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शिमला जिले में नशा रोकने के लिए जिला परिषद सदस्य एकजुट

जागरण संवाददाता, शिमला : उपायुक्त कार्यालय शिमला के बचत भवन में जिला परिषद की बैठक अध्यक्ष धर्मिला हरनोट की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जिला परिषद सदस्यों ने नशे के बढ़ते कारोबार व प्रवृत्ति को रोकने, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की दशा सुधारने, परिवहन, पीने के पानी तथा बिजली की कम वोल्टेज को दूर करने के मामले प्रमुखता से उठाए।

सदस्य नीलम सरैक ने कोटखाई क्षेत्र में नशे के कारोबार को रोकने का मामला सदन में उठाया। उन्होंने कहा आज युवा वर्ग तथा स्कूली बच्चे नशे में फंसते जा रहे हैं। इस विषय पर बैठक में सभी सदस्यों ने विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऊपरी शिमला के 80 फीसद बच्चे नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। नशे के खात्मे के लिए सभी लोगों को आगे आना होगा। सदस्य मोती सिथटा व रीना ठाकुर ने इसका समर्थन किया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीर ठाकुर ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे ग्रामीण स्तर पर किसी भी नशे के बारे में संलिप्त लोगों की सूचना पुलिस को दें। इसके अलावा साइबर क्राइम और महिलाओं से छेड़छाड़ के बढ़ रहे मामलों पर भी चिता जताई गई। फैसला लिया कि जिला स्तर पर नशे को रोकने के लिए समन्वय समिति बनाई जाए, जिसमें पुलिस के साथ अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। रोहड़ू से लापता शुभम की सीबीआइ जांच की मांग

रोहड़ू से दो माह पूर्व लापता हुए शुभम की जिला परिषद सदस्यों ने सीबीआइ जांच की मांग उठाई है। सदस्यों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि गरीब परिवार अपने बेटे को ढूंढ रहा है। पुलिस दो माह बाद भी खाली हाथ है, पुलिस ने इस मामले में कुछ नहीं किया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीर ठाकुर ने सदन को अवगत करवाया कि इस मामले में शुभम के साथी का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवा लिया गया है। अब उसका नार्को टेस्ट होगा। सदन से प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। सदन से गैरहाजिर अधिकारियों को नोटिस होंगे जारी

जिला परिषद की बैठक में गैरहाजिर अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। जिला खेल अधिकारी बैठक से गैरहाजिर थे। इसके अलावा एक्सईएन आइपीएच मतियाना भी बैठक में नहीं पहुंचे। इस पर सदन में माहौल गरमा गया और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की। अतिरिक्त उपायुक्त ने अधिकारियों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए। एपीएमसी की लगाई क्लास

जिला परिषद की बैठक में एपीएमसी के अधिकारियों की सदस्यों ने क्लास लगाई। अधिकारियों से पूछा गया कि दो वर्ष से सेब मंडियों में सेब की खरीद-फरोख्त में नियमों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। मंडी के नियमों के तहत निश्चित मापदंड व नियम सदन में क्यों प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं। हर साल मंडी में करोड़ों रुपये की ठगी बागवानों के साथ होती है। एपीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि बागवानों को जागरूक करने के लिए फरवरी और मार्च में शिविर लगाए जाएंगे। 375 शिकायतें इस बार भी मिली हैं। आठ करोड़ का भुगतान नहीं हुआ है। एसआइटी का गठन किया गया है एसआइडी ने तीन करोड़ बागवानों को दिला दिया है। अन्य मामलों पर कार्रवाई जारी है।

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