Durga Navmi In Kashmir : दुर्गानवमी पर घाटी के मंदिरों में कश्मीर पंडितों ने की विशेष पूजा, नहीं दिखा आतंकियों का खौफ

Kashmiri Pandits के संगठन कश्मीर संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कहा कि जल्द ही श्रीनगर के गणपतियार इलाके में स्थित गणेश मंदिर में विशाल हवन का आयोजन किया जाएगा जिसमें हमने घाटी में रह रहे अपने समुदाय के तमाम लोगों को हिस्सा लेने को कहा है।

Rahul SharmaThu, 14 Oct 2021 02:01 PM (IST)
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी उसी तरह साथ दिया जैसे कि वे पहले दिया करते थे।

श्रीनगर, राहुल शर्मा : कश्मीर में आतंकियों ने बेशक पिछले कुछ सप्ताह में चुन-चुनकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगोें को निशाना बनाकर उनमें भय पैदा करने का प्रयास किया हो लेकिन उनकी यह साजिश सफल होती नहीं दिख रही। दुर्गानवमी पर जिस तरह से वादी के मंदिरों में की गई विशेष पूजा में कश्मीरी पंडितों के साथ अन्य समुदाय के लोग शामिल हुए उससे यह साफ है कि न तो उनमें आतंकियों का कोई खौफ है और न ही सांप्रदायिक सौहार्द पर कोई फर्क पड़ा है।

कश्मीरी पंडित समुदाय भले ही घाटी से विस्थापित होकर देश-विदेश में रह रहे हों परंतु वे आज भी आपनी परंपरा और रीति-रिवाजों को उसी तरह मनाते हैं, जैसा की वे घाटी में रहते हुए निभाते थे। यही वजह है कि हर साल की तरह इस बार भी कश्मीरी पंडितों ने सोनवार इलाके में स्थित दुर्गा मंदिर में महानवमी पर विशेष पूजा की। खुशी की बात यह है कि इस पूजा के आयोजन में वहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी उसी तरह साथ दिया जैसे कि वे पहले दिया करते थे।

यह नजारा व अवसर घाटी में समुदायों में दरार कायम करने का प्रयास करने वाले आतंकी संगठनों के मुंह पर तमाचे के समान है। कश्मीरी पंडित भाइयों की पारंपरिक पूजा के आयोजन में पूरा साथ देकर वहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी यह स्पष्ट कर दिया कि वादी में रह रहे हिन्दू उनके भाई हैं और कश्मीर का हिस्सा हैं। मंदिर के प्रबंधक मक्खन लाल कौल ने बताया कि घाटी में जब से आतंकवादियों ने अल्पसंख्याकाें की हत्या की है, उसी दौरान से तनाव जैसी स्थिति है। ये पूजा जो आज हो रही है, दरअसल 12 अक्टूबर को की जानी थी। पंडित समुदाय इसे निर्धारित समय पर ही करना चाहता था परंतु प्रशासन ने हालात का हवाला देते हुए इसे दो दिन तक टालने के लिए कहा।

दो दिन बाद ही सही परंतु समुदाय में इस बात को लेकर खुशी है कि उन्होंने अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा मंदिर में विशेष पूजा की। उन्होंने कहा कि हालात की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना कम रही परंतु मंदिरों में पूजा की परंपरा को कायम रख और इसमें शामिल होकर कश्मीरी पंडितों ने यह जाहिर कर दिया है कि कश्मीर उनका भी है। यहां रहने वाले मुस्लमान भाइयों ने भी इसमें पूरा सहयोग दिया।

वहीं उड़ीसा से आए रामपाल कपूर ने कहा कि वह और उनका परिवार पिछले नौ वर्षों से हर साल दुर्गानवमी की पूजा करने के लिए यहां आते हैं। हमने यहां कभी भी असुरक्षित महसूस नहीं किया। पूजा में शामिल होने के लिए विशेष तौर पर आए पंडित समुदाय के लोगों ने प्रशासन से अपील की कि अब घाटी में हत्याओं का सिलसिला रूकना चाहिए। वह अपने पूर्वजों की इस भूमि को बहुत याद करते हैं। यहां ऐसा माहौल बनाएं कि सभी समुदायों के लोग शांति और सद्भाव से रहें। 

अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे डर : कश्मीरी पंडितों के संगठन कश्मीर संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कहा कि जल्द ही श्रीनगर के गणपतियार इलाके में स्थित गणेश मंदिर में विशाल हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हमने घाटी में रह रहे अपने समुदाय के तमाम लोगों को हिस्सा लेने को कहा है। टिक्कू ने कहा कि हवन का मकसद माहौल बिगाड़ने की साजिशों को नाकाम बनना है। साथ ही संदेश देना है कि परिस्थितियां कैसी भी हो, हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कायम रहेगा। कुछ भी हो जाए, हम डर को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे। इसके लिए जरूरी है कि हम पहले की तरह अपने रीति रिवाज मनाएं। उन्होंने कहा कि हवन की तिथि अभी तय नहीं है, लेकिन हम इसे नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित करने की कोशिश करेंगे।

सादगी से मनाया जाएगा दशहरा : कश्मीर में इस वर्ष भी दशहरा सादगी से मनाया जाएगा। पहले हर वर्ष यहां एक विशाल समारोह आयोजित किया जाता था, जिसमें रावण दहन किया जाता था। वर्ष 2018 में भी दशहरा श्रीनगर के टीआरसी ग्राउंड में आयोजित हुआ था। वर्ष 2019 में अनुच्छेद हटाए जाने और वर्ष 2020 में कोविड महामारी के कारण यह समारोह नहीं हो पाया था।

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