Natrang National Talk Show: कलाकार विक्रांत शर्मा बोले- समस्याओं को लेकर न आएं, समाधान की तलाश करें

संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार विजेता सहज प्रवृत्ति के आशावादी कलाकार जम्मू के विक्रांत शर्मा ने नटरंग नेशनल टॉक शो में कहा कि कि रंगमंच में ही नहीं जीवन में भी हमें समस्याएं बताने के बजाए समस्याओं के समाधान के साथ आगे आना चाहिए।

Vikas AbrolWed, 21 Jul 2021 08:33 PM (IST)
विक्रांत स्वयं भी समस्याओं को बताने के बजाय समाधान खोजने में विश्वास करते हैं।

जम्मू, जागरण संवाददाता : संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार विजेता सहज प्रवृत्ति के आशावादी कलाकार जम्मू के विक्रांत शर्मा ने नटरंग नेशनल टॉक शो में कहा कि कि रंगमंच में ही नहीं जीवन में भी हमें समस्याएं बताने के बजाए समस्याओं के समाधान के साथ आगे आना चाहिए। रंगकर्मी को मार्ग दर्शक की तरह पेश आना होगा। तभी लोगों का रंगमंच में विश्वास बना रहेगा। आज के युग में कोसने वाले हर जगह मिल जाएंगे लेकिन जरूरत समाधान बताने वालों की है।

विक्रांत स्वयं भी समस्याओं को बताने के बजाय समाधान खोजने में विश्वास करते हैं। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता अभिनेता अनिल टिक्कू के साथ बातचीत में विक्रांत ने रंगमंच से जुडे़ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे वह रंगमंच से जुडे़ और बलवंत ठाकुर के निर्देशन में नाटक ‘मेरे हिस्से की धूप कहां है’ का मंचन करने के बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तब से रंगमंच उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने नटरंग और उनके सहयोगियों के प्रति अपने व्यक्तित्व को समृद्ध करने और अपार प्रदर्शन प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने विभिन्न नाटकों में काम करने के अपने अनुभवों को भी साझा किया और दिलचस्प रूप से एक था गधा में अभिनय के अपने दृष्टिकोण को अलग किया।नाटक घुमाईं में उनकी भूमिका को देश भर में हर जगह विशेष सराहना मिली।नाममात्र संवाद होने के बावजूद पूरा नाटक उन पर आधारित था। यह खूबसूरती से इस बात का उदाहरण है कि किसी नाटक में आगे बढ़ने के लिए अधिक संवादों की आवश्यकता नहीं होती है। पंक्तियों की अधिक समझ की आवश्यकता होती है। विक्रांत भी थिएटर के बीच संतुलन बनाए रखने में विश्वास करते हैं जो केवल आत्म-संतुष्टि के लिए किया जाता है और उस तरह के थिएटर का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना है। चूंकि थिएटर के अलावा एक अभिनेता के लिए टीवी, फिल्म, ओटीटी आदि जैसे कई अन्य मंच उपलब्ध हैं। विक्रांत इसे थिएटर कलाकारों के लिए खतरे के बजाय अवसर के रूप में मानते हैं।

नटरंग निदेशक पदमश्री बलवंत ठाकुर ने विक्रांत का स्वागत करते हुए परिचय करवाते हुए बताया कि

विक्रांत शर्मा 1992 से प्रख्यात थिएटर ग्रुप नटरंग से जुड़े एक समर्पित थिएटर अभिनेता और प्रशिक्षक हैं।उन्हें उनके उत्कृष्ट चरित्र के लिए जाना जाता है।उनके साथ डोगरी नाटक घुमाईं रूस और जर्मनी में किया। जहां उन्हें नाटक देखने वालों ने खडे़ होकर उनकी सराहना की।कंजूस, फंदी, काॅमेडी ऑफ टेरर्स, मेरे हिस्से की धूप कहां है, महाभोज, होली, बगिया बंछा राम की, लेखक, सुनो एह् कहानी, चरण दास चोर आदि 70 के करीब नाटकों के भारत और विदेशों में 1000 से अधिक शो किए हैं।

उन्हें संगीत नाटक अकादमी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, आईसीसीआर, नंदीकर, इप्टा, नेहरू केंद्र मुंबई, एनजेडसीसी, भारत भवन, भोपाल आदि जैसे प्रतिष्ठित संगठनों द्वारा आयोजित 80 से अधिक राष्ट्रीय रंगमंच समारोहों में भाग लेने का श्रेय है। संस्कृति मंत्रालय की छात्रवृत्ति धारक, विक्रांत वर्ष 2000 में ज़ी टीवी के क्लोज-अप अंताक्षरी के फाइनलिस्ट में से थे और बाद में कुछ बॉलीवुड फिल्मों जैसे अपहरण, और उड़ान में अभिनय किया और प्रकाश झा, उज्ज्वल चटर्जी और पार्वती बाल गोप्लान जैसे प्रसिद्ध निर्देशकों के मार्गदर्शन में काम किया। 

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