Union Territory Ladakh: पनबिजली परियोजना से रोशन हुए सियाचिन के 19 गांव, चामशेन पनबिजली परियोजना का सेना को भी मिलेगा लाभ

सियाचिन क्षेत्र में 450 केवी की चामशेन लघु पनबिजली परियोजना शुरू हो गई है। इस परियोजना से ही इन 19 गांवों में बिजली पहुंचाई गई है। इस बिजली परियोजना से सियाचिन में पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा की सुरक्षा में तैनात सेना के जवानों को भी बिजली मिलेगी।

Rahul SharmaSat, 19 Jun 2021 09:52 AM (IST)
हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली बसें व ई-रिक्शा चलाने की दिशा में भी काम चल रहा है।

जम्मू, राज्य ब्यूरो : विश्व के सबसे ऊंचे एवं ठंडे युद्ध क्षेत्र सियाचिन इलाके के 19 गांवों की डीजल पर निर्भरता खत्म हो गई है। इन गांवों में अब पावर ग्रिड से जोड़ दिया गया है। ट्रांसमिशन लाइन से बिजली की आपूर्ति होने से इन गांवों में विकास की नई बहार आने की उम्मीद जग गई है। सियाचिन में तैनात सेना के जवानों को भी इस सुविधा का लाभ मिलेगा।

दरअसल, सियाचिन क्षेत्र में 450 केवी की चामशेन लघु पनबिजली परियोजना शुरू हो गई है। इस परियोजना से ही इन 19 गांवों में बिजली पहुंचाई गई है। इस बिजली परियोजना से सियाचिन में पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा की सुरक्षा में तैनात सेना के जवानों को भी बिजली मिलेगी। चामशेन परियोजना को अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने लद्दाख अक्षय ऊर्जा मुहिम के तहत बनाया है। लद्दाख बिजली विभाग की सचिव रविंद्र कुमार का कहना है कि सियाचिन क्षेत्र के 19 गांवों में बिजली के लिए अब तीन डीजल जेनरेटर इस्तेमाल नहीं होंगे, क्योंकि इन गांवों में ग्रिड से बिजली पहुंच गई है। लद्दाख को कार्बन रहित बनाने की दिशा में एक यह अहम कदम है।

ये गांव हुए रोशन: पश्चिमी लद्दाख के दुर्गम इलाके में रहने वाले इन 19 गांवों के निवासियों को अब तक जेनरेटर से कुछ घंटे ही बिजली मिलती थी। आजादी के बाद पहली बार इन गांवों में पावर ग्रिड से बिजली पहुंची है। इन गांवों में चामशेन, कुरि, चरासा, बुरमा, पिनचिमिक, हसारा, क्यागर, सुमूर, लकजुंग, तिरिथ, त्याकसा, पनामिक, मिरिशा, हरगयाम, फुकपोचे, कोबैत, आई, अरानू व ससोमा शामिल हैं।

लद्दाख को कार्बन मुक्त बनाने की मुहिम: केंद्र सरकार के सहयोग से इस समय लद्दाख को कार्बन रहित बनाने की मुहिम चल रही है। इसलिए डीजल से रोशन होने वाले गांवों तक पावर ग्रिड से बिजली पहुंचाई जा रही है। इसके लिए पनबिजली परियोजनाओं, दूरदराज इलाकों तक ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसके साथ क्षेत्र में हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली बसें व ई-रिक्शा चलाने की दिशा में भी काम चल रहा है। 

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