीब 300 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च शहर के नालों व गहरी नालियों पर किया गया।

नालों की सफाई के मद्देनजर जम्मू नगर निगम ने विभिन्न वार्डों में नालों व गहरी नालियों को साफ करने वाले कर्मचारियों की तैनाती कर दी है। इसके तहत हर वार्ड में एक दिन नाला गैंग के कर्मचारी व मशीनरी काम करेंगे। अब अब बने हालात को देखते हुए निगम ने और सतर्कता दिखाते हुए ऐसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है, जहां से जलभराव का खतरा ज्यादा है।

कब किस वार्ड में होगी नालों की सफाई

17 से 20 जुलाई : वार्ड 53, 54, 55, 56 21 से 24 जुलाई : वार्ड 57, 58, 68, 69 25 से 28 जुलाई : वार्ड 70, 73, 74 व रैल हैड 29 से 31 जुलाई : वार्ड 19ए, 44, 45 व 20बी-सी

क्या कहते हैं अधिकारी : चीफ ट्रांसपोर्ट आफिसर जम्मू नगर निगम हरविंद्र सिंह ने कहा कि शहर में नालों की सफाई में तो कोई कसर नहीं छोड़ी गई, लेकिन 30 वर्षाें के बाद इतनी बारिश हुई कि नाले ओवरफ्लो हो गए। अब ऐसे स्थानों की निशानदेही की जा रही है, जहां नालों को साफ करने में दिक्कत हो रही है। जहां लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। हम ऐसे प्वाइंट की सूची बना रहे हैं। फिर आदेश मिलते ही इन्हें तोड़ने की कार्रवाई होगी। नई बस्ती में भी इसी तरह नाले पर हुए अतिक्रमण को हटाया गया है। यहां भी नाले को साफ नहीं किया जा सकता था। सारे शहर में जब नालों को साफ और गहरा करने की दिक्कत नहीं रहेगी तो जलभराव की समस्या भी कम हो जाएगी।

मेयर चंद्रमोहन गुप्ता ने कहा कि नालों पर वर्षों से हुआ अतिक्रमण अब समस्या बनने लगा है। पहले आबादी कम थी। निर्माण भी कम थे। पानी जगह तलाश लेता था। अब समस्या बढ़ रही है। 70 साल की सरकार की लापरवाही का खामियाजा अब लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हमने नालों पर हुए स्पष्ट अतिक्रमण हटाना शुरू कया है। सभी नालों को खाली करवा पाना तो आसान नहीं होगा। फिर भी हमने उपराज्यपाल से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने और नालों के निर्माण के लिए एक हजार करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। नालों पर डाले गए स्लैब व अतिक्रमण हटाने का काम निगम ने शुरू कर दिया है। लोग भी सहयोग करें।

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