Jammu: शाहतूश शाल के अवैध कारोबियों के ठिकानों पर सीबीआइ के छापे, 4 शाल-आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद

कस्टम विभाग की शिकायत पर श्रीनगर और दिल्ली स्थित दो निजी फर्माें और श्रीनगर स्थित एक प्राईवेट फर्म के मालिक के खिलाफ दो अलग अलग मामले दर्ज किए गए हैं। कस्टम विभाग ने शिकायत की है कि यह लोग शाहतूश के 32 शालों के अवैेध निर्यात में शामिल हैं।

Rahul SharmaFri, 30 Jul 2021 07:56 AM (IST)
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत शाहतूश शाल के निर्यात प्रतिबंधित है।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो: केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआइ ने वीरवार को दिल्ली और श्रीनगर में प्रतिबंधित शाहतूश शाल की अवैध निर्यात में शामिल तीन कारोबारियों के ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान चार शाल व कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

आपको जानकारी हो कि शाहतूश को सबसे गर्म शॉल माना जाता है और यह लद्दाख के साथ लगती तिब्बत की सीमा पर पाए जाने वाले लुप्तप्राय: प्रजाति के हिरण, जिसे चिरु कहते हैं, की फर से तैयार किया जाता है। कुछ लोगों का दावा है कि शाहतूश शाल को तैयार करने के लिए चिरु को मारना पड़ता है, जबकि कई अन्य लोग दावा करते हैं कि चिरु अक्सर कुछ झाडिय़ों के साथ अपने शरीर को रगड़ता है तो उसके बाल झाड़ी पर जमा हो जाते हैं।

उन्हेंं ही ऊन तैयार कर शाल बुना जाता है। देश में चिरु के शिकार और शाहतूश शाल पर पाबंदी है। जम्मू कश्मीर में चिरु के शिकार पर तीन साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा का प्रावधान है। चिरु अक्सर मई से जुलाई तक लद्दाख में रहता है और उसके बाद तिब्बत के पहाड़ों में चले जाते हैं।

सीबीआइ के प्रवक्ता ने कस्टम विभाग की शिकायत पर श्रीनगर और दिल्ली स्थित दो निजी फर्माें और श्रीनगर स्थित एक प्राईवेट फर्म के मालिक के खिलाफ दो अलग अलग मामले दर्ज किए गए हैं। कस्टम विभाग ने शिकायत की है कि यह लोग शाहतूश के 32 शालों के अवैेध निर्यात में शामिल हैं। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत शाहतूश शाल के निर्यात प्रतिबंधित है।

हालांकि सीबीआइ प्रवक्ता ने आरोपित फर्माें और व्यक्ति विशेष के नाम का उल्लेख नहीं किया है,लेकिन यह जरूर बताया है कि श्रीनगर और दिल्ली स्थित इनके ठिकानों से चार शॉल व कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले हैं। फिलहाल,मामले की जांच जारी है।

एक शाल की कीमत कम से कम दो लाख रुपये है : कारोबारी

इस बीच, श्रीनगर स्थित शाहतूश शाल के पुराने कारोबारी ने बताया कि अब गिने चुने चंद बड़े व्यापारियों के पास ही शाहतूश का शाल होगा। एक शाहतूश शाल की कीमत कम से कम दो लाख रुपये होगी। उन्होंने बताया कि  करीब 14 साल पहले वन्य जीव विभाग ने सभी कारोबारियों और लोगों से संपर्क किया था, जिनके पास शाहतूश के शाल थे। मेरी जानकारी के मुताबिक, उस समय करीब 953 शाल पर ही माइक्रोचिप लगाई गई थी। इन पर शाल का पंजीकरण, कोड और शाल के आकार के बारे में पूरी जानकारी होती है। जिन शाल पर माइक्रोचिप लगाई गई है,उन्हीं को वैध माना जाता है और उनका ही कारोबार हो सकता है,लेकिन देेश के बाहर नही। 

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