ओमिक्रोन : टेटिस्टंग ट्रेसिग और ट्रीटमेंट पर रहेगा जोर

कोरोना वायरस की दो लहरों में ठीक व्यवस्था के साथ चल रहे जिला ऊना के सामने अब ओमिक्रोन यानी कोविड-19 के नए वैरिएंट से निपटने के बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग अपने प्रबंधों को पुख्ता बता रहा है।

JagranWed, 08 Dec 2021 07:29 PM (IST)
ओमिक्रोन : टेटिस्टंग ट्रेसिग और ट्रीटमेंट पर रहेगा जोर

सुरेश बसन, ऊना

कोरोना वायरस की दो लहरों में ठीक व्यवस्था के साथ चल रहे जिला ऊना के सामने अब ओमिक्रोन यानी कोविड-19 के नए वैरिएंट से निपटने के बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग अपने प्रबंधों को पुख्ता बता रहा है। टेस्टिग, ट्रेसिग और जल्द ट्रीटमेंट इन तीनों पहलुओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग अभी से जुट गया है। उच्च अधिकारियों की गाइडलाइन के अनुसार विदेश से लौटने वाले लोगों पर स्वास्थ्य विभाग पैनी नजर बनाए हुए है। कोविड केयर सेंटर और अस्पतालों में नए वैरिएंट के खतरे को देखते हुए अभी से स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है। अस्पतालों में आक्सीजन युक्त बिस्तरों की व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया गया है। कुल मिलाकर कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर में कमियों के साथ लड़ाई लड़ने वाले स्वास्थ्य विभाग के पास अब संक्रमितों को देने के लिए पर्याप्त वेंटिलेटर, आक्सीजन और बिस्तर का प्रबंध है।

बच्चों के मद्देनजर पूरी की तैयारी

क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में विशेष शिशु वार्ड बनाया गया है। इसमें 30 बिस्तर का प्रविधान है। यहां वेंटिलेटर, कार्डिक मानिटर व 10 बिस्तर आइसीयू के रखे गए हैं। हरोली व पालकवाह में आइसीयू 10-10 बिस्तर का वार्ड बनाया है। ऊना अस्पताल में तीन शिशु रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। हालांकि संभावित खतरे को देखते हुए कहीं न कहीं यह थोड़ा कम भी है। कोविड से गंभीर हालत में पहुंचने वाले मरीजों को अंतिम सांस तक बचाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग के पास करीब 40 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। इन वेंटिलेटर्स को ऊना, पालकवाह, हरोली व पंडोगा अस्पतालों में स्थापित किया गया है।

कोविड-19 का नया वैरिएंट भी यकीनन मानव शरीर पर घातक असर छोड़ता है। ओमिक्रान के आगे कम से कम जिलावासी मरीजों को आक्सीजन युक्त बिस्तर की कमी न हो इसके लिए 360 बिस्तर का प्रविधान, ऊना, पालकवाह, बाथू, पंडोगा कोविड केयर अस्पतालों में किया गया है। स्टाफ को कोविड जैसी विपरीत परिस्थितियों के लिए भी प्रशिक्षित किया गया है, जोकि पहली और दूसरी लहरों में न के बराबर था। हरोली में नेस्ले कंपनी के सहयोग से 500 एलपीएम क्षमता का आक्सीजन प्लांट भी स्थापित किया गया है। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में स्थापित आक्सीजन प्लांट 1000 एलपीएम क्षमता का है जिससे अस्पताल में 100 बैड को हाई फ्लो आक्सीजन की सुविधा उपलब्ध है। अब तक विदेश से लौटे 89 लोगों की टेस्टिग, नहीं निकला कोई मामला

ओमिक्रोन को लेकर जिला स्वास्थ्य प्रबंधन विदेश से लौटे लोगों पर पैनी नजर बनाए हुए है। आधिकारिक सूचना और आशा वर्कर्स के माध्यम से मिली सूचना के आधार पर अब तक जिला में विदेश से लौटे करीब 89 लोगों की टेस्टिग की जा चुकी है। इनमें से ओमिक्रोन जांच के लिए भेजे करीब 20 सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव भी रही है। एहतियात के तौर पर विदेश से लौटने वालों को स्वास्थ्य विभाग 14 दिन तक होम आइसोलेशन में रख रहा है। जरूरत पड़ने पर विभाग संदिग्ध लोगों के एक बार टेस्ट करने के आठ दिन बाद दूसरी बार जांच कर रहा है, ताकि कोई भी चूक न हो सके। प्रदेश भर में जिला ऊना अभी तक सबसे ज्यादा विदेश से लौटे लोगों की कोविड जांच करने वाला जिला है।

प्रधान और आशा वर्कर्स से सूचना पर जोर:

जिला में ओमिक्रोन विदेश से लौटे लोगों और उनके कांटेक्ट के माध्यम से ही सक्रिय होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग विदेश से लौटने वाले लोगों की सूची बना रहा है। दूसरी ओर पंचायतों के प्रधान और स्थानीय आशा वर्कर्स के माध्यम से भी उनकी जानकारी जुटा रहा है। बार-बार लोगों से आग्रह भी कर रहा है कि किसी भी विदेश से लौटने वाले व्यक्ति और उनके परिवार सदस्यों की जानकारी उनसे साझा जरूर करें जिससे ओमिक्रोन को लेकर प्रारंभिक चरण में रोका जा सके।

यह भी है तैयारी

जिला के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आक्सीजन कंसंट्रेटर की उपलब्धता भी पर्याप्त है। गगरेट, अम्ब व बंगाणा अस्पतालों में भी आक्सीजन युक्त बिस्तर की उपलब्धता सुनिश्चत बनाई गई है। कोविड-19 की पुख्ता जांच के लिए कुछ दिन में पालकवाह में आरटीपीसीआर लैब को भी सुचारू कर दिया जाएगा। मास्क, शारीरिक दूरी, भीड़ जमा न करने का आह्वान

जिला चिकित्सा अधिकारी डा. रमन कुमार शर्मा ने बताया कि जिलावासी अब कोविड-19 के नए वैरिएंट को लेकर सतर्क रहें। मास्क, शारीरिक दूरी का नियम अपनाएं तथा विवाह-शादी और अन्य समारोहों में भीड़ का हिस्सा बनने से बचें। बाजार में भी भीड़ जमा न करें। विदेश से आने वाले हर नागरिक की जानकारी आशा वर्कर्स और प्रधान के साथ साझा करें और उनके बारे में स्वास्थ्य विभाग को अवगत करवाएं ताकि नए वैरिएंट को भी मात दी जा सके।

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