कश्मीरी सिल्क के दीवानों के लिए सज गई मंडी; बंगाल, पंजाब व बनारस से ककून खरीदने पहुंच रहे खरीदार

जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर ऑक्शन मार्केट खोली है जहां किसान अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं। मौजूदा समय में ऊधमपुर में यह खरीद हो रही है। 26 जुलाई तक यहां खरीद करने के बाद संभाग के दूसरे जिलों में भी इसी तरह की मंडी लगाकर खरीद की जाएगी।

Rahul SharmaWed, 21 Jul 2021 02:04 PM (IST)
किसान स्वयं अपनी फसल का मूल्य आंक कर बोली लगाता है।

जम्मू, ललित कुमार: कश्मीरी सिल्क के दीवानों के लिए जम्मू संभाग में एक बार फिर से ककून की मंडी सज चुकी है। दुनिया भर में अपने मखमली रेशम के लिए मशहूर जम्मू-कश्मीर के ककून की देश भर में अच्छी-खासी मांग रहती है और इस मांग को पूरा करने के लिए प्रदेश में हर साल एक लाख किलो से अधिक ककून की पैदावार होती है।

कश्मीर के अलावा जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों में भी ककून की अच्छी-खासी पैदावार होती है लेकिन इन किसानों को ककून के अच्छे दाम नहीं मिल पाते थे और बिचौलिएं किसानों से सस्ते दामों पर ककून खरीदकर मोटी कमाई पर दूसरे राज्यों में बेचते थे। किसानों को उनकी पैदावार के उचित दाम दिलाने व खरीदार तक जम्मू-कश्मीर का वास्तविक ककून पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने पिछले साल से विशेष मंडियां लगाकर किसानाें को बाजार उपलब्ध करवाने का फैसला लिया। इस फैसले से किसानों को तो लाभ मिल ही रहा है, खरीदारों को भी बिना मिलावट जम्मू-कश्मीर का उच्चतम क्वालिटी का ककून उपलब्ध हो रहा है।

मौजूदा समय में सेरीकल्चर विभाग ने जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रीज(जेकेआई) के साथ मिलकर ऑक्शन मार्केट खोली है जहां किसान अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं। मौजूदा समय में ऊधमपुर में यह खरीद हो रही है। 26 जुलाई तक यहां खरीद करने के बाद संभाग के दूसरे जिलों में भी इसी तरह की मंडी लगाकर खरीद की जाएगी। यहां रेशमी कीड़ों की गुणवत्ता के आधार पर इनके दाम तय होते हैं और किसान स्वयं अपनी फसल का मूल्य आंक कर बोली लगाता है।

इन किसानों को जहां पहले एक किलो रेशमी कीड़ों का 500 से 600 रुपये दाम मिलता था, वहीं अब इन्हें न्यूनतम 975 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण बाहरी राज्यों से खरीदार नहीं पहुंच पाए थे लेकिन इस बार देश के विभिन्न हिस्सों से कई खरीदार यहां ककून की खरीदारी करने पहुंचे है जिससे किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं।

जम्मू में सिल्क फैक्टरी शुरू होने से भी बढ़ी मांग: जम्मू-कश्मीर में हजारों किसान सालों से रेशमी कीड़ों की खेती करते आ रहे हैं लेकिन प्रदेश में इनकी मांग न होने के कारण आज तक इन किसानों को इनकी मेहनत का उचित दाम नहीं मिलता था। ये किसान छोटे-मोटे खरीदारों को ही अपनी फसल बेच देते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने जम्मू के बड़ी ब्राह्मणा में दशकों पहले बंद हो चुकी सिल्क फैक्टरी में सिल्क उत्पादन दोबारा शुरू किया है जिसके लिए स्थानीय किसानों से रेशमी कीड़ों की खरीद की जा रही है। इस सिल्क फैक्टरी के शुरू होने से इन हजारों किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिलने लगा है। किसानों को उचित दाम मिले और कोई बिचौलियां न हो, इसके लिए सरकार मंडियों में बोली लगाकर स्वयं भी इन किसानों से रेशमी कीड़ों की खरीद कर रही है। विभाग ने जम्मू संभाग के किसानों से करीब 60 हजार किलो रेशमी कीड़े खरीदने का लक्ष्य रखा है और कश्मीर संभाग के किसानों से 50 हजार किलो रेशमी कीड़े खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

प्रतिदिन 30-35 किसान ले रहे बोली में हिस्सा: कोविड-19 के बीच एसओपी का पालन करते हुए जेकेआई प्रतिदिन किसी एक क्षेत्र के किसानों को ही इस बोली में आमंत्रित कर रहा है। नियमों का पूरी तरह से पालन हो, इसके लिए जेकेआई कार्यालय में किसानों को अपनी फसल के साथ आवश्यक दूरी पर बिठाया जा रहा है। प्रतिदिन जेकेआई कार्यालय में 30-35 किसानों को ही बुलाया जा रहा है। जेकेआई विशेषज्ञ स्वयं हर किसान की फसल की गुणवत्ता देखकर दाम तय करते है।

ऊधमपुर जिले में होता है सबसे अधिक उत्पादन: जम्मू संभाग में करीब बीस हजार किसान इससे जुड़े है। रेशमी कीड़ों का सबसे अधिक उत्पादन ऊधमपुर जिले में होता है। जिले के लर गांव में हर घर रेशमी कीड़ों की खेती करता है। यहां अधिकतर महिलाएं इस काम में जुड़ी है। पहले ये लोग ऊधमपुर मंडी में जाकर अपनी फसल बेचते थे लेकिन अब इन परिवारों को मंडी उपलब्ध हो गई है जिससे क्षेत्र में इस खेती को और बढ़ावा मिलेगा। ऊधमपुर के बाद राजौरी जिले में रेशमी कीड़ों का सबसे अधिक उत्पादन होता है।

पहले बंगाल व अन्य राज्यों के खरीदार बिचौलियों की मदद से इन किसानों से रेशमी कीड़े खरीद लेते थे। इससे इन्हें उचित दाम नहीं मिलता था। किसान ठगे जाते थे। इसलिए सरकार ने इनकी सहायता के लिए आगे आने का फैसला लिया। अब चूंकि हमारे पास जम्मू में सिल्क फैक्टरी भी है, लिहाजा किसानों से रेशमी कीड़े खरीद कर वहां उत्पादन किया जाता है। फिलहाल हम ऊधमपुर में खरीद कर रहे हैं। 26 जुलाई के बाद राजौरी में पंद्रह दिन के लिए खरीद मंडी लगाई जाएगी। इसी तरह अन्य जिलों में जाकर भी किसानों को अच्छे दाम देकर खरीद की जाएगी।  -संजय हांडू, मैनेजिंग डायरेक्टर जेकेआई 

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