जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के साथ बैठक की तैयारी में केंद्र, PM Modi भी हो सकते हैं शामिल

जम्मू कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया को पूरी तरह बहाल करने के मिशन में जुटे सूत्रों के मुताबिक पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन और जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के चेयरमैन अल्ताफ बुखारी भी इस सिलसिले में केंद्र के साथ लगातार संपर्क में हैं।

Rahul SharmaSat, 12 Jun 2021 08:37 AM (IST)
केंद्र सरकार ने भाजपा, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी व अन्य दलों के जरिए गतिरोध को दूर करने का प्रयास किया है।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के दिल्ली दौरे के बाद प्रदेश में तेज हुई सियासी गतिविधियों के बीच केंद्र सरकार की जल्द ही जम्मू कश्मीर में मुख्यधारा के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बैठक हो सकती है। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी समेत कश्मीरी घाटी में आधार रखने वाले मुख्यधारा के कई अन्य दलों के नेताओं के बीच पर्दे के पीछे इस मुद्दे पर लगातार संवाद बना हुआ है। हालांकि इस बैठक को लेकर कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन परिस्थितियों के अनुकूल रहने पर यह इसी माह के अंत तक हो सकती है। यह बैठक सर्वदलीय होगी और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। इस बैठक के बाद ही जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान करने और विधानसभा चुनाव जैसे अहम मुद्दों पर फैसला होगा।

नेकां, पीडीपी, माकपा, अवामी नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स कांफ्रेस समेत अन्य मुख्यधारा के राजनीतिक दल जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। यह पांच अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति की बहाली की मांग कर रहे हैं और इसके लिए इन्होंने पीपुल्स एलांयस फार गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) बना रखा है। इन दलों की राजनीतिक गतिविधियों पर भी किसी हद तक कानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर अंकुश है। इससे जम्मू कश्मीर में एक तरह से राजनीतिक गतिरोध और शून्य जैसी स्थिति है। हालांकि केंद्र सरकार ने भाजपा, जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी व अन्य कुछ दलों के जरिए इस गतिरोध को दूर करने का प्रयास किया है। दोनों पक्षों को समझ आ चुका है कि टकराव न सिर्फ दोनों के लिए बल्कि जम्मू कश्मीर में हुए बदलाव के लिए भी नकारात्मक साबित होगा।

जम्मू कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया को पूरी तरह बहाल करने के मिशन में जुटे सूत्रों के मुताबिक, पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन और जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के चेयरमैन अल्ताफ बुखारी भी इस सिलसिले में केंद्र के साथ लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला भी दिल्ली दौरे पर हैं। उन्होंने बताया कि डा. फारूक अब्दुल्ला ने करीब एक पखवाड़ा पहले यूं ही परिसीमन की प्रक्रिया में शामिल होने का संकेत नहीं दिया है। पीएजीडी की दो दिन पहले श्रीनगर में हुई बैठक और उसके बाद डा. फारूक अब्दुल्ला का केंद्र के साथ बातचीत के लिए तैयार रहने का एलान करना भी इसी सिलसिले की एक कड़ी समझा जाना चाहिए। आज भी पीडीपी के प्रमुख प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने जम्मू कश्मीर में संवैधानिक बदलाव के खिलाफ कोई बात करने के बजाय परिसीमन की प्रक्रिया से खुद का अलग रखने की बात की है।

परिसीमन आयोग को जल्द काम पूरा करने का निर्देश : इस बीच, केंद्र सरकार ने भी परिसीमन आयोग को अपना काम जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। परिसीमन आयोग का गठन जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत फरवरी 2020 में जस्टिस सेवानिवृत्त रंजना देसाई की अध्यक्षता में किया गया था। परिसीमन आयोग भी जल्द जम्मू कश्मीर का दौरा कर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से परिसीमन के मुद्दे पर बातचीत करेगा।

बैठक में इन मुद्दों पर हो सकती है बात : सूत्रों ने बताया कि बैठक में नेकां, पीडीपी, माकपा, पीपुल्स कांफ्रेंस व अन्य राजनीतिक दल वादी में निॢवघ्न राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति के साथ अपने नेताओं की पर्याप्त सुरक्षा जैसा मुद्दा उठाएंगे। जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना, जम्मू कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराया जाना और राजनीतिक लोगों की रिहाई जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी।

क्या हैं बैठक की सफलता के मायने : बैठक में सबकुछ अनुकूल रहा तो इससे न सिर्फ जम्मू कश्मीर में हालात को पूरी तरह सामान्य बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के दुष्प्रचार को भी नाकाम किया जा सकेगा। इसके अलावा केंद्र सरकार इस बातचीत की सफलता के जरिए यह संदेश देने में कामयाब रहेगी कि कश्मीर में हरेक के लिए पांच अगस्त 2019 का बदलाव पूरी तरह स्वीकार्य है। 

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