ASHA Workers Jammu : मासिक भत्ता बढ़ाने समेत अन्य लाभ दिए जाने की मांग को लेकर आशा वर्कर्स ने किया प्रदर्शन

तारीगामी ने कहा कि कोरोना महामारी की पहली व दूसरी लहर में आशा वर्कर्स से कोरोना वारियर्स के रूप में काम किया और कई आशा वर्कर्स ड्यूटी के दौरान कोविड-19 की चपेट में आकर मर भी गई लेकिन सरकार की ओर से उन्हें कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।

Rahul SharmaFri, 24 Sep 2021 01:05 PM (IST)
अपनी जान जोखिम में डाली लेकिन सरकार उनकी सेवाओं का सम्मान नहीं कर रही।

जम्मू, जागरण संवाददाता : आशा वर्कर्स का मासिक भत्ता बढ़ाने समेत अन्य लाभ दिए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को सेंट्रल ट्रेड यूनियंस व आशा वर्कर्स ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। सीटू की प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष एमवाई तारीगामी की अगुआई में हुए इस प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। सरकार पर आशा वर्कर्स की सेवाओं को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए इन वर्कर्स ने कहा कि वह दिन रात काम कर रही है लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का उचित मेहनताना नहीं दिया जा रहा।

आशा वर्कर्स का मासिक भत्ता दो हजार रुपये से बढ़ाकर 21 हजार रुपये करने, हर साल भत्ते में एक हजार रुपये की वृद्धि करने, कोविड-19 वैक्सीनेशन में ड्यूटी देने वालों को प्रति दिन 300 रुपये अतिरिक्त भत्ता देने, कोविड-19 प्रबंधन में ड्यूटी देने वालों को 500 रुपये प्रति दिन अतिरिक्त भत्ता देने, कोविड-19 की चपेट में आकर जान गवाने वालों के आश्रितों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने, 50 लाख रुपये का बीमा करवाने तथा पेंशन समेत अन्य लाभ देने की मांग को लेकर इन आशा वर्कर्स ने प्रदर्शनी मैदान के बाहर नारेबाजी की।

तारीगामी ने इस मौके पर कहा कि कोरोना महामारी की पहली व दूसरी लहर में आशा वर्कर्स से कोरोना वारियर्स के रूप में काम किया और कई आशा वर्कर्स ड्यूटी के दौरान कोविड-19 की चपेट में आकर मर भी गई लेकिन सरकार की ओर से उन्हें कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।

आशा वर्कर्स यूनियन की सचिव अनिता राजपूत ने कहा कि विगत सरकारों द्वारा उनकी जायज मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। अनिता राजपूत ने कहा कि आशा वर्कर्स ने कोरोना की पहली व दूसरी लहर में निस्वार्थ भाव से काम किया। अपनी जान जोखिम में डाली लेकिन सरकार उनकी सेवाओं का सम्मान नहीं कर रही।

अनिता राजपूत ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्यों में आशा वर्कर्स को दस हजार रुपये मासिक भत्ता मिल रहा है लेकिन केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उन्हें मात्र दो हजार रुपये मासिक भत्ता दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स बिना छुट्टी 8-9 घंटे काम कर रही है लेकिन न तो उन्हें पेंशन लाभ है, न पीएफ और न ईएसआई। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होगी, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

प्रदर्शन के दौरान सीटू के प्रदेश महासचिव ओम प्रकाश, उपाध्यक्ष मुजफ्फर वानी, सचिव जिया लाल परिहार, जगदीश शर्मा के अलावा आशा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। 

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