Terror Funding: पीडीपी नेता वहीद-उर-रहमान परा पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप तय

सीआइके ने वहीद परा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमा चलाने की अनुमति जम्मू कश्मीर गृह विभाग से प्राप्त की है। सीआइके ने बीते साल ही उसके खिलाफ कुछ अज्ञात राजनीतिकों के खिलाफ आतंकियों की मदद करने का मामला दर्ज किया था।

Rahul SharmaTue, 27 Jul 2021 08:17 AM (IST)
सीआइके ने पांच संरक्षित गवाहों और टेक्नीकल इंटेलीजेंस की मदद से परा के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किया था।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की युवा इकाई के अध्यक्ष वहीद उर रहमान परा के खिलाफ एक विशेष अदालत ने आतंकी गतिविधियों के आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने इसी माह की शुरुआत में जम्मू कश्मीर पुलिस के आरोपपत्र पर बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुना था। उसी सुनवाई के आधार पर ही आरोप तय किए गए हैं। आतंकियों के साथ कथित तौर पर सांठगांठ करने वाले परा के पत्रकार से राजनीतिक नेता बनने के 13 साल के सफर को पुलिस ने आरोपपत्र में छलकपट, झूठ और दोगलेपन की कहानी बताया है। परा ने राजनीतिक फायदेे के लिए आतंकियों से सहयोग लिया और बदले में उन्हेंं आतंकी हमलों व अन्य गतिविधियों में सहयोग व संरक्षण प्रदान किया।

अदालत ने आरोप तय करते हुए आदेश में कहा है कि परा के खिलाफ तथाकथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत किए गए अपराधों को साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। अदालत ने उस पर आतंकी संगठनों से गठजोड़ होने, आतंकियों के लिए चंदा जुटाने और आतंकी संगठन का मददगार होने का आरोप तय किया है। इसके अलावा उस पर देश के खिलाफ जंग छेडऩे की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपों के अलावा सरकार के खिलाफ जनाक्रोश पैदा करने का भी आरोपित बनाया गया है। जज ने अपने आदेश में कहा है कि मैंने पुलिस की रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का आकलन किया है, पुलिस रिपोर्ट में बताए गए हालात और तथ्यों का भी अध्ययन किया है, उसके खिलाफ उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को भी देखा है जो लगाए गए आरोपों और उसके द्वारा किए गए अपराधों को साबित करने में पर्याप्त हैं।

जम्मू कश्मीर पुलिस के काउंटर इंटेलीजेंस विंग (सीआइके) ने पांच संरक्षित गवाहों और टेक्नीकल इंटेलीजेंस की मदद से परा के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर अदालत में पेश किया था। इसमें बताया गया है कि परा आतंकियों के साथ मिला हुआ था और आतंकियों व पाकिस्तानी एजेंसियों के मंसूबों को कश्मीर में आगे बढ़ाने के अलावा वह अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ आतंकियों का इस्तेमाल करता था। पुलिस ने 19 पेज के आरोपपत्र के साथ करीब एक हजार पन्नों पर आधारित सुबूत भी पेश किए हैं। आरोपपत्र में पाकिस्तानी आतंकी अबु दुजाना और अबु कासिम के साथ भी उसके रिश्तों का जिक्र है। यह दोनों आतंकी मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। वह कई बार इन दोनों आतंकियों से निजी तौर पर मिला। परा के वकील शारिक रियाज ने सभी आरोपों के इन्कार करते कहा कि मैं अपने मुवक्किल के खिलाफ लगाए आरोपों का अदालत में जवाब दूंगा।

राष्ट्रविरोधी एजेंडे की जड़ें जमा रहा था महबूबा का करीबी

पीडीपी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबियों में शामिल वहीद परा के वर्ष 2007 में पत्रकार बननेे से लेकर राजनीतिक नेता के रूप में 2020 तक के सफर के बारे में पुलिस ने विस्तृत जांच की है। वह 2007 में पाकिस्तान गया था और वहां उसने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सल्लाहुदीन का साक्षात्कार लिया था। उसने इस साक्षात्कार को पुलवामा में संचालित होने वाले एक केबल टीवी नेटवर्क पर प्रसारित किया था। वह 2013 में पीडीपी में शामिल हो गया। वह बड़े ही सुनियोजित तरीके से अपने राष्ट्रविरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जड़ें मजबूत कर रहा था। वह पाकिस्तानी एजेंसियों के भी बहुत करीब था। पाकिस्तानी एजेेंसियों ने उसे कथित तार पर अनुमति दे रखी थी कि वह कश्मीर में अपना आधार और नेटवर्क मजबूत बनाने के लिए भारत की पाकिस्तान के खिलाफ दिखावटी मदद करे और धीरे-धीरे कश्मीर के हालात को रणनीतिक रूप से पाकिस्तान के पक्ष में बनाए।

एनआइए भी पेश कर चुकी आरोपपत्र

सीआइके ने वहीद परा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमा चलाने की अनुमति जम्मू कश्मीर गृह विभाग से प्राप्त की है। सीआइके ने बीते साल ही उसके खिलाफ कुछ अज्ञात राजनीतिकों के खिलाफ आतंकियों की मदद करने का मामला दर्ज किया था। उसके खिलाफ इसी साल मार्च में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी आरोपपत्र दायर किया है, जिसमें बताया गया कि उसनेे पांच करोड़ रुपये कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंतोश को दिए थे। यह रकम जुलाई 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन जारी रखने के लिए दी गई थी।

हिजबुल और लश्कर से सांठगांठ

बीते साल नवंबर में गिरफ्तार किए गए वहीद परा की आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के कई आतंकियों के साथ सांठगाठ थी। इसी साल जनवरी में वह एनआइए की अदालत से जमानत पर रिहा हुआ था, लेकिन जम्मू कश्मीर पुलिस के सीआइके विंग ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया था। तभी से वह जेल में बंद है। परा जमानत के लिए कई बार याचिका लगा चुका है। 

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.