Sanskarshala Jammu : स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को जानने से पहले स्वाधीनता सेनानियाें को जानना जरूरी

अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को आदर्श पुरुषों बारे बताएं। उन्हें भगवान राम के जीवन से परिचित करवाएं। आदर्श पुरुष का उनसे बड़ा कोई उदाहरण हो ही नहीं सकता। इस समय गणेशोत्सव चल रहा है। उन्हें बताएं कि भगवान गणेश उनके जीवन में शुभमंगल लेकर आते हैं।

Lokesh Chandra MishraFri, 17 Sep 2021 04:28 PM (IST)
हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने किन कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। वे कुरीतियां अगर आज भी हमारे समाज में हैं

जम्मू, जागरण संवाददाता : दैनिक जागरण संस्कारशाला फेसबुक लाइव में गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, भाैर कैंप में संस्कृत के अध्यापक डा. विनोद कुमार शास्त्री पाठकों से रुबरू हुए। उन्होंने अपने संबोधन में पाठकों से अपील कि वे समाज में फैली कुरीतियों को भगाने के लिए आगे आएं और स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों का पालन करें।

डा. शास्त्री ने कहा कि आजादी का मतलब यह कतई नहीं है कि हम अपनी मनमर्जी से कुछ भी करें। आजादी का मतलब है सबको बराबरी के अधिकार मिलें। किसी के साथ भेदभाव न हो और हर किसी को आगे बढ़ने का मौका मिले। फिर वह चाहे छोटा हो या बड़ा। उन्होंने कहाकि कोरोना के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। घरों में ज्यादा समय बिताने के चलते बच्चों में चिड़चिड़ापन पैदा हो गया था। इसका कारण बच्चों पर अभिभावकों की अधिक रोकथाम थी। हमने स्कूल में अभिभावकों को बुलाकर जब बात की तो पता चला कि बच्चे समझते हैं कि वह घरों में कैद हो गए हैं। हम बाहर नहीं जा सकते और घर में माता-पिता अपनी मर्जी से कुछ करने नहीं देते।

हमने अभिभावकों को समझाया कि वे बच्चों का टाइम टेबल बनाएं। उन्हें उनके लिए समय दें। उनको पढ़ाई के अलावा भी कुछ करने। जिन अभिभावकों ने यह सलाह मानी, उनके बच्चों में काफी बदलाव देखने को मिला। वहीं डा. विनोद शास्त्री ने अपने देश की संस्कृति व राष्ट्रीय पर्वों के महत्व को समझाते हुए कहाकि वे भी हमारे बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करते हैं। बच्चों में उत्साह पैदा करते हैं।

आदर्श पुरुषों बारे बताएं बच्चों को : अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को आदर्श पुरुषों बारे बताएं। उन्हें भगवान राम के जीवन से परिचित करवाएं। आदर्श पुरुष का उनसे बड़ा कोई उदाहरण हो ही नहीं सकता। इस समय गणेशोत्सव चल रहा है। उन्हें बताएं कि भगवान गणेश उनके जीवन में शुभमंगल लेकर आते हैं। इसके बाद पितृपक्ष आएंगे। उन्हें बताएं कि पितृपक्ष का हमारे जीवन में क्या महत्व हैं। नवरात्र क्यों मनाते हैं और किन देवियों की इस दौरान पूजा होती है। डा. विनोद ने देश की स्वाधीनता के लिए अपने जीवन न्यौछावर करने वाले स्वाधीनता सेनानियों को भी महापुरुष बताते हुए कहा कि स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को उनके बारे में बताए। उनकी पेंटिंग बच्चों से बनवाए ताकि वे उन्हें अच्छे से जान सकें। हमें आजादी कैसे मिली है, इस बारे वे समझ सकें।

उन्होंने कहा कि स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को स्वाधीनता सेनानियों को जाने बिना नहीं समझा जा सकता। उन्हें बताए कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने किन कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। वे कुरीतियां अगर आज भी हमारे समाज में हैं तो उन्हें कैसे खत्म करें। उन्होंने जलियांवाला बाग को नया रूप दिए जाने पर कहा कि इससे युवा पीढ़ी को जानने का मौका मिला है कि वहां क्या हुआ था। आज के बच्चे मोबाइल पर ज्यादा समय बिताते हैं। उन्हें कुछ नया तभी पता चलेगा जब उनके मोबाइल में वह नजर आएगा। इसलिए अभिभावकों व शिक्षकों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है कि वे बच्चों को कैसे जानकारी दें। उन्होंने बच्चों को खेलकूद के प्रति भी प्रेरित करने की सलाह अभिभावकों को दी।

 

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