स्पेशल ट्रिब्यूनल से निर्मल सिंह को सात दिन की अतिरिक्त राहत

कथित तौर पर अवैध निर्माण के मामले में जम्मू कश्मीर स्पेशल ट्रिब्यूनल से पूर्व मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह को सात दिन की अतिरिक्त राहत मिल गई है। दरअसल इस मामले में जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) अपना पक्ष ही नहीं रख पाया। इसके बाद स्टे आर्डर 14 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया।

JagranWed, 08 Dec 2021 05:26 AM (IST)
स्पेशल ट्रिब्यूनल से निर्मल सिंह को सात दिन की अतिरिक्त राहत

जेएनएफ, जम्मू: कथित तौर पर अवैध निर्माण के मामले में जम्मू कश्मीर स्पेशल ट्रिब्यूनल से पूर्व मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह को सात दिन की अतिरिक्त राहत मिल गई है। दरअसल, इस मामले में जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) अपना पक्ष ही नहीं रख पाया। इसके बाद स्टे आर्डर 14 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया। इसके साथ ही अगली सुनवाई में जेडीए को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिया गया है। निर्मल सिंह ने जेडीए के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें कथित अवैध निर्माण तोड़ने का निर्देश दिया गया है। जेडीए ने आठ नवंबर को नोटिस जारी कर निर्मल सिंह से कहा गया था कि वह नगरोटा में किया गया अवैध निर्माण गिरा दें। ऐसा न होने पर जेडीए खुद इसे तोड़ देगा। इसका खर्च भी निर्मल सिंह को देना पड़ेगा। इस पर ट्रिब्यूनल ने 12 नवंबर को सुनवाई में सात दिसंबर तक स्टे लगा दिया था। इस बीच एडवोकेट मुजफ्फर अली शाह ने ट्रिब्यूनल में याचिका देकर उन्हें भी सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि जेडीए ने डा. निर्मल सिंह से हाथ मिला लिया है और इसलिए जेडीए ने अपना पक्ष नहीं रखा है। गौरतलब है कि नगरोटा में डा. निर्मल सिंह का बंगला उनकी पत्नी ममता सिंह के नाम पर है। लिहाजा, ममता सिंह के माध्यम से ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की गई थी। याचिका में दलील दी गई कि याची का नगरोटा के बन गांव के खसरा नंबर 441 में चार कनाल का रिहायशी प्लाट था जो उन्होंने 20 मई 2014 को खरीदा था। उन्होंने प्लाट की सेल-डीड भी ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र किसी भी विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में नहीं आता और 2017 की शुरुआत तक याची ने यहां बंगले का निर्माण पूरा कर लिया था। उन्होंने कहा कि याची अपने परिवार के साथ 2017 से उस घर में रह रही थी और तब किसी ने निर्माण पर किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं की। उन्होंने कहा कि तीन मार्च 2017 को जम्मू मास्टर प्लान 2032 की अधिसूचना जारी हुई जिसके तहत 103 गांव जेडीए के अधीन लाए गए। इनमें बन गांव भी एक था। अब चार साल बाद जेडीए ने इस निर्माण को अवैध करार देते हुए नोटिस जारी किया है।

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