मेड इन इंडिया लक्ष्मी, गणेश मूर्तियों का जलवा

वोकल फार लोकल का जलवा इस त्योहारी सीजन में खूब दिख रहा है।

JagranWed, 27 Oct 2021 11:50 PM (IST)
मेड इन इंडिया लक्ष्मी, गणेश मूर्तियों का जलवा

राजेश डढवाल, ऊना

वोकल फार लोकल का जलवा इस त्योहारी सीजन में खूब दिख रहा है। त्योहारों पर लंबे समय से चीन ने विभिन्न उत्पादों की बिक्री को लेकर जो पकड़ बना रखी थी, अब उसका असर धीरे-धीरे कम होने लगा है। चीन की ओर से हाल ही में भारत की सीमाओं पर पैदा किए जा रहे अनावश्यक तनाव को देखते हुए हर भारतीय के दिल में चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार का जो क्रम शुरू हुआ था, उसका असर नजर आ रहा है। यही कारण है कि दीपावली निकट आते ही बाजार में मेड इन इंडिया लक्ष्मी, गणेश की मूर्तियों का जलवा दिख रहा है।

लोग चीन में बने सामान को नकार रहे हैं। दीपावली करीब एक सप्ताह बाद है मगर इस पर्व के लिए बाजार अभी से सज गया है। नवरात्र, गणेश चतुर्थी या दीपावली हो, अन्य वस्तुओं के अलावा देवी-देवताओं की मूर्तियों की काफी मांग होती है। मूर्ति बाजार पर कुछ वर्षो से चीन में बनी मूर्तियों ने कब्जा करना शुरू कर दिया था। इस बार ऐसा नहीं है। त्योहारी सीजन में भारत में बनी मूर्तियां अधिक दिखाई दे रही हैं और इनकी मांग भी है। चीन में बनी मूर्तियां काफी हद तक गायब हैं। दीपावली पर ऊना बाजार में भारत में बनी मूर्तियों की काफी बिक्री हो रही है। तीन दशक से अधिक समय से उपहार सामग्री का कारोबार कर रहे राकेश कुमार ने कहा कि इस बार मूर्तियों के बाजार से चीन काफी हद तक गायब है। बहुत कम व्यापारी चीन से आयातित मूर्तियां बेच रहे हैं। वहीं, चीन के वास्तुशास्त्र में प्रचलित लाफिग बुद्धा भी अब स्वदेशी बाजार में धड़ल्ले से बन रहे हैं। ऊना के व्यापारी इन्हें दिल्ली से खरीद कर खूब बेच रहे हैं। 50 से 8,000 रुपये तक की मूर्तियां

मेड इन इंडिया मूर्तियों के दाम पिछले साल की अपेक्षा लगभग समान ही हैं। दाम में विशेष बदलाव नहीं आया है। आकार और साज-सज्जा के हिसाब से बाजार में 50 रुपये से लेकर 8,000 रुपये तक की मूर्तियां बिक रही हैं। दीपावली पर लक्ष्मी, गणेश, राम दरबार, हनुमान, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, शिव परिवार, दुर्गा और सरस्वती की मूर्तियों की मांग अधिक होती है। कई साल से मूर्तियों का कारोबार कर रहे राकेश ने बताता कि पोलिस्टोन, रेजिन व प्लास्टिक सामग्री से बनी मूर्तियों का इस बार बाजार में बोलबाला है जो भारत में निर्मित हैं।

स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी

त्योहारी सीजन में ग्राहक चीन में बनी भगवान की मूर्तियां खरीदने से कतरा रहे हैं। ज्यादातर ग्राहक देश में निर्मित मूर्तियों की मांग कर रहे हैं। लोग स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी पर जोर दे रहे हैं। अधिकतर उपभोक्ता दुकानदार से यह पूछने में गुरेज नहीं कर रहे कि सामान चीन में निर्मित तो नहीं है? इसका असर यह है कि दुकानदार भी चीन निर्मित सामान से दुकान सजाने में तौबा करते देखे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिए मंत्र 'लोकल के लिए बनें वोकल' का असर ऊना बाजार में देखने को मिल रहा है। चीन से आयातित मूर्तियां 30 से 40 फीसद तक महंगी

ऊना में गिफ्ट आइटम की दुकान सजाने वाले दुकानदार विजय अरुण, नेहा, अनुराग, अशोक व अनिल ने बताया कि चीन में बनी मूर्तियों के दाम इस बार बहुत ज्यादा हैं। भारत में बनी मूर्तियां साज सज्जा और फिनिशिग में चीन की मूर्तियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। भारतीय मूर्तियों की तुलना में चीन से आयातित मूर्तियां 30 से 40 फीसद तक महंगी हैं। ऐसे में व्यापारियों के लिए देश में निर्मित मूर्तियां बेचना फायदे का सौदा है। दिल्ली व मेरठ में बनी मूर्तियां बाजार में छाई

दुकानदारों के अनुसार ऊना बाजार में इस बार मुख्य रूप से दिल्ली के विभिन्न इलाकों जैसे बुराड़ी, गाजीपुर, सुल्तानपुरी व पुरानी दिल्ली के कुछ इलाकों में बनी मूर्तियां खूब बिक रही हैं। इसके अलावा मेरठ भी मूर्तियों का हब है। वहां की मूर्तियां भी बाजार में छाई हैं। इस बार दिल्ली सदर बाजार की थोक मार्केट से उन्होंने स्वदेश निर्मित मूर्तियां खरीदी हैं।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.